आसान नहीं पाकिस्तान में इमरान खान होना!

पाकिस्तान में कोई उन्हें हीरो समझता होगा, कोई विलेन मानता होगा, लेकिन असल में वो हीरो या विलेन नहीं, बहुत मजबूर आदमी हैं.

इमरान खान पाकिस्तान के प्रधानमंत्री हैं. आजकल मुंह में आग भरकर बैठे हैं. जब से जम्मू-कश्मीर में आर्टिकल 370 खत्म किया गया है, तभी से रोज़ कोई न कोई बयान इमरान खान दे देते हैं और पाकिस्तानी व भारतीय मीडिया में छा जाते हैं. कश्मीर की ऐसी रट लगा रखी है कि खाना खाते वक्त भी रोटी की बजाय कश्मीर मांग लेते होंगे.

पाकिस्तान में कोई उन्हें हीरो समझता होगा, कोई विलेन मानता होगा, लेकिन असल में वो हीरो या विलेन नहीं हैं. इमरान खान एक बहुत मजबूर इंसान हैं जिनको बदहवास नेताओं के साथ प्राइम मिनिस्टर की कुर्सी दे दी गई है. इस कुर्सी पर बैठकर क्या करना है, ये इमरान खान को समझ में नहीं आ रहा. उन्होंने कुर्सी छोड़ माइक पकड़ लिया है. उसी की सेवा में लगे हैं.

इमरान खान को अपने ही देश में बिलावल भुट्टो कहते हैं कि ये इलेक्टेड नहीं सेलेक्टेड पीएम हैं. जिन्हें आर्मी ने सेलेक्ट किया है. इसमें कुछ गलत भी नहीं है. उनकी पार्टी ‘पाकिस्तान तहरीक ए इंसाफ’ बहुमत में नहीं है. सेना की कृपा से ही वो पीएम बने हुए हैं. ये बात अब पाकिस्तान के बच्चे भी जानते हैं कि वहां आम जनता से लेकर राजनीति तक सेना का दखल है.

इमरान खान पाकिस्तान के कामयाब क्रिकेटर रह चुके हैं. उन्हीं के जमाने का एक और कामयाब क्रिकेटर उनकी जड़ों में मट्ठा डालता रहता है. इधर वो कश्मीर पर नपा तुला बयान देते हैं, उधर पूर्व क्रिकेटर और दाउद इब्राहीम के समधी जावेद मियांदाद आग लगा देते हैं. तलवार निकालकर कश्मीर की तरफ कूच करने का ऐलान कर देते हैं. वहीं के बाकी नेता परमाणु बम की धमकी देते हैं और ये तलवार लहराते हैं. इन सबके बीच में इमरान खान एकदम से दब जाते हैं.

देखा जाए तो दुनिया की सारी ताकतें इस वक्त इमरान खान के खिलाफ हैं. उन्होंने जुम्मे को जो आधे घंटे का ‘कश्मीर ऑवर’ शो किया था वो फेल हो गया. यानी जनता ही उनके खिलाफ है. बिलावल भुट्टो उनके खिलाफ हैं. जमाते इस्लामी जैसे तमाम कट्टरपंथी संगठन इमरान के खिलाफ हैं. सलाहुद्दीन जैसे आतंकी इमरान को युद्ध छेड़ने की सलाह देने के लिए चिट्ठी लिख रहे हैं.

कश्मीर की रट लगाना इमरान खान ही नहीं पाकिस्तान के हर नेता के लिए संजीवनी बूटी है. जिस दिन पाकिस्तान से कश्मीर की आवाज उठनी बंद हो जाएगी उस दिन उसका वजूद सवालों में आ जाएगा. ऐसा इमरान खान को लगता है. उन्हें लगता है कि वो दुनिया की आंखों में तभी तक रह सकते हैं जब तक कश्मीर-कश्मीर कर रहे हैं.

कुल मिलाकर इमरान खान की हैसियत उस रस्सी की हो गई है जिसे एक तरफ पाकिस्तान की जनता खींच रही है, दूसरी तरफ पाक आर्मी खींच रही है. बीच में पाकिस्तान के गाल बजाऊ नेता लटके हुए हैं.

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