मसूद अजहर की वजह से रोएंगे करोड़ों पाकिस्तानी क्रिकेट फैंस?

नई दिल्ली: पूरा देश पुलवामा हमले को लेकर उबल रहा है और इस उबाल की आंच इन्हीं गर्मियों में इंग्लैंड में होने वाले विश्व कप तक पहुंच गई है. कई पूर्व क्रिकेटरों समेत अलग-अलग हिस्सों से पाकिस्तान के हर स्तर पर बायकाट की मांग उठ रही है. इसी बीच बीसीसीआई ने पड़ोसी मुल्क को विश्व […]

नई दिल्ली: पूरा देश पुलवामा हमले को लेकर उबल रहा है और इस उबाल की आंच इन्हीं गर्मियों में इंग्लैंड में होने वाले विश्व कप तक पहुंच गई है. कई पूर्व क्रिकेटरों समेत अलग-अलग हिस्सों से पाकिस्तान के हर स्तर पर बायकाट की मांग उठ रही है. इसी बीच बीसीसीआई ने पड़ोसी मुल्क को विश्व कप से बाहर करने की मांग रख दी है. इसके बाद सवाल ये उठ गया है कि क्या पाकिस्तानी फैंस अब मसूद अजहर के किए की सजा भुगतेंगे?

पाकिस्तान के दिल पर लगेगा घाव

पाकिस्तान के लिए क्रिकेट का क्या मतलब है, इसका अंदाजा भारत को बखूबी है. खासतौर से भारत-पाकिस्तान के बीच होने वाले इक्का-दुक्का मैचों को लेकर जो जुनून है उसकी कहानी ही कुछ अलग है. तभी तो 16 जून को तय भारत-पाक मुकाबले के लिए 25 हजार दर्शकों की क्षमता वाले ओल्ड ट्रेफर्ड मैदान में मैच देखने के लिए अब तक 40 हजार से अधिक फैंस ने आवेदन कर दिया है. ये जुनून इधर भी है और उधर भी. यहां तक कि विश्व कप फाइनल के लिए भी टिकटों की इतनी मांग नहीं है. लेकिन भारतीय क्रिकेट के पास अपने फैंस को एंटरटेन करने और विकल्प देने के दूसरे भी कई मौके हैं, जबकि सीमा पार ऐसा नहीं है. ज्यादातर देश तो अब भी उनकी धरती पर जाकर क्रिकेट खेलने के लिए तैयार नहीं हैं. ऐसे में भारतीय बायकाट का घाव पाकिस्तान के दिल पर गहरा लगना तय है.

पाकिस्तान के करोड़ों क्रिकेट फैंस भुगतेंगे मसूद अजहर की सजा !

दुनिया भर में क्रिकेट फैंस को लेकर आईसीसी का एक बड़ा और दिलचस्प सर्वे अभी-अभी सामने आया है. पहली बार किए गए अपनी तरह के इस सर्वे के मुताबिक पूरी दुनिया में करीब 1 अरब क्रिकेट फैंस हैं, जिनमें 90 प्रतिशत भारत और पाकिस्तान में हैं. जाहिर है क्रिकेट फैंस के लिहाज से भारत अव्वल है, लेकिन उसके ठीक पीछे पाकिस्तान ही खड़ा है. ऐसे में अगर किसी विश्व कप से पाकिस्तान की विदाई या भारत-पाक मैच का न होना, करोड़ों पाकिस्तानियों को दर्द देगा. शायद वैसा ही दर्द, जैसा मसूद अजहर ने भारत को दिया है.

 

पूर्व क्रिकेटरों की सधी हुई सलाह

कई पूर्व क्रिकेटरों ने भी भारत-पाकिस्तान क्रिकेट संबंधों पर बात की है. लेकिन अभी तक किसी ने पाकिस्तान को विश्व कप से बेदखल करने की बात नहीं की है.
सौरव गांगुली का राय है कि- “10 टीमों के टूर्नामेंट में टीमें एक दूसरे के साथ खेलेंगी और मुझे लगता है कि अगर भारत विश्व कप में एक मैच नहीं खेलता है तो यह कोई मुद्दा होगा.” गांगुली न सिर्फ बेहतरीन क्रिकेटर, बल्कि शानदार कप्तान भी रहे हैं, ऐसे में उन्हें बखूबी पता होगा कि इस तरह से एक मैच के लिए भी भारत की ओर से पाकिस्तान के बायकाट का कितना बड़ा मतलब होगा. गांगुली दरअसल, हरभजन सिंह के सुझाव का समर्थन कर रहे थे, जिन्होंने उनसे पहले पाकिस्तान के साथ विश्व कप का मैच न खेलने का प्रस्ताव रखा था.
वहीं, पूर्व क्रिकेट और यूपी की बीजेपी सरकार में मंत्री चेतन चौहान सीधे पाकिस्तान को विश्व कप से बाहर निकाने की कोशिश को गलत तो नहीं कहते, लेकिन उनके इशारे को बीसीसीआई गंभीरता से ले सकती है। चौहान ने कहा है कि- “विश्व कप जैसे टूर्नामेंट के अपने कुछ नियम होते हैं और यहां मामला दो देशों का नहीं होता है. वहां कई चीजें देखनी होती हैं. जाहिर है चेतन चौहान प्रैक्टिकल एप्रोच के साथ बातें कर रहे हैं, जबकि सौरव और हरभजन सरीखे खिलाड़ी भी पाकिस्तान पर सीमित प्रतिबंधों के ही पक्षधर नजर आते हैं. हालांकि बीसीसीआई ने पाकिस्तान को विश्व कप से बाहर करने की बात कहकर संभवत: क्रिकेट के सबसे बड़े विवाद को न्योता दे दिया है.

 

विश्व क्रिकेट अगर इस वजह से बंटा तो…

सवाल सिर्फ ये नहीं है कि बीसीसीआई की मांग पर आईसीसी का फैसला क्या आता है? चिंता ये रहेगी कि अगर इस मुद्दे पर विश्व क्रिकेट बंटता है, तो इसकी आंच पूरे क्रिकेट के खेल पर पड़ेगी और कुछ वक्त बाद दुनिया भर के क्रिकेट फैंस को इसकी वजह से बुरा लगने का खतरा रहेगा, जिनमें यकीनन भारतीय फैंस भी होंगे.
क्यों आईसीसी को भारत के सामने झुकना पड़ सकता है?
फिर भी मौजूदा दौर में अगर ये कहें कि क्रिकेट की जिंदगी की डोर काफी हद तक भारत के हाथों में है, तो गलत नहीं होगा. आज कोई भी खेल सिर्फ और सिर्फ पैसे की बुनियाद पर खड़ा है. खेलों से जुड़े किसी भी सिस्टम की कामयाबी इसी बात से तय होती है कि उसमें कितने पैसे पैदा हो रहे हैं? और तथ्य यही है कि विश्व क्रिकेट में पैदा होने वाले रेवेन्यू का 70 प्रतिशत हिस्सा भारतीय क्रिकेट बाजार से आता है. 2017 में इस बात को लेकर विवाद भी उठा था, जब भारत ने आईसीसी के 400 मिलियन डॉलर के रेवेन्यू की पेशकश को ठुकरा दिया था. तब इस मुद्दे पर क्रिकेट ऑस्ट्रेलिया ने भी भारत का ये कहकर साथ दिया था कि विश्व क्रिकेट में भारत के योगदान को देखते हुए ये रकम काफी कम है. ये उदाहरण इसलिए क्योंकि ऐसी ही चीजों से ये अंदाजा लगाया जा सकता है कि पाकिस्तान को विश्व कप से बेदखल करने की मांग कितनी सुनी जा सकती है?

 

फिर भी जो सवाल बाकी रह जाते हैं…

क्रिकेट के रिश्ते खत्म कर लेना एक आसान रास्ता है. आईसीसी अगर पाकिस्तान को विश्व कप से बेदखल नहीं भी करता है, तो हम उनके साथ मैच खेलने से मना कर सकते हैं. ऐसा करने से हमें कोई नहीं रोक सकता. इसका अधिकतम नुकसान यही होगा कि बीसीसीआई को मैच न होने की सूरत में होने वाले नुकसान की भरपाई करनी पड़ सकती है.
लेकिन सवाल बाकी रह जाएगा कि पाकिस्तान को सबक सिखाने का क्या हमारा एक ऐसा आसान फैसला नहीं है, जिसमें एक बड़े वर्ग के सेंटीमेंट से खेलने का जोखिम रहेगा?
अलगाववादियों और कुछ कश्मीरी नेताओं को दी गई सुरक्षा को हटा लेने का फैसला (मौजूदा वक्त में) कश्मीर से बाहर शेष भारत को शायद ही नाराज करेगा. न ही धारा 370 हटा लेने का फैसला (अगर ऐसा होता है तो) देश नापसंद करेगा. पाकिस्तान से व्यापारिक रिश्ते तोड़ लेने या स्थगित करने के फैसले को भी (फिलहाल) कमोबेश पूरा देश मंजूर कर लेगा. लेकिन क्या विश्व कप में पाकिस्तान के साथ न खेलने या उसे विश्व कप से बाहर करा देने के फैसले के साथ भी ऐसा है?
याद रहे- विश्व कप में भारत बनाम पाकिस्तान मुकाबलों के आंकड़े भारत के हक में 6-0 से एकतरफा झुके हुए हैं. जबकि टी-20 विश्व कप को भी शामिल कर लें, तो आंकड़ा 11-0 हो जाता है. क्या ये ज्यादा बेहतर नहीं रहेगा कि हमारा देश और हमारे सैनिक सैन्य मोर्चे पर उन्हें सबक सिखाएं और हमारे क्रिकेटर, क्रिकेट की पिच पर हमेशा की तरह एक बार फिर उनका मान-मर्दन करें?