priyanka gandhi selfie politics, प्रियंका की सेल्फी पॉलिटिक्स के सहारे क्या यूपी के आईसीयू से बाहर आ जाएगी कांग्रेस ?
priyanka gandhi selfie politics, प्रियंका की सेल्फी पॉलिटिक्स के सहारे क्या यूपी के आईसीयू से बाहर आ जाएगी कांग्रेस ?

प्रियंका की सेल्फी पॉलिटिक्स के सहारे क्या यूपी के आईसीयू से बाहर आ जाएगी कांग्रेस ?

सेल्फी वाली पॉलिटिक्स करने से कांग्रेस को कोई सियासी फायदा मिलेगा, ये समझ से परे है. जिस समय प्रियंका चुनार में सेल्फी का हिस्सा बन रही थीं उसी समय योगी आदित्यनाथ विधानसभा में सोनभद्र के लिए कांग्रेस को जिम्मेदार ठहरा रहे थे
priyanka gandhi selfie politics, प्रियंका की सेल्फी पॉलिटिक्स के सहारे क्या यूपी के आईसीयू से बाहर आ जाएगी कांग्रेस ?

तस्वीरें झूठ नहीं बोलती. इस तस्वीर के साथ भी यही बात लागू होती है. ये मालूम नहीं कि इसकी अनुमति प्रियंका गांधी ने दी है. पर, ये ज़रूर है कि वो इससे वाकिफ हैं. अगला फ्रेम इसकी तस्दीक करता है.

ये तस्वीर बनारस के पास की है. चुनार गेस्ट हाउस के बाहर की. पूर्वी यूपी की महासचिव प्रियंका गांधी सड़क पर धरना दे रही हैं. वो व्यथित हैं क्योंकि यूपी पुलिस ने सोनभद्र जाने से रोक दिया है. प्रियंका जमीन पर कब्जे की लड़ाई में मारे गए लोगों के परिजनों से मिलना चाहती हैं.

सेल्फी पॉलिटिक्स नया नहीं है. गमजदा मौकों पर भी क्लिक की जाती रही है. कांग्रेस के सक्रिय कार्यकर्ता ने भी यही किया. हालांकि ये कई सवाल छोड़ गया. आखिर मातम का हिस्सा बनने को बेताब प्रियंका ने उस कार्यकर्ता को क्यों नहीं टोका ? 17 जुलाई को हुई इस घटना के दो दिन बाद वो स्पॉट पर क्यों जाना चाहती हैं ? जब सारे घायल और उनके तीमारदार बनारस के अस्पताल में हैं तो प्रियंका उभ्भा गांव जाकर किसके साथ सहानुभूति जताने वाली हैं ?

क्या वाकई प्रियंका का जाना जरूरी नहीं सियासी मजबूरी है? पूर्वी यूपी की महासचिव के नाते प्रियंका बुरी तरह फेल हो चुकी हैं. लोकसभा चुनाव में कांग्रेस की सियासी जमीन और खिसक गई. अब यूपी की 12 विधानसभा सीटों पर उपचुनाव होना है. इसलिए प्रियंका शायद सोनभद्र की सियासत के सहारे यूपी में सांसे गिन रही कांग्रेस को आईसीयू से बाहर लाना चाहती हैं.

नरसंहार का कोई सियासी दायरा नहीं

सोनभद्र का कथित नरसंहार किसी सियासी दायरे में अब तक नहीं आया है. अभी तक मुख्य आरोपी प्रधान की सियासी सहानुभूति भी सामने नहीं आई है. पर 100 बीघे जमीन के लिए 10 लोगों को गोलियों से भून देना कोई छोटी घटना नहीं है. ये निश्चित रूप से बड़ी आपराधिक घटना है. लिहाजा कानून-व्यवस्था पर कांग्रेस अगर सवाल उठाती है तो इसमें कुछ गलत भी नहीं है.

priyanka gandhi selfie politics, प्रियंका की सेल्फी पॉलिटिक्स के सहारे क्या यूपी के आईसीयू से बाहर आ जाएगी कांग्रेस ?

पर इसके उलट सड़क पर सेल्फी वाली पॉलिटिक्स करने से कांग्रेस को कोई सियासी फायदा मिलेगा, ये समझ से परे है. जिस समय प्रियंका चुनार में सेल्फी का हिस्सा बन रही थीं उसी समय योगी आदित्यनाथ सोनभद्र पर विधानसभा में कांग्रेस को जिम्मेदार ठहरा रहे थे. योगी का आरोप है कि 1955 से 1989 के बीत गलत तरीके से कांग्रेस सरकार ने उस जमीन को आदर्श सोसायटी के नाम किया था.

तब संपूर्णानंद यूपी के चीफ मिनिस्टर थे. संयोग से वो बनारस (दक्षिण) से ही चुन कर विधानसभा पहुंचे थे. कांग्रेस इस आरोप पर सन्न है. हो सकता है कुछ पुराने नेताओं को 1955 की याद ताजा करने को कहा गया हो.

जो भी हो प्रियंका का सड़क पर उतना कांग्रेस के लिए सही है लेकिन जिसको आधार बनाकर उतरी हैं शायद उससे पार्टी का भला न हो पाए. उनको जनता के मुद्दों की आवाज बननी होगी.

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