तो क्‍या राहुल गांधी का कद सावरकर से बड़ा हो गया?

माफी की वह चिट्ठी 14 नवंबर, 1913 को लिखी गई. तब सावरकर अंडमान की सेलुलर जेल में बंद थे.

कांग्रेस सांसद राहुल गांधी ने विनायक दामोदर सावरकर का संदर्भ देकर भाजपा को ललकारा है. राहुल के ‘रेप इन इंडिया’ वाले बयान पर एक दिन पहले संसद में खूब बवाल हुआ था. इसी का जवाब उन्‍होंने दिल्‍ली में ‘भारत बचाओ’ रैली के दौरान दिया. राहुल ने कहा, “कल संसद में भाजपा के नेता मुझसे माफी की मांग कर रहे थे. लेकिन मैं उन्हें बता देना चाहता हूं कि मेरा नाम राहुल सावरकर नहीं है, मैं राहुल गांधी हूं. मैं माफी नहीं मागूंगा.” राहुल ने एक दिन पहले वीडियो शेयर किया था जिसमें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ‘रेप कैपिटल’ कहते दिखते हैं. आज सावरकर को आहूत कर राहुल ने क्‍या अपना कद उनसे ऊंचा कर लिया है?

राहुल का इशारा उस चिट्ठी की तरफ था जो सावरकर का जिक्र होते ही एक पक्ष आगे कर देता है. यह चिट्ठी 14 नवंबर, 1913 को लिखी गई. तब सावरकर अंडमान की सेलुलर जेल में बंद थे. उनके साथ और भी क्रांतिकारी थे जो ‘काला पानी’ की यातनाएं झेल रहे थे. इस चिट्ठी में सावरकर ने ब्रिटिश सरकार से खुद को रिहा करने की गुहार लगाई थी और कहा था कि वे राजघराने के प्रति समर्पित रहेंगे.

सावरकर ऐसी शख्सियत हैं जो एक तबके के लिए पूजनीय रहे तो दूसरे के लिए अछूत. हिंदू राष्ट्रवाद को परिभाषित करनेवाले और उसे दार्शनिक आधार देनेवाले सावरकर RSS के लिए हमेशा प्रेरणास्रोत रहे जिसकी सदस्यता उन्होंने कभी नहीं ली.

सावरकर पर रह-रहकर विवाद होते रहते हैं. कभी संसद में उनकी ऑयल पेंटिंग लगाने पर सावरकर के विरोधियों ने आपत्ति जताई तो कभी अंडमान निकोबार द्वीपसमूह की राजधानी में स्थित हवाई अड्डे को सावरकर का नाम देने पर हल्ला कटा. कई राज्‍यों के स्‍कूली सिलेबस में भी सावरकर को लेकर कभी कुछ घटाया गया कभी बढ़ाया गया.

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