भारतीय राजनीति में निर्दलीय प्रजाति … स्वरूप और संभावनाएं

गोपाल कांडा को रातोंरात दिल्ली उठा लाया गया, इसका मतलब सुपरमैन से ज्यादा शक्ति अब निर्दलीय में है.
Gopal Kanda BJP, भारतीय राजनीति में निर्दलीय प्रजाति … स्वरूप और संभावनाएं

बात शुरू करने से पहले ऊपर वाली तस्वीर देखनी जरूरी है. ये दाढ़ी और मूंछ के बीच मुस्कराते हुए शख्स गोपाल कांडा हैं. हरियाणा में निर्दलीय उम्मीदवार थे, जीत गए. इनके साथ कुछ और निर्दलीय विधायकों को प्राइवेट प्लेन में बिठाकर सिरसा से बीजेपी सांसद सुनीता दुग्गल दिल्ली ले गईं. दिल्ली में जो होगा वो पता चल जाएगा, अभी ये तस्वीर सामने है.

Gopal Kanda BJP, भारतीय राजनीति में निर्दलीय प्रजाति … स्वरूप और संभावनाएं

भारतीय लोकतंत्र की खूबी ये है कि यह बहुत खूबसूरत है. इसकी खूबसूरती की विरदावली गाकर पार्टियां चार चांद लगाती रहती हैं. चुनाव होने के बाद वोटों की गिनती के दिन लोकतंत्र अपने सबसे खूबसूरत स्वरूप में होता है, इतना खूबसूरत कि उसे जमीन पर रख दो तो जमीन मैली हो जाए.

यहां की राजनीति में दो बड़ी खूबसूरत चीजें हैं, एक दलबदलुआ नेता और दूसरे निर्दलीय नेता. दलबदलुआ वो जिनके कॉन्फिडेंस में देश का सबसे बड़ा नेता विपक्षी पार्टी को धमकी दे सकता है कि ‘तुम्हारे चालीस विधायक हमारे संपर्क में हैं.’ दूसरे नंबर पर आते हैं निर्दलीय नेता. इनके चाल चलन बोल वचन पर चर्चा करने का समय आ गया है.

अभी महाराष्ट्र और हरियाणा में विधानसभा चुनाव निपटे हैं इसलिए विधायक स्तर के निर्दलीयों की बात करते हैं. इसमें दो तरह के निर्दलीय नेता होते हैं, एक चुनाव जीतने से पहले वाले और दूसरे चुनाव जीत जाने वाले.

कैसे कैसे निर्दलीय

चुनाव से पहले निर्दलीय नेता को कोई पूछ नहीं रहा होता. चैनलों वाले ग्राउंड रिपोर्टिंग करने आते हैं तो बड़ी पार्टी के नेताओं से बात करके चले आते हैं. निर्दलीय चुनाव लड़ने वाले कई नेता होते हैं. पहले वे जिनको पार्टी धकियाकर निकाल चुकी होती है. ये अकेले ताल ठोंकते हैं और अपनी पूर्व पार्टी के उम्मीदवार को ललकारते हैं.

फिर आते हैं आपराधिक रिकॉर्ड वाले नेता. इन्हें अपने कुकर्म छिपाने होते हैं इसलिए राजनीति की वॉशिंग मशीन में गोता लगा जाते हैं. जीतने पर इनको भ्रष्टाचार और जुर्म का खात्मा करने का दावा करने वाली पार्टी भी अच्छे दाम देकर खरीदती है और ये एकदम सफेद हो जाते हैं.

आपराधिक रिकॉर्ड की बात चली है तो ऊपर दिखी फोटो फिर याद दिलाते हैं. गोपाल कांडा सिरसा सीट पर महज 602 वोटों से जीतकर विधायक बने हैं. 2009 में निर्दलीय विधायक थे तब कांग्रेस की हुड्डा सरकार में मंत्री बने थे.

Gopal Kanda BJP, भारतीय राजनीति में निर्दलीय प्रजाति … स्वरूप और संभावनाएं

2012 में गोपाल कांडा का नाम तब हेडलाइन में छाया जब उनकी एमडीएलआर एयरलाइंस में काम करने वाली एयर होस्टेस गीतिका शर्मा ने खुदकुशी कर ली और सुसाइड नोट में गोपाल कांडा का नाम लिखा. 10 दिन अंडरग्राउंड रहने के बाद कांडा ने सरेंडर कर दिया था.

आपराधिक रिकॉर्ड से आगे फिर निर्दलीय नेताओं पर बढ़ते हैं. अपराधियों के अलावा कुछ बेरोजगार लोग होते हैं जो हर चुनाव का इंतजार करते हैं, उसी मौसम में उन्हें थोड़ा काम मिलता है और वे नामांकन भर देते हैं फिर पूरे महीने बिजी रहते हैं. इनका उद्देश्य अपना नाम बढ़ाकर सिर्फ बूथ पर ईवीएम मशीनों की गिनती बढ़ाना रहता है.

फिर आते हैं पेशेवर निर्दलीय नेता. इनमें प्रधान से लेकर राष्ट्रपति तक का चुनाव लड़ने वाले शामिल होते हैं. इनके लिए ‘धरती पकड़’ टर्म निकाला गया है. कुछ निर्दलीय लोग तो 20 बार तक चुनाव लड़ चुके हैं, कभी नहीं जीते लेकिन हौसला नहीं हारे. अब भी हर चुनाव लड़ते हैं, उसी ऊर्जा के साथ.

चुनाव के बाद निर्दलीय

चुनाव हार जाने वाले निर्दलीय तो अगले चुनाव तक के लिए अंडरग्राउंड हो जाते हैं. असली मौज जीत जाने वालों की होती है. उनका फोन लगातार बिजी बताता है. बड़ी पार्टियों के बड़े नेता उनसे बात करने को बिछे पड़े रहते हैं.

उनको प्राइवेट प्लेन या बसों में भरकर रिजॉर्ट में ठहराया जाता है. अब तो राजनीति का नाम ही इन निर्दलीय नेताओं की वजह से रिजॉर्टनीति हो गया है. लोग तो ये भी कहते हैं कि बोली लगती है और सौदा होता है. 2008 में संसद के अंदर बीजेपी के तीन सांसदों ने एक करोड़ रुपए के नोटों की गड्डियां दिखाई थीं.

Gopal Kanda BJP, भारतीय राजनीति में निर्दलीय प्रजाति … स्वरूप और संभावनाएं

जीते चाहे जो कोई, चांदी निर्दलीयों की रहती है. मधु कोड़ा को 2005 में बीजेपी से टिकट नहीं मिला तो निर्दलीय लड़े और जीत गए. 2006 में तीन निर्दलीय विधायकों के समर्थन से झारखंड के पांचवें मुख्यमंत्री बन गए. निर्दलीय का ये जलवा होता है.

कहते हैं दल और दिल तो आजकल आसानी से मिल जाते हैं, जो निर्दलीय को हासिल कर लें वो अमित शाह कहलाते हैं.

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