व्यंग्य: पहले ईरान से अपना झगड़ा निपटा लें ट्रंप, फिर करें कश्मीर मुद्दे पर मध्यस्थता की बात

अमेरिका के राष्ट्रपति कश्मीर मसले पर मध्यस्थता करेंगे. पाकिस्तान से उनको बड़ी उम्मीद है. जिसने अभी तक दाउद इब्राहीम का पता नहीं बताया.
Donald trump, व्यंग्य: पहले ईरान से अपना झगड़ा निपटा लें ट्रंप, फिर करें कश्मीर मुद्दे पर मध्यस्थता की बात

बात शुरू करने से पहले खबर जान लीजिए नहीं तो बिना संदर्भ व्याख्या करने पर ज्ञान की गाड़ी पटरी से उतर सकती है. तो पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान तीन दिवसीय अमेरिका दौरे पर हैं. भारत के साथ संबंधों पर भी बात होनी थी. इमरान खान और अमेरिकी राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप ने प्रेस कॉन्फ्रेंस के सामने कश्मीर मुद्दे पर बात की. इमरान खान ने कहा कि उन्हें खुशी होगी अगर अमेरिका जैसे पावरफुल देश के राष्ट्रपति कश्मीर मसले को सुलझाने के लिए मध्यस्थता करें.

इमरान खान ने जो कहा उसकी बात नहीं हो रही है. ट्रंप ने कहा कि कुछ दिन पहले भारत के प्रधानमंत्री मोदी आए थे तो उन्होंने कहा था कि वो भी चाहते हैं कि ट्रंप मध्यस्थता करें. इसी बयान पर बवाल हो गया. पता चला कि झूठ बोलने के आदी ट्रंप ने एक बार फिर ऊंची ऊंची फेंक दी है. थोड़ी देर बाद व्हाइट हाउस से बयान आया तो ट्रंप की इस बात का कहीं जिक्र नहीं था. यानी इस बयान से ट्रंप का झूठ कैंची से उड़ा दिया गया.

इधर भारत में विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रवीश कुमार ने ट्वीट करके कहा कि पीएम मोदी ने अमेरिकी राष्ट्रपति से ऐसी कोई रिक्वेस्ट नहीं की. राज्यसभा में विदेशमंत्री एस जयशंकर ने कहा कि ट्रंप के दावे में कोई दम नहीं है. प्रधानमंत्री ने ऐसी कोई मांग नहीं की. वहां अमेरिकी सांसद ब्रैड शरमन ने कहा कि कश्मीर मुद्दे पर मध्यस्थता वाला ट्रंप का बयान बचकाना और शर्मनाक है. इसके लिए उन्होंने ट्रंप की इस गलती की भारतीय राजदूत से माफी भी मांगी है.

Donald trump, व्यंग्य: पहले ईरान से अपना झगड़ा निपटा लें ट्रंप, फिर करें कश्मीर मुद्दे पर मध्यस्थता की बात

तो ये होता है भाईसाब, कुछ लोगों से एक बार गले मिल लो तो वो गले पड़ जाते हैं. ट्रंप की इस बात से हमारे गांव के एक ताऊ की याद आ गई. उनको ये गलतफहमी हमेशा बनी रहती है कि उनकी बात सुनी जाती है. इसलिए वो हमेशा बोलते रहते हैं. उनको लगता है कि उनकी गली के चौकीदार से प्रधानमंत्री तक जो कुछ कहते हैं वो उनसे ही कहते हैं. कहीं झगड़ा हो रहा हो तो सुलझाने पहुंच जाते हैं लेकिन लोगों को पता नहीं लगता कि लड़ाई इन्होंने ही कराई है.

अमेरिका के राष्ट्रपति कश्मीर मसले पर मध्यस्थता करेंगे. पाकिस्तान से उनको बड़ी उम्मीद है. जिसने अभी तक दाउद इब्राहीम का पता नहीं बताया. जिसने कभी नहीं बताया कि अबोटाबाद में लादेन छिपा बैठा है. घर में घुसकर मारने वाला अमेरिका मध्यस्थता करेगा? हाऊ फ़नी! अगर ऐसी बात है तो हम भी दाउद को अमेरिका और ईरान के बीच मीडिएटर बना देते हैं. बस उसका पता लग जाए कि कहां बैठा है.

कभी कभी ऐसा लगता है जैसे हमारे पीएम मोदी ‘मन की बात’ करते हैं, वैसे ही ट्रंप को ‘ट्रंप की बात’ शो शुरू करना चाहिए. इस शो में सिर्फ झूठी बातें होंगी. ट्रंप उस प्रोग्राम में जी भर कर झूठ बोल लें. बताएं कि उन्होंने ईरान पर सपने में बम गिरा दिया, चलती ट्रेन को उंगली के इशारे से रोक दिया, सूरज पर जाकर सीएफएल लगा दिया ताकि उसकी रोशनी कम न हो आदि आदि. हालांकि वो झूठ बोलने में आत्मनिर्भर हैं लेकिन कम पड़ रहे हों तो बता दें, हम सप्लाई कर देंगे. लेकिन कश्मीर मसले को लेकर झूठ न बोलें, उस पर पहले ही काफी रायता फैला हुआ है.

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