व्यंग्य: वित्तमंत्री से रिजर्व बैंक गवर्नर तक, कैलासा में बड़े पदों पर बैठेंगे ये लोग

अगर ये ब्रांड न्यू कंट्री बनाने का आइडिया हमारे देश के कर्णधारों को मिल गया होता तो आज हमारे यहां जुर्म आधा होता और देश डबल.

जो काम बड़े-बड़े राजा महाराजा और कथित हिंदू हितैषी सरकारें नहीं कर पाईं वो एक बाबा ने कर दिया. खबर मिली है कि भगोड़े स्वामी नित्यानंद ने संपूर्ण हिंदू संप्रभु राष्ट्र ‘कैलासा’ की स्थापना कर दी. कैलासा/कैलाश की रियल लोकेशन अभी किसी को पता नहीं है लेकिन उसकी वेबसाइट पर दर्ज जानकारी के अनुसार ‘कैलाश सीमारहित राष्ट्र है, जिसका निर्माण दुनियाभर में बेदखल कर दिए गए उन हिन्दुओं ने किया है, जो अपनेअपने देश में प्रामाणिक रूप से हिन्दुत्व का पालन करने का अधिकार गंवा चुके हैं.

भई कमाल की परियोजना है. नित्यानंद ने जितने कठिन परिश्रम से दुनिया भर में हिंदुत्व का अधिकार खो चुके हिंदुओं का डेटा जुटाया होगा उतनी सीरियसली तो भारत में जनगणना नहीं हो पाती. नित्यानंद को ऐसे हिंदू ठीक-ठाक नंबर्स में मिले होंगे इसलिए उन्हें पूरा देश बनाने का आइडिया आया. आगे की जानकारी चौंकाने वाली है. कमजोर दिल वाले भी पढ़ सकते हैं, जानलेवा नहीं है.

कैलासा का अपना झंडा है जिसे ‘ऋषभ ध्वज’ कहा जाता है. शिक्षा, वाणिज्य, वित्त विभाग के अलावा ‘प्रबुद्ध नागरिकता विभाग’ नाम का लेटेस्ट डिपार्टमेंट भी यहां मौजूद है. इस देश का निजी पासपोर्ट है जो 14 लोकों और 11 दिशाओं में कहीं भी घुसने की छूट देता है. यहां हिंदू निवेश रिजर्व बैंक भी होगा. यहां की इकॉनमी ‘धार्मिक अर्थव्यवस्था’ के नाम से जानी जाएगी.

मैं बैठा ये सोच रहा हूं कि सरकार के पास, उसके हर मंत्रालय के पास सलाहकारों की फौज होती है. लाखों की सैलरी वे लोग उठाते हैं. टैक्सपेयर के पैसे पर मौज कर रहे हैं. लेकिन ऐसा रापचिक आइडिया किसी के दिमाग में नहीं आया. सोचो अगर हम पहले से एक देश क्रिएट कर लेते तो हमारी सारी समस्याएं आधी हो जातीं और देश डबल. अंग्रेजों ने अपने दुश्मनों को ठिकाने लगाने के लिए अंडमान में जेल बनाई थी. हम देश के दुश्मनों के लिए पूरा कंट्री बसा देते.

खैर अभी भी देर नहीं हुई है. कैलासा प्रोजेक्ट ऑन द वे है, उसका मालिक/राष्ट्रपति फरार है. अब कायदे से उस देश पर भारत का कब्जा है. अब कैलासा को अपने काम के लिए इस्तेमाल किया जा सकता है. मेरी सलाह है, सारे धरती के बोझ वहां पर रोजगार से लगा दिए जाएं. ये मजे में सजा जैसी परियोजना होगी. यहां एक नया जिला घोषित होता है तो नेताओं और ब्यूरोक्रेट्स की पीढ़ियां तर जाती हैं, वहां तो पूरा देश बन रहा है. इतने विभाग खुलते हैं कि सब जगह बिठा दें तो अपना एक भी रिश्तेदार बेरोजगार नहीं बचता.

अब जैसे कैलासा का हिंदू रिजर्व बैंक बन रहा है. वहां का गवर्नर नीरव मोदी को बना दिया जाए. उन्हें बैंकों को हैंडल करने का अच्छा अनुभव है. ये रिजर्व बैंक को इतना पैसा लाकर देगा कि देश में किसी को काम ही नहीं करना पड़ेगा. विजय माल्या को वित्तमंत्री बनाया जाए. उन्हें अर्थव्यवस्था और राजनीति की इतनी समझ है कि ब्रिटेन ने उन्हें पाल रखा है. देश होगा तो खेल भी होगा और क्रिकेट भी होगा. ‘कैलासा क्रिकेट बोर्ड’ का चेयरमैन तो ललित मोदी को ही बनाना चाहिए.

विदेश मंत्री मेहुल चौकसी को बनाया जाए. वो विदेश भागकर वहां की नागरिकता का जुगाड़ भी कर सकते हैं. तिहाड़ और डासना जेल में ऐसे कितने हीरे मिल जाएंगे जिन्हें कैलासा के मुकुट पर ठोका जा सकता है. बस एक बार इच्छाशक्ति जगाने की देर है. हमारे पास दो देश होंगे और भारत पूरी तरह अपराधमुक्त होगा. शर्त ये है कि कैलासा में भी पूरी तरह से लोकतंत्र हो और वहां भी ईवीएम से चुनाव हो, लेकिन सिर्फ एक ही पार्टी चुनाव लड़े जिसको वहां का राष्ट्रहित दिख रहा हो.

बाकी बहस अपनी जगह पर लेकिन उस देश का प्रधानमंत्री नित्यानंद को ही बनाना चाहिए. देखो हमें पता है कि वे भागे हुए हैं लेकिन एक देश को सही से चलाने के लिए सरकार को ये करना ही होगा. इतना विजनरी आदमी दुनिया में खोजे नहीं मिलेगा. नाली से गैस बनाना और बरसात में राडार को चकमा देना तो कोई भी कर ले, लेकिन ऐसा वोकल कार्ड बनाना जिससे गायें संस्कृत और तमिल बोल पाएं, खुद 200 साल जीने का दावा करने वाला इंसान कहीं और मिलेगा?

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