व्यंग्य: झाड़ू लगाएं बाद में, पहले पकड़ना तो सीख लें हेमा मालिनी!

इस वीडियो पर एक क्विज़ खेला जा सकता है. कचरा दिखाने वाले को लाखों का ईनाम दिया जा सकता है.

सुबह की शुरुआत हुई तो देखा कि एक्ट्रेस और बीजेपी सांसद हेमा मालिनी ट्विटर पर झाड़ू की वजह से ट्रेंड हो रही हैं. नहीं, वो आम आदमी पार्टी नहीं जॉइन कर रहीं. उन्होंने संसद परिषर में झाड़ू लगाने की इतनी बढ़िया एक्टिंग की है कि ऑस्कर अवॉर्ड देने वाले उन्हें हैलोजन लेकर खोज रहे हैं.

हेमा मालिनी ने इतनी सफाई से झाड़ू लगाई है कि कचरे को अहसास भी नहीं हुआ और वो साफ हो गया. कुछ लोग आरोप लगा रहे हैं कि जहां हेमा मालिनी झाड़ू लगा रही थीं वहां कचरा था ही नहीं. आरोप लगाने वालों को समझना चाहिए कि हर चीज़ खुली आंखों से नहीं दिखाई देती. अगर मन में मैल न हो तभी सड़क पर मैला दिखता है.

हेमा मालिनी के लिए राजनीति भले नई हो, एक्टिंग नई नहीं है. एक्टिंग में वो कितनी फाइन हैं ये अपने काम से अक्सर जाहिर करती रहती हैं. पिछले दिनों लोकसभा चुनाव प्रचार के दौरान उन्होंने खूब एक्टिंग की. कभी ट्रैक्टर पर जा बैठीं तो कभी गेहूं का खेत काटने साड़ी-जूलरी सब पहनकर चली गईं. एक बार तो उन्होंने एक महिला का लकड़ियों का गट्ठर उठाने की एक्टिंग कर दी थी.

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बीती बातों पर मिट्टी डालिए. अभी झाड़ू लगाने वाले वीडियो की बात करते हैं. उस वीडियो पर एक क्विज़ खेला जा सकता है. कचरा दिखाने वाले को लाखों का ईनाम दिया जा सकता है. हेमा को झाड़ू लगाने की अपनी स्टाइल पर कॉपीराइट ले लेना चाहिए. इस तरह से जो झाड़ू लगाने की एक्टिंग करते दोबारा दिखे उस पर केस कर देना चाहिए.

लोग तो हेमा मालिनी को meme मटीरियल कहने लगे हैं. ये कुछ और नहीं सिर्फ हेमा से जलन है. न तो ये लोग हेमा मालिनी की तरह एक्टिंग कर पाए, न नेता बन पाए और न झाड़ू लगा पाए. ये जलन रखने वाले लोग अब इस वीडियो पर भी meme बना देंगे.

लोग कह रहे हैं कि पहले ढंग से झाड़ू पकड़ना तो सीख लो, बाद में लगा लेना. हेमा मालिनी ने शोले में तांगा चलाया था, अंधा कानून में पिस्टल चलाई थी, दो और दो पांच में क्लास चलाई थी तो क्या ढंग से झाड़ू नहीं चला सकतीं? ऐसे सवाल करना बेमानी है.

ये झाड़ू लगाने वाला प्रोग्राम पिछले पांच साल से चल रहा है. जब से स्वच्छ भारत अभियान शुरू हुआ है, हर छठे-छमाहे कोई न कोई नेता झाड़ू लेकर कहीं असली-नकली कचरे पर झाड़ू चलाता रहता है. कभी कचरा बाहर से लाकर डाला जाता है, उस पर झाड़ू लगाते हैं. कभी जहां कचरा नहीं होता वहां झाड़ू चला देते हैं.

झाड़ू लगाने वालों की नीयत में खोट नहीं है, वो गलती तो कचरे की है जो सही समय पर सही जगह नहीं होता. मार्केट में झाड़ू लगाने के इतने तरीके फेमस हैं कि लोगों को कनफ्यूजन हो जाता है कि सही तरीका कौन सा है. कोई कचरे के हिसाब से झाड़ू लगाता है तो कोई वास्तु के हिसाब से. कोई उल्टे हाथ से झाड़ू लगाता है कोई सीधे हाथ से. कोई बैठकर झाड़ू लगाता है कोई खड़े होकर. कोई खड़ी झाड़ू से झाड़ू लगाता है कोई पड़ी झाड़ू से झाड़ू लगाता है. लेकिन हेमा मालिनी के झाड़ू लगाने का स्टाइल देखकर लग रहा है कि उन्हें झाड़ू लगाना नहीं आता.

नोट- ये लेखक के निजी विचार हैं और ये लेख व्यंग्य के उद्देश्य से लिखा गया है.