Judgemental hai kya: कंगना के अंगने में मीडिया का क्या काम है?

कंगना ने कहा कि मीडिया में कुछ लोग बहुत अच्छे हैं और उनको पूरा सपोर्ट करते हैं. वहीं बहुत से पत्रकार देश को तोड़ रहे हैं, वो देशद्रोही हैं.

वो तो अच्छा हुआ कंगना रनौत के पास खुद का ट्विटर हैंडल नहीं है नहीं तो दो-दो ट्विटर हैंडल पर सवार होकर कंगना के वीडियो आते तो देखने वालों की रूह फना हो जाती. रंगोली चंदेल कंगना रनौत की बहन होने के साथ ट्विटर मैनेजर भी हैं इसलिए उनकी तरफ से ट्विटर पर एक्टिव रहती हैं. इस बार उन्होंने बड़े कायदे से अपनी बात रखी है. जो उन्होंने कहा है उससे कोई इंकार नहीं कर सकता.

कंगना ने कहा कि मीडिया में कुछ लोग बहुत अच्छे हैं. अच्छे से काम करते हैं और उनको पूरा सपोर्ट करते हैं. बहुत से पत्रकार देश को तोड़ रहे हैं, वो देशद्रोही हैं. कंगना की इस बात से कोई इंकार नहीं कर सकता. क्योंकि हर प्रोफेशन में अच्छे और बुरे दोनों तरह के लोग होते हैं. लेकिन यहां कंगना बहुत अच्छे से खेल गई हैं. अब उनकी बात पर जो सवाल उठा देगा असली देशद्रोही गद्दार वही पत्रकार हो जाएगा. इसको सुनकर एक जोक याद आ गया कि एक वकील से किसी ने कहा पचास फीसदी वकील चोर डकैत होते हैं. वो वकील भड़क गया. कहा कि शब्द वापस लो. तो उस आदमी ने कहा कि पचास फीसदी वकील चोर डकैत नहीं होते हैं. यहां कंगना ने वकील को बदलकर पत्रकार कर दिया है.

कंगना की बात में पहली वाली बात का दूसरी बात से क्या कनेक्शन है ये समझना थोड़ा मुश्किल है. जो उन्हें सपोर्ट करता है वो तो अच्छा है. जो उन्हें सपोर्ट नहीं करता है वो देशद्रोही, लिबटार्ड और सिकुलर है. क्या मतलब, कंगना रनौत देश हैं कि देश कंगना रनौत है? ये तो कुछ कुछ एक पार्टी के नेताओं जैसा स्टेटमेंट है कि जो भी उस पार्टी को सपोर्ट नहीं कर रहा वो देशद्रोही है. गुच्छा होने की जरूरत नहीं है यहां मैंने थोड़ी सी कंगना बनने की कोशिश की है.

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कंगना को इंसाफ चाहिए

एक बात समझ में नहीं आती कि कंगना रनौत की फिल्म का देश और देशभक्ति से क्या कनेक्शन है. कंगना और उनकी बहन ने पिछले दो-चार दिन से देश, देश की सुरक्षा, देश की अखंडता, लिबटार्ड, सिकुलर की रट लगा रखी है लेकिन अपनी फिल्म का कहीं जिक्र नहीं कर रहीं. कहीं उनको पता तो नहीं चल गया है कि हम भारत के लोग कितने भोले हैं कि देशभक्ति वाला बटन दबाते है टुच्ची फिल्म भी देखने चले जाएंगे. हे भगवान ये आइडिया ठग्स ऑफ हिंदोस्तान के मेकर्स को क्यों नहीं आया था. उसमें तो थोड़ी बहुत देश की बात की भी गई थी लेकिन वो देशभक्ति की फिल्म के तौर पर उसे बेच नहीं पाए. पुअर आमिर एंड अमिताभ.

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चल क्या रहा है?

फिल्म का नाम ‘जजमेंटल है क्या,’ विमर्श हो रहा है देश पर, पत्रकारों पर, उनके कॉन्फ्रेंस में खाने पर. पत्रकार फालतू में टची हुए जा रहे हैं कि कंगना ने उनके बारे में ऐसा-वैसा क्यों कहा. अब ताजा समाचार ये है कि दोनों ने एकदूसरे को बायकॉट कर रखा है. लेकिन कोई भी एकदूसरे का नाम लेना बंद नहीं कर रहा. कंगना मीडिया को कोसे जा रही हैं, मीडिया कंगना की कवरेज किये जा रहा है. ये तो वैसा ही मामला हो गया कि तुम्हीं से मोहब्बत तुम्हीं से लड़ाई, अरे मार डाला दुहाई दुहाई.

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टोटल शांति

ये वाला सीन देखकर दो साल पुराना एक सीन याद आ गया. एक न्यूज़ चैनल ने भारत-पाकिस्तान मैच का बहिष्कार किया था. फिर सारा दिन उसने ऐसे कमेंट्री की थी- अब पाकिस्तान ने टॉस जीतकर पहले बल्लेबाजी करने का फैसला किया है लेकिन हमें क्या, हम तो मैच की रिपोर्टिंग कर ही नहीं रहे हैं. और ये धोनी ने छक्का मार दिया है लेकिन वेट. हम तो मैच की रिपोर्टिंग कर ही नहीं रहे हैं. ऐसे ही शाम तक रिपोर्टिंग के साथ उसका बहिष्कार चलता रहा.

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विरोधियों की आंख में आंख डाले कंगना

कमाल की बात ये है कि कंगना की फिल्म न तो देशभक्ति पर बेस्ड है, न तो 15 अगस्त को रिलीज हो रही है और न ही उसमें अक्षय कुमार हैं, फिर भी देशद्रोहियों पर निशाना साधकर उन्होंने अपने फैन्स जुटा लिये हैं. दैट्स अ वेरी गुड आइडिया. जब से रंगोली कंगना की मैनेजर बनी हैं तब से कंगना फिल्मों में कम, बयानों में ज्यादा नजर आ रही हैं. जितनी कंट्रोवर्सी होगी, कंगना उतनी कामयाब होंगी, जितनी ज्यादा उनकी ब्रांड वैल्यू बढ़ेगी उतनी ज्यादा उनकी फीस बढ़ेगी.

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विरोधियों को उनकी औकात बतातीं कंगना

बस प्रॉब्लम ये है कि मीडिया वाले किनारे हो जाएं तो भी आगे चलकर कंगना को खतरा हो सकता है. ऐसी बवाली पर्सनैलिटीज के साथ उनकी इंडस्ट्री बहुत दिन बनाकर नहीं चल पाती. खबर आ रही है कि जितनी उठापटक उन्होंने इस नई फिल्म के मेकर्स के साथ की है, वो दोबारा कंगना के साथ काम नहीं करने वाले. गुप्त वाले सूत्रों ने बताया है कि फिल्म की एडिटिंग के बीच में कंगना ने एकता कपूर को रुला रखा था. और अब एकता कपूर के बैनर ने उनके लेटेस्ट बवाल के चलते माफी भी मांगी है.

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जजमेंटल है क्या?

कंगना तो नहीं लौटीं, लेकिन हम एक बार फिर उनकी फिल्म पर लौटते हैं. फिल्म का नाम है जजमेंटल है क्या. कंगना ने किसी को जज करने में कोई कसर नहीं छोड़ी. अपने दर्शकों को मणिकर्णिका परोसकर जज किया, पत्रकारों को जज किया, सिकुलरों-लिबटार्डों को जज किया, बाकी जिसको पहले जज कर चुकी हैं उसकी बात तो जाने दो. तो लास्ट में कंगना से उनकी फिल्म के बारे में कुछ जानना चाहेंगे. जजमेंटल है क्या?

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