Opinion: JNU में कितना अंधेरा था जो दीपिका को देख नहीं पाए कन्हैया कुमार?

दीपिका पादुकोण के जाने के बाद जाने के बाद पत्रकारों ने कन्हैया से दीपिका के बारे में पूछा तो उन्होंने कहा-'अच्छा आईं थी? हम देख नहीं पाए. मेरी कोई बात नहीं हुई. मैं उनसे नहीं मिला.'

जवाहर लाल नेहरू विश्वविद्यालय (JNU) में बवाल के बाद फिल्म इंडस्ट्री से बहुत लोग घायल स्टूडेंट्स के सपोर्ट में आ गए. मुंबई में गेटवे ऑफ इंडिया पर बॉलीवुड की तमाम हस्तियों ने प्रदर्शन किया. दीपिका पादुकोण दिल्ली आई हुई थीं तो जेएनयू भी चली गईं. वहां से उनकी तस्वीरें बाहर आईं तो बवाल मच गया.

उनकी फिल्म छपाक इसी 10 जनवरी को रिलीज होने वाली है. उसको सीधा टारगेट किया जाने लगा. #BoycottChhapaak और #SupportChhapaak टॉप ट्रेंडिंग में आ गए. लोग वो फोटो शेयर करके दीपिका को निशाने पर लेने लगे जिसमें कन्हैया कुमार नारे लगा रहे हैं और पीछे हाथ बांधे दीपिका खड़ी हैं. सब धमाचौकड़ी निपट जाने के बाद पत्रकारों ने कन्हैया से दीपिका के बारे में पूछा तो उन्होंने कहा-

‘अच्छा आईं थी? हम देख नहीं पाए. मेरी कोई बात नहीं हुई. मैं उनसे नहीं मिला.’

वाह. कन्हैया की नजरों पर ताली बजाएं कि बलाएं लें समझ नहीं आ रहा है. जिसके साथ खड़े होने की वजह से दीपिका ट्रोल हो रही हैं, उनकी फिल्म का बायकॉट हो रहा है, उसे पता ही नहीं कि उनके बगल में वह खड़ी भी थी.

कन्हैया(असली वाले) का एक प्रसंग इस समय याद आता है. उनसे महाभारत के युद्ध से पहले सहायता मांगने अर्जुन और दुर्योधन दोनों जाते हैं. अर्जुन पैरों की तरफ और दुर्योधन सिर की तरफ खड़े होते हैं. कन्हैया पहले अर्जुन से मुखातिब होते हैं क्योंकि स्वाभाविक रूप से उनकी नजर उन्ही पर पहले पड़ती है. एक ये कन्हैया हैं जिन्हें सामने खड़ी दीपिका नहीं दिखाई दीं.

अब सवाल ये है कि दीपिका पादुकोण ऐसी कौन से टेकनीक अपनाती जो कन्हैया कुमार की नजरों में आ जातीं? कन्हैया को क्या कोई असुरक्षा की भावना परेशान कर रही है कि मेरे सामने कोई और न खड़ा हो जाए. ऐसा क्या परेशान होना? दीपिका ने पॉलिटिक्स में आकर कन्हैया को चुनौती देनी की बात तो कभी की नहीं. आखिर किस बात का खतरा है?

वैसे तो दीपिका स्टूडेंट्स के लिए आई थीं, या अपनी फिल्म के प्रमोशन के लिए आई थीं या चोट खाई आईशी घोष से मिलने आई थीं, अगर वो कन्हैया कुमार का समर्थन करने आई होतीं तो उन्हें कितना शर्मिंदा होना पड़ता. उनके जाते ही कन्हैया कह देते अच्छा आईं थी? हम देख नहीं पाए. मेरी कोई बात नहीं हुई. मैं उनसे नहीं मिला.

फोर्ब्स ने इस बार कन्हैया कुमार को प्रभावशाली लोगों की लिस्ट में शामिल किया है. कन्हैया कुमार अपने ऐसे ही बयानों से लोगों को आगे भी प्रभावित करते रहेंगे, इसकी उम्मीद की जाती है.

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