व्यंग्य: रोड पर फ्री में फेंके जाने वाले प्याज के भाव बढ़ने का जिम्मेदार कौन?

प्याज के बिना न सब्जी छौंकी जाती है, न दाल में तड़का लगता है, न सलाद मजा देती है, न चखने में स्वाद आता है, न अंडे में आनंद आता है, न चाऊमीन रुचिकर लगती है.
onion price is crossing 100 rs mark, व्यंग्य: रोड पर फ्री में फेंके जाने वाले प्याज के भाव बढ़ने का जिम्मेदार कौन?

कहते हैं लॉन्ग डिस्टेंस का प्यार और महंगाई में खरीदा प्यार लोगों को रुलाते बहुत हैं. जो कहते हैं सही कहते हैं. प्यार का तो देख ही लिया होगा, प्याज का हश्र भी देखिए. कभी मार्केट में सड़ रहा प्याज, कभी ट्रॉलियों में लाकर सड़क पर फेंका जा रहा प्याज आज ऐसे भाव बढ़ाए बैठा है जैसे इसे भी शपथ ग्रहण में बुलावा आ रहा है.

भारत में हम लोगों को शिकायत करने की आदत है. प्याज 50 पैसे किलो हो जाए तो सरकार को कोसो, 100 रुपए किलो हो जाए तो सरकार को कोसो. हमें पाकिस्तान से इस मामले में सीखना चाहिए. वहां की क्लाइमेट चेंज विभाग की राज्यमंत्री ज़रताज गुल ने अपनी जनता से आह्वान किया है कि आपके पास बहुत सी जमीन खाली पड़ी है, उसमें सब्जी उगाएं. अगर ये अक्ल हमें आ जाती तो आज प्याज रेट के आंसू न रुला रहा होता.

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प्रॉब्लम ये है कि प्याज आलू का भी पितामह हो रहा है. कहा जाता है कि हर सब्जी को आलू का साथ जरूरी है लेकिन ऐसा है नहीं. बहुत सी सब्जियां बिना आलू के भी बन सकती हैं. भिंडी, लौकी, करेला. इन्हें आलू की शक्ल न दिखाओ तभी सब्जी अच्छी बनती है. उसी जगह प्याज है. उसके बिना न सब्जी छौंकी जाती है, न दाल में तड़का लगता है, न सलाद मजा देती है, न चखने में स्वाद आता है, न अंडे में आनंद आता है, न चाऊमीन रुचिकर लगती है.

जिस सब्जी की इतनी डिमांड हो उसका भाव क्यों न बढ़े. दूसरी वजह है प्याज का राजनीति से प्यार. इसे आग लगवाने में बहुत मजा आता है. दिल्ली में प्याज महंगी हुई तो राज्य सरकार ने केंद्र से लेकर सस्ती प्याज की सप्लाई शुरू कर दी. ऊपर से प्याज बंद करके बीजेपी ने कहा कि केजरीवाल दिल्ली में प्याज महंगी बिकवा रहे हैं. केजरीवाल ने कहा हम क्या करें, केंद्र ने हमारी प्याज रोक दी है. बताइए. जो प्याज प्यार बढ़ाने के काम आनी चाहिए वो रार बढ़ाने के काम आ रही है.

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आम आदमी को अगर यकीन हो कि प्याज का पैसा किसान की जेब में जा रहा हैतो वो अन्नदाता के लिए महंगा प्याज खरीद ले. लेकिन उसे पता है कि 100 रुपए की प्याज में एक रुपया उसके पास पहुंचेगा. वो फिर सड़क पर प्याज फेंकेगे. फिर खुद को लटकाएगा. ये दर्द जितना उगाने वाले को होता है उतना ही खरीदने वाले को. बीच वाले तर माल कूट रहे हैं.

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असम में प्याज की माला

जनता और चिंता एक ही सिक्के के दो पहलू हैं. जहां जनता है वहां चिंता जरूर होगी. इस चिंता से निजात पाने के लिए जनता के पास एक ही रास्ता है. प्याज के मोहपाश से निकलकर किसी और को अपना दिल दें. कुछ नया ट्राई करें. प्याज की बुराइयां बताने बैठ जाएंगे तो आपने जो जिंदगी भर खा रखा है उस पर भी अफसोस हो जाएगा और जब महा सस्ती होगी तब भी नहीं खाएंगे. इसलिए वो मिर्च मसाला लगी गॉसिप भूलकर कुछ दिन के लिए जैन संप्रदाय के नियमों पर चलने का कष्ट करें. कल जब प्याज रोड पर बिखरेगी तो फिर सब्जी में प्याज, दाल में प्याज, चाय में प्याज, शरबत में प्याज, प्याज ही प्याज.

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