राजद उपाध्यक्ष शिवानंद तिवारी ने सिर्फ तेजस्वी को ललकारा था, मांद से बाहर आ गए ‘दो शेर!’

6 जुलाई को पटना के एक होटल में राजद की राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक हुई. बैठक में तेजस्वी यादव भी आए जिन्हें देखने की आस बिहार के लोग छोड़ चुके थे.

6 जुलाई को पटना के एक होटल में राजद की राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक हुई. बैठक में तेजस्वी यादव भी आए जिन्हें देखने की आस बिहार के लोग छोड़ चुके थे. कहा तो ये भी जा रहा था कि अब वो भी राहुल गांधी की तरह इस्तीफा दे देंगे लेकिन वैसा कुछ नहीं हुआ.

राहुल गांधी ने ऐसी परंपरा की नींव रखी है कि हारने वाले सब इस्तीफा देने वाले हो जाएं. अगर ऐसा हो गया तो उधर तेजस्वी इस्तीफा दे देंगे, इधर यूपी में अखिलेश यादव इस्तीफा दे देंगे. फिर कांग्रेस, आरजेडी, सपा, सारी पार्टियों का अध्यक्ष अमित शाह को बनना पड़ेगा. वो अकेले क्या क्या संभालेंगे?

तेजस्वी यादव अचानक बाहर आ गए इस पर भी लोगों ने मजे ले लिए. कहा गया कि वो शिवानंद तिवारी के ललकारने पर पब्लिक में आए हैं. दरअसल उन्हीं की पार्टी के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष शिवानंद तिवारी ने शुक्रवार को पार्टी की स्थापना दिवस के मौके पर तेजस्वी यादव को खूब खरी खरी सुनाई. कहा कि तेजस्वी खुद को शेर का बेटा कहते हैं, अगर शेर हैं तो मांद में क्यों बैठे हैं. उसी ललकार के बाद शेर बाहर आ गया.

शिवानंद तिवारी से एक गलती हो गई. उन्होंने शेर के एक बच्चे को ललकारा और दोनों बाहर आ गए. ‘कूल लुक’ के स्वामी लालू के बड़े बेटे तेज प्रताप यादव क्रोधित हो गए. वे आजकल कृष्ण लुक में घूम रहे हैं, उन्हें पार्टी का हर विलेन शिशुपाल नजर आ रहा है. बात -बात पर सुदर्शन निकाल लेते हैं.

क्रोधित तेज प्रताप ने कहा कि ‘सोशल मीडिया में भी कृष्ण-अर्जुन जोड़ी को लेकर तरह-तरह की बातें कर रहे हैं कि अब दाल नहीं गल रही है. अलग हो गए…धर के चीर देंगे. जो तेज और तेजस्वी और जो कृष्णा और अर्जुन के बीच आएगा उसके ऊपर सुदर्शन चक्र चलेगा श्री कृष्णा का.’

सयाने लोग सही बात कह गए हैं कि जीते के साथी सब हैं, हारे का सहारा हरि हैं. यहां हरे बैकग्राउंड वाली पार्टी के हरि तेज प्रताप यादव चुनाव से पहले तक तो पार्टी की जड़ों में मट्ठा डालते रहे. परिवार के खिलाफ निशानची बने रहे. जब हार हो गई तो हरि बन गए हैं. अब पार्टी में ही सिर फुटौव्वल जारी है. अध्यक्ष हॉस्पिटल में है और उपाध्यक्ष अध्यक्ष के बच्चों को ललकार रहा है. पार्टी अध्यक्ष लालू प्रसाद को इन सब बातों से कोई मतलब नहीं. उन्हें तो हॉस्पिटल में अपना फेवरेट आम खाने को भी नहीं मिल रहा है.

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