मुस्लिम डिलिवरी मैन देख जोमैटो ऑर्डर कैंसिल करने वाला अब बंद करेगा इन चीजों का इस्तेमाल!

जोमैटो ने इस कस्टमर का ऑर्डर ये कहते हुए कैंसिल कर दिया कि खाने का कोई धर्म नहीं होता.

डिजिटल इंडिया है तो सोशल मीडिया है. सोशल मीडिया है तो हर हाथ ट्विटर, हर हाथ फेसबुक है. ट्विटर का इस्तेमाल कौन कैसे करता है ये हर किसी की सुविधा और जरूरत पर निर्भर है. जैसे अमित शुक्ला ने ट्रोल होने के लिए इस्तेमाल किया.

दरअसल कहानी अमित शुक्ला के एक ट्वीट से शुरू हुई. अमित ने ट्वीट किया कि उन्होंने जोमैटो का ऑर्डर कैंसेल कर दिया क्योंकि मुस्लिम डिलिवरी मैन को भेजा जा रहा था. अमित ने मैसेंजर में जोमैटो को बताया कि सावन का पवित्र महीना चल रहा है, मुसलमान से डिलिवरी नहीं लेनी है. जोमैटो ने खुद ऑर्डर कैंसेल कर दिया. रिफंड भी नहीं किया और ऑर्डर हिस्ट्री भी डिलीट कर दी.

जोमैटो ने इसे रिट्वीट करते हुए लिखा कि ‘खाने का कोई धर्म नहीं होता. खाना खुद एक धर्म है.’

इसके बाद अमित शुक्ला की ट्रोलिंग हुई और जोमैटो की तारीफ हुई. दूसरे खेमे वालों ने अमित को बहादुर बताया और जोमैटो को अनइंस्टॉल करने के स्क्रीनशॉट डाले. ये कोई नई बात नहीं है, हर सुबह ट्विटर खोलने के साथ ऐसे एक दो थ्रेड दिख जाते हैं जो एक्सट्रीम निगेटिविटी से भरे होते हैं. हो सकता है कुछ दिन बाद बात आई गई हो जाए, लोग नए हैशटैग के पीछे पड़ जाएं लेकिन अमित शुक्ला का ये मामला प्रैक्टिकल नहीं है.

ये प्रैक्टिकल इसलिए नहीं है क्योंकि स्मार्टफोन हाथ में पकड़े आदमी पचासों ऐप इंस्टॉल करके बैठा है. ओला से लेकर जोमैटो, लूडो से लेकर PUBG तक सब कुछ. किस ऐप में किस मुसलमान का पैसा लगा है या किसका CEO मुस्लिम है अगर ये जान ले तो शायद बंदा पूरा स्मार्टफोन खाली करके दोबारा कीपैड वाले मोबाइल की तरफ लौट जाए.

जाति और धर्म की खोज तो बहुत बाद में हुई, सबसे पहले पहिए की खोज हुई थी. अगर ये पता चल जाता कि पहिए की खोज करने वाला आदिमानव हिंदू था या मुसलमान तो उस पर कॉपीराइट लेना या बायकॉट करना आसान हो जाता. इसी तरह आग को लेकर संशय बना हुआ है. ये नहीं पता कि आग की खोज हिंदू ने की थी या मुसलमान ने, नहीं तो इसका काम भी खत्म कर दिया जाता.

अमित शुक्ला को प्राचीन तौर तरीकों पर लौट जाना चाहिए. कटोरा लेकर भिक्षाटन करके पेट भरना चाहिए. ये जोमैटो वगैरह पश्चिमी सभ्यता के परिचायक हैं. गाड़ियों में जो पेट्रोल-डीजल आता है वो निकालकर पानी से गाड़ी चलानी चाहिए क्योंकि तेल तो गल्फ कंट्रीज से आता है. मुसलमानों के इलाके से.

उम्मीद है कि ट्रेन पर सफर करने के दौरान भी अमित शुक्ला लोको पायलट का नाम पता कर लेते होंगे. अगर वो मुसलमान होता होगा तो वहीं ट्रेन से उतरकर वे पैदल अपनी मंजिल की तरफ चल देते होंगे. अगर बहिष्कार ही करना है तो पूरी तरह से करें, अपनी सुविधा के हिसाब से नहीं.

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