, अब राहुल की टास्क फोर्स में ‘सर्जिकल स्ट्राइक’ का हीरो, लेकिन कांग्रेस नहीं की ज्वाइन !
, अब राहुल की टास्क फोर्स में ‘सर्जिकल स्ट्राइक’ का हीरो, लेकिन कांग्रेस नहीं की ज्वाइन !

अब राहुल की टास्क फोर्स में ‘सर्जिकल स्ट्राइक’ का हीरो, लेकिन कांग्रेस नहीं की ज्वाइन !

, अब राहुल की टास्क फोर्स में ‘सर्जिकल स्ट्राइक’ का हीरो, लेकिन कांग्रेस नहीं की ज्वाइन !
पुलवामा का बदला बाकी ही है, इसी बीच कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने सर्जिकल स्ट्राइक की सियासी धार भी कुंद करने की तैयारी कर ली है. राहुल गांधी ने पार्टी की सुरक्षा पर बनाई गई टास्क फोर्स का जिम्मा लेफ्टिनेंट जनरल डीएस हुड्डा को सौंप कर एक तीर से कई निशाने लगाए हैं.  हुड्डा सर्जिकल स्ट्राइक अभियान की अगुवाई करने वाले सैन्य अधिकारी हैं. उन्होंने कांग्रेस तो ज्वाइन नहीं की अलबत्ता राहुल की टास्क फोर्स में शामिल होकर बीजेपी के लिए मुसीबत खड़ी कर दी है.
सर्जिकल स्ट्राइक पर हुड्डा की बातों पर देश करेगा भरोसा
पिछले कुछ दिनों में लेफ्टिनेंट जनरल डीएस हुड्डा ने सर्जिकल स्ट्राइक को लेकर कई सारी बातें कहीं. उनकी बातें मीडिया में आईं भी, पर उन पर ज्यादा चर्चा नहीं हुई. लेकिन अब राहुल की बनाई किसी टीम में होने और चुनावी मौसम की वजह से हुड्डा की बातें संभवत: न सिर्फ ज्यादा गंभीरता के साथ सुनी जाएंगी, बल्कि मीडिया में उन पर पहले से ज्यादा चर्चा होने की गुंजाईश भी रहेगी.
लेफ्टिनेंट जनरल हुड्डा की जो बातें बीजेपी को खासतौर से परेशान कर सकती हैं, उनका जिक्र यहां करना प्रासंगिक होगा. सर्जिकल स्ट्राइक के 2 साल पूरे होने पर हुड्डा ने कहा था कि- “इस हमले का कुछ ज्यादा ही प्रचार कर दिया गया, जिसकी जरूरत नहीं थी. सेना का ऑपरेशन जरूरी था. लेकिन इसका कितना राजनीतिकरण होना चाहिए था यह कितना सही है या गलत यह बात राजनेताओं से पूछी जानी चाहिए.” जबकि पुलवामा हमले के बाद उन्होंने कहा था कि- “पाकिस्तान के खिलाफ किसी भी तरह की कार्रवाई संभावित है. लेकिन सरकार और सुरक्षा बलों को सावधानी बरतनी चाहिए. इस विवाद को सुलझाने के लिए सभी पक्षों को एक बार फिर सोचना चाहिए और मिल-बैठकर आपस में बातचीत करनी चाहिए.”
बीजेपी के लिए ले.जनरल हुड्डा की बातें चुनौती बनेंगी
अब यही सारी बातें हुड्डा कांग्रेस के किसी मंच से करेंगे या उनके हवाले से कांग्रेस करेगी तो बीजेपी के सामने उसका जवाब देने की मजबूरी होगी. तब बीजेपी के लिए उस सैनिक की बातों के खिलाफ जाना आसान नहीं होगा, जिसने सीधे-सीधे उसी सर्जिकल स्ट्राइक में शिरकत की थी, जिसपर बीजेपी को नाज है.
बातचीत की बात करना ‘राष्ट्र द्रोह’ नहीं कहलाएगा
लेफ्टिनेंट जनरल हुड्डा ने जिन बातों का जिक्र किया है, उनमें आपसी बातचीत भी शामिल है. जबकि मौजूदा माहौल में पाकिस्तान के साथ किसी भी किस्म की बातचीत की बात करने वाले को भी गुनहगार कह दिया जा रहा है. लेकिन हुड्डा की ऐसी बातों पर उन्हें न राजनीतिक पार्टियां गुनहगार कह पाएंगी और शायद न ही सोशल मीडिया पर आक्रामक राष्ट्रभक्ति पेश कर रही जमात ही ऐसा कर पाएगी. ऐसे में पुलवामा हमले के बाद का माहौल आने वाले समय में थोड़ा अलग दिख सकता है.
वैसे भी दो-तीन दिन पहले तक विश्व कप में पाकिस्तान के साथ न खेलने की वकालत कर रहे कुछ पूर्व क्रिकेटरों के सुर भी बदलते दिखे. हरभजन सिंह की नई थ्योरी ये आई है कि क्रिकेट हमारी रोजी-रोटी है लिहाजा दोनों देशों के बीच कोई रास्ता भी निकलना चाहिए.
सुरक्षा पर कांग्रेस गंभीर दिखेगी
इस वक्त सबसे ज्यादा सवाल और चिंता देश की सुरक्षा पर है. बीजेपी पर सुरक्षा को नजरअंदाज करने के गंभीर आरोप लग रहे हैं, जबकि इसी मसले पर वाकायदा टास्क फोर्स बना कर राहुल गांधी देश को ये संदेश दे पाएंगे कि उनकी पार्टी देश की चिंता कर रही है. उनके हाथों में देश सुरक्षित होगा.
दरअसल, कांग्रेस की ओर से गठित ये टास्क फोर्स देश की सुरक्षा को लेकर एक विजन पेपर तैयार करेगी और इसी को लेफ्टिनेंट जनरल हुड्डा लीड करेंगे. उनके साथ कुछ और विशेषज्ञों को भी इस काम में लगाया गया है. लेफ्टिनेंट जनरल हुड्डा अपने कार्यकाल के दौरान नॉर्दन कमांड की जिम्मेदारी संभाल रहे थे और सितंबर 2016 में भारत की ओर से किए गए सर्जिकल स्ट्राइक में उनकी अहम भूमिका थी.
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