व्यंग्य: राजनीति छोड़ धर्म की राह चले तेजप्रताप यादव, देखिए सबूत

तेज प्रताप यादव एक बार फिर वायरल वीडियो में दिखे हैं. इस बार वो भोलेनाथ के लुक में भोले के दरबार के लिए निकल चुके हैं.

पुराने जमाने में मां बाप कहते थे कि पढ़ लिख लो, दिन भर घूमोगे तो बरबाद हो जाओगे. जिन बच्चों का पढ़ने में मन नहीं लगता था, वो मां बाप की बात नहीं सुनते थे. दिन भर घूमते थे. अपना नेटवर्क बनाते थे. दुर्गापूजा का चंदा इकट्ठा करते हुए सामाजिक कार्यकर्ता बन जाते और कब फुल स्पेसिफिकेशन वाले नेता बन जाते थे, पता ही न चलता था. इसके अलावा कुछ और भी तरीके होंगे नेता बनने के, लेकिन ये आदर्श तरीका था.

कुछ लोग एक्सीडेंटल नेता होते हैं. जैसे किसी एक्सीडेंट से लोगों की जिंदगी बदल जाती है, इनका नेता के घर पैदा होना वही एक्सीडेंट होता है. भारत के इतिहास में ऐसे अनेक नेता हुए हैं. राजीव गांधी के बारे में भी यही कहा जाता है कि उनकी राजनीति में आने की जरा सी भी इच्छा नहीं थी, परिवार के दबाव में आ गए. राहुल गांधी के बारे में कहा जाता है कि ये राजनीति के लायक नहीं हैं, लेकिन परिवार की वजह से आ गए.

ऐसा ही एक हीरा बिहार की राजनीति में वेस्ट हो रहा है. नाम है तेज. तेज प्रताप यादव. लालू के लाल तेज प्रताप यादव. ये समझ में नहीं, सीधे वायरल वीडियो में आते हैं. अभी इनका एकदम नया ताजा वीडियो वायरल हो रहा है. वीडियो में दिख रहा है कि भोले शंकर के लुक में कांवड़ियों वाला वेश धारण करके तेज प्रताप देवघर से बाबा धाम की यात्रा के लिए निकल चुके हैं. रास्ते में कहीं नंदी की सेवा करते भी दिखे हैं.

Tej Pratap Yadav, व्यंग्य: राजनीति छोड़ धर्म की राह चले तेजप्रताप यादव, देखिए सबूत

पिछले साल भी इसी तरह तेज प्रताप यादव का वीडियो आया था जिसमें वो भोले के अवतार में डमरू बजाते दिखे थे.

इसके पहले तेज प्रताप कभी भोले के लुक में दिखे तो कभी कान्हा के गेटप में बांसुरी बजाते दिखे. कुल मिलाकर बात ये है कि तेजप्रताप बहुत धार्मिक आदमी हैं. जिस तरह से उन्होंने अपनी पार्टी से ही लड़ाई ठान ली, फिर तेजस्वी की तारीफ करने लगे, फिर घर गृहस्थी से दूर हो गए, ये सब बातें साबित करती हैं कि तेजप्रताप न तो राजनैतिक आदमी हैं न पारिवारिक आदमी. वो पूरी तरह से धार्मिक आदमी हैं.

तेजप्रताप की धर्म कर्म की इच्छा का सम्मान करते हुए बिहार की जनता ने उन्हें इस बार इलेक्शन में आजाद कर दिया. उन्हें आजाद करने के चक्कर में तेजस्वी यादव का भी करियर खतरे में आ गया. अगर तेजप्रताप यादव भोले होने के साथ समझदार भी हैं तो वो अब धर्म का काम ही करेंगे, पार्टी का नहीं.

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