दुश्मन देशों की साज़िश से वाक़िफ़ है भारत, क्या है ‘2 फ्रंट वॉर’ जिसकी तैयारी में जुटे चीन-पाकिस्तान?

जब पाकिस्तान के विदेश मंत्री शाह महमूद कुरैशी पिछली बार चीन गए थे तब चीनी नेताओं और जनरलों के साथ बातचीत में प्रमुख मुद्दा दोनों देशों की सेनाओं में बेहतर तालमेल बिठाना था. ताकि युद्ध की स्थिति में पाकिस्तानी फ़ौज और PLA में आपसी सूझबूझ के साथ कामकाज हो.

खबर आई है कि चीन, पाकिस्तान को उसके कब्ज़े वाले कश्मीर (PoK) में एक मिसाइल सिस्टम स्थापित करने में मदद कर रहा है. खबर भारत की खुफ़िया एजेंसी RAW यानी रिसर्च एंड एनालिसिस विंग के सूत्रों से आई है.

PoK में लसादन्ना ढोक में इस सरफेस टू एयर मिसाइल की तैनाती के लिए सिविल वर्क्स का काम शुरू भी हो चुका है और ध्यान देने वाली बात है कि इस निर्माण कार्य में पाकिस्तानी आर्मी के लोगों के साथ PLA के कर्मचारी भी जुटे हुए हैं.

पाकिस्तानी आर्मी (Pakistan Army) के लगभग 130 फौजी और लगभग 40 सिविलियन कर्मचारी निर्माण स्थल पर काम में जुटे हुए हैं. इस मिसाइल सिस्टम का कंट्रोल रूम बाघ ज़िले में मौजूद आर्मी ब्रिगेड हेडक्वार्टर में होगा.

PLA के 7 कर्मचारी और 3 अफ़सर इस कंट्रोल रूम में तैनात किये जा रहे हैं. यह अपनी तरह का अकेला वाकया नहीं है. RAW के सूत्रों का कहना है कि ऐसे ही मिसाइल सिस्टम्स की तैनाती के लिए PoK में ही हट्टियां वाला ज़िले के चकोटी में और झेलम ज़िले के चिनारी में भी निर्माण कार्य चल रहा है.

बेहतर तालमेल के लिए कदम उठा रहे चीन-पाकिस्तान 

अपने आप में किसी आर्मी के इस तरह के निर्माण कार्य को सामान्य माना जाएगा. लेकिन PoK में स्थिति अलग है. यहां चीन और पाकिस्तान (China-Pakistan) अपनी सेनाओं में बेहतर तालमेल के लिए ये कदम उठा रहे हैं. इसमें कोई माथापच्ची करने की ज़रुरत नहीं कि इस मशक़्क़त का निशाना भारत है.

2 फ्रंट वॉर की तैयारी में जुटे चीन-पाकिस्तान

हम पहले भी आगाह कर चुके हैं कि जब पाकिस्तान के विदेश मंत्री शाह महमूद कुरैशी पिछली बार चीन गए थे तब चीनी नेताओं और जनरलों के साथ बातचीत में प्रमुख मुद्दा दोनों देशों की सेनाओं में बेहतर तालमेल बिठाना था. ताकि युद्ध की स्थिति में पाकिस्तानी फ़ौज और PLA में आपसी समझ बूझ के साथ कामकाज हो. साफ़ है भारत के ये दोनों पड़ोसी देश भारत के खिलाफ 2 फ्रंट वॉर (Two-front war) की तैयारी में जुटे हैं.

File Pic: China-Pakistan

यह 2 फ्रंट वॉर क्या है?

भारत की पश्चिमी और पश्चिमोत्तरी सीमा पर पाकिस्तान स्थित है और हमारी उत्तरी सीमाओं से लेकर पूर्वी सीमाओं तक चीन की सीमा लगती है. 2 फ्रंट वॉर की स्थिति में ये दोनों देश भारत पर साथ मिलकर समन्वित हमला कर सकते हैं ताकि भारत को पश्चिमी और उत्तरी दोनों तरफ से दबोचा जा सके. लेकिन ऐसा नहीं है कि भारत दुश्मन देशों की ऐसी साज़िश से नावाक़िफ़ है.

भारतीय CDS यानी चीफ ऑफ़ डिफेंस स्टाफ जनरल बिपिन रावत साल 2018 से ही साफ करते रहे हैं कि भारत हमेशा शांति चाहता है लेकिन अगर ज़रुरत पड़ी तो वह 2 फ्रंट वॉर के लिए भी तैयार है. जनरल रावत का कहना था कि भारत की सुरक्षा क्षमता में अब बहुत मज़बूती है और हमारी आर्मी, एयरफोर्स और नेवी तीनों साथ मिलकर ऐसी किसी भी स्थिति से लोहा लेने के लिए तैयार हैं.

फाइल फोटो- चीफ ऑफ़ डिफेंस स्टाफ (CDS) जनरल बिपिन रावत

अभी 4 दिन पहले वायुसेनाध्यक्ष आर के एस भदौरिया ने भी ज़ोर दे कर कहा कि राफेल युद्धक के सम्मिलित हो जाने के बाद भारतीय वायुसेना को अपने प्रतिद्वंदियों पर बढ़त हासिल हो चुकी है और हम दुश्मन के सीमा में दूर तक, गहरे जाकर निशाना लगा सकते हैं. वायुसेनाध्यक्ष के अनुसार हम किसी भी युद्ध के लिए तैयार हैं, भले ही वह 2 फ्रंट्स पर क्यों न लड़ा जाये!

फाइल फोटो- वायुसेनाध्यक्ष आर के एस भदौरिया

पाकिस्तान अब पूरी तरह चीन पर आश्रित

हम भारतीयों को अब यह समझ लेना चाहिए कि पाकिस्तान अब पूरी तरह से चीन का अलमबरदार हो चुका है और चीन जो चाहता है वह पाकिस्तान को करना पड़ता है, चाहे वह किसी भी क्षेत्र में हो. सुरक्षा साज़ोसामान और सामरिक मामलों में तो पाकिस्तान अब पूरी तरह चीन पर आश्रित है. क़र्ज़ के लिए भी वह चीन के सामने ही हाथ फैलाता है क्योंकि अमेरिका और पश्चिमी एशिया के मुल्क, खासतौर पर सऊदी अरब ने अब उसे और पैसे देने से इंकार कर दिया है.

चीन के महत्वाकांक्षी साम्राज्यवादी बेल्ट एंड रोड प्रोग्राम का सबसे बड़ा हिस्सा यानी चीन-पाकिस्तान इकोनॉमिक कॉरिडोर (CPEC) जो PoK और पाकिस्तान में स्थित है. चीन इससे अपने बहुत सारे आर्थिक, राजनीतिक, अंतर्राष्ट्रीय और सामरिक लक्ष्य हासिल करना चाहता है, जिनमें बलूचिस्तान के रास्ते अरब सागर पर स्थित ग्वादर बंदरगाह पहुंच कर हिन्द महासागर क्षेत्र में दखल देने की अपनी ताक़त और व्यापार बढ़ाना प्रमुख हैं.

इन इलाकों के सारे फैसले लेता है चीन

PoK और गिलगित-बाल्टिस्तान (Gilgit-Baltistan) भारत के हिस्से हैं, भले ही अभी वो पाकिस्तान के कब्ज़े में हों. लेकिन CPEC के चलते चीन सामरिक प्रतिष्ठानों और इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स में अब यहां इतना निवेश कर चुका है कि इस इलाके से बाहर निकल पाना उसके विकल्पों में शामिल नहीं है.

इसलिए इन इलाकों से संबंधित सारे फैसले अब चीन लेता है और पाकिस्तान उन पर सिर्फ अपनी स्वीकृति की मुहर लगाता है. इनमें गिलगित-बाल्टिस्तान को पाकिस्तान का 5वां प्रांत बनाना शामिल है.

अधिकतर पड़ोसियों से हमारे संबंध अच्छे हैं

स्कार्दू एयरबेस पर अब चीन की वायुसेना के जंगी जहाज़ भी तैनात हैं. भारत ने CPEC के प्रोजेक्ट्स को लेकर चीन और पाकिस्तान से कड़ा विरोध व्यक्त किया है.

चीन, भारत को घेरना भी चाहता है इसलिए वह पाकिस्तान के अलावा नेपाल, बांग्लादेश, म्यानमार, श्रीलंका और मालदीव में भी इस दिशा में कोशिश करता रहता है, हालांकि इनमें से अधिकतर पड़ोसियों से हमारे संबंध मधुर हैं. तो लौटकर बात चीन-पाकिस्तान की धुरी पर आ जाती है.

दोनों के बीच सभी क्षेत्रों में अंतरंग सहयोग का मतलब यही है कि अब भारत को अपने राष्ट्रीय हितों की रक्षा के लिए हमेशा चौकस और तैयार रहने की ज़रूरत है और इसमें 2 फ्रंट वार के लिए तैयार रहना भी शामिल है.

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