जनसंख्या नियंत्रण कानून की राह में असली रोड़ा कौन?

केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह ने कहा कि हिंदुस्तान सांस्कृतिक विभाजन की तरफ बढ़ रहा है. आजम खान ने कहा कि तीन से ज्यादा बच्चे पैदा करने वालों को फांसी दे दो.

11 तारीख को वर्ल्ड पॉपुलेशन डे था. हिंदी में विश्व जनसंख्या दिवस. इस दिन का महत्व हर देश के लिए अलग अलग है. जैसे जनसंख्या का मतलब हर देश के लिए अलग है. दो दिन पहले 9 जुलाई को रूस के राष्ट्रपति व्लादिमिर लिलिया नाम की महिला से मिले. इस महिला को ऑर्डर ऑफ पैरेंटल ग्लोरी के अवॉर्ड से नवाज़ा गया है. इसके हाथ में नौवां बच्चा था. रूस की सरकार घटती जनसंख्या से परेशान थी तो लोगों को ज्यादा बच्चे पैदा करने को उत्साहित करने के लिए 2008 में ये अवॉर्ड शुरू किया था.

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हमारे देश की समस्या इससे उलट है. यहां जनसंख्या जितनी तेजी से बढ़ रही है उतनी तेजी से धान की फसल नहीं बढ़ती. वैसे तो हम लोग बहुत आलसी हैं. लेकिन बच्चे पैदा करने में इतने कर्मठ हो जाते हैं कि जैसे उसमें एनर्जी ही नहीं लगती.

सरकार ने सिफ्सा योजना चलाई, फ्री में गर्भ निरोधक गोलियां और कॉन्डम बटवाए. लेकिन एक तरफ सरकार है तो दूसरी तरफ दादी. दादी का एक पोते से मन ही नहीं भरता है. कोई दादी के लिए, कोई भगवान या अल्लाह के लिए तो कोई देश के लिए लाइन लगाए पड़ा है.

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अब ये सामाजिक समस्या राजनैतिक और धार्मिक रूप ले चुकी है. बातों बातों में बतबढ़ हो चुकी है. केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह ने कहा कि हिंदुस्तान सन 47 की तरह सांस्कृतिक विभाजन की तरफ बढ़ रहा है. जनसंख्या नियंत्रण पर धार्मिक व्यवधान भी एक कारण है. सभी दलों को जनसंख्या नियंत्रण कानून के लिए आगे आना होगा. इस पर सपा सांसद आजम खान ने तंज कसते हुए कहा कि दो तीन से ज्यादा बच्चे पैदा करने वाले पति-पत्नी को फांसी दे देनी चाहिए.

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आजम खान

जनसंख्या नियंत्रण पर एक बिल की दरकार है. कमाल की बात ये है कि इस कानून की मांग करने वाले लोग तो लंबे समय से दिख रहे हैं लेकिन इसका सीधा विरोध करने वाला कोई नहीं दिख रहा. फिर कानून बनने में समस्या कहां आ रही है समझ में नहीं आ रहा. डिबेट्स में बैठने वाले मुसलमान प्रतिनिधि ये बोल-बोलकर गला फाड़ते रहते हैं कि जनसंख्या नियंत्रण बिल लाइए लेकिन उसका आधार देश के सामाजिक और आर्थिक ढांचे को बनाइये, मुसलमानों को नहीं.

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गिरिराज सिंह

कुछ दिन पहले बाबा रामदेव ने कहा था कि अगर किसी का तीसरा बच्चा पैदा हो तो उससे वोट देने का अधिकार और सरकारी नौकरी का अधिकार, ये सब छीन लेना चाहिए. उसके जवाब में असदुद्दीन ओवैसी ने ट्वीट किया था कि ‘असंवैधानिक बातें करने से रोकने पर कोई कानून नहीं है लेकिन रामदेव की ऐसी बातों पर ध्यान क्यों दिया जाता है? प्रधानमंत्री मोदी से वोट देने का अधिकार इसलिए नहीं छीनना चाहिए कि वो तीसरे बच्चे हैं.’

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बाबा रामदेव

कांग्रेस जनसंख्या नियंत्रण वाले कानून का विरोध कर नहीं सकती. किस मुंह से करेगी, संजय गांधी इसी पार्टी में हुए हैं. लोगों को पकड़-पकड़ कर नसबंदी कराई थी. नसबंदी का जो खौफ था उसे आज के जमाने में सिर्फ नोटबंदी बीट कर सकती है. अभी हाल ये है कि गूगल पर ‘जनसंख्या नियंत्रण बिल का विरोध’ सर्च करो तो एक आदमी नहीं मिलेगा. उसके सपोर्ट वाले सैकड़ों रिजल्ट्स दिखेंगे. कांग्रेस और बाकी कोई पार्टी जनसंख्या नियंत्रण बिल का विरोध नहीं कर रही. मुस्लिम धर्मगुरुओं के कहने की फिक्र किसको है? अगर किसी कोने में बैठा कोई चिंदी विरोध कर दे तो देशहित में उसको अनसुना नहीं कर सकते? रोका किसने है? नीति ने या नीयत ने?

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संजय गांधी

लेकिन ये भी ध्यान रखना होगा कि क्या सिर्फ कानून बना देने से जनसंख्या नियंत्रण हो जाएगा या प्रॉपर शिक्षा की व्यवस्था भी की जाएगी? ताकि उत्तर प्रदेश या बिहार के किसी बीहड़ गांव में बैठा आदमी 10 बच्चे पैदा करने के नुकसान को समझ सके. क्या उनके लिए रोजगार की व्यवस्था भी होगी कि वो जो समय बच्चे पैदा करने में लगा रहे हैं वो अपना जीवन स्तर सुधारने में लगा सकें?