चीन को क्यों चुभ रही है सीमा पर भारतीय सड़क? बरकरार रहनी चाहिए भारत-नेपाल की दोस्ती

उत्तराखंड के काला पानी से लिपुलेख दर्रा (Lipulekh pass) तक सड़क पर नेपाल (Nepal) ने आपत्ति जताते हुए उसे अपनी सीमा में दर्शाया. साथ ही उसने सुगौली संधि (Sugauli Treaty 1816) को अपनाने की बात भी की. भारत भी सुगौली की संधि को मानता है. फिर विवाद क्यों उपजा?
every aspect of India-Nepal dispute, चीन को क्यों चुभ रही है सीमा पर भारतीय सड़क? बरकरार रहनी चाहिए भारत-नेपाल की दोस्ती

‘ अगर आप कहते हैं कि मुझे मौत से डर नहीं लगता… या तो आप झूठ कह रहे हैं या फिर आप गोरखा सिपाही हैं’ यह बात फील्ड मार्शल सैम मानिक शाह ने कही थी. फील्ड मार्शल भारतीय सेना (Indian Army) में उच्च पद होता है. अब तक भारत में केवल दो ही लोगों को यह पद दिया गया. एक मानिक शाह दूसरे केएम करिअप्पा को. यहां गोरखाओं का जिक्र इसलिए आया कि भारत ने कोई भी लड़ाई गोरखा सिपाहियों के अदम्य साहस के बिना नहीं लड़ी. हर जंग में गोरखा रेजीमेंट (Gorkha Regiment) ने शौर्य का परिचय दिया और यह गोरखा सिपाही नेपाल से आते हैं. उसी नेपाल जो आज भारत को आंखें दिखाने की कोशिश कर रहा है.

देखिये फिक्र आपकी सोमवार से शुक्रवार टीवी 9 भारतवर्ष पर हर रात 9 बजे

आइए, जानते हैं ऐसा क्या विवाद है? जिसके चलते नेपाल का रवैया भारत के प्रति विरोधाभासी हो रहा है. विवाद की जड़ में जाएंगे तो इसकी असल में शुरुआत ब्रिटिश काल के प्रारंभिक दौर 18 वीं शताब्दी के प्रारंभ की है. दरअसल मुगल काल के अंत आते-आते नेपाल के गोरखा शासक शक्तिशाली होते गए. ब्रिटिश काल में इन्होंने अपनी सीमाओं का विस्तार करना प्रारंभ कर दिया. नेपाल से उत्तर की तरफ अपनी सीमा कुमायूं और गढ़वाल तक बढ़ा दी जो उस समय आज के उत्तराखंड का क्षेत्र कहलाता था. दक्षिण में उसने सिक्किम पर भी अपना कब्जा जमा लिया था. साथ ही अवध के क्षेत्र तराई वर्तमान के बिहार के कुछ हिस्से पर भी गोरखा‌ शासकों अपना शासन जमा दिया था. उत्तर में सतलज नदी और दक्षिण में तीस्ता नदी तक नेपाल ने सीमा बढ़ा ली थी.

क्या है सुगौली संधि-1816

सन 1814 में ब्रिटिश सेना ने नेपाल की बढ़ती सीमा को रोकने के लिए उस पर आक्रमण कर दिया. ब्रिटिश सेना उच्च तकनीकी हथियारों से लैस थी. इसलिए जीत ब्रिटिश सेना की हुई और 1815 में संधि हुई जिसे सुगौली की संधि या फिर आंग्ल नेपाल संधि भी कहा जाता. सुगौली बिहार के चंपारण में स्थित है जहां यह संधि हुई. इसे 1816 में लागू किया गया. इस संधि के तहत नेपाल की सीमा में से पूर्व में हथियाए गए कुमायूं ,गढ़वाल, सिक्किम और तराई क्षेत्र को मुक्त कर दिया गया. अब नेपाल की नई सीमा को सीमित कर दिया गया. उत्तराखंड की शारदा नदी जो नेपाल में भी है और वहां महाकाली के नाम से जानी जाती है. महाकाली नदी से लेकर सिक्किम की तरफ मेची नदी तक नेपाल की सीमा हो गई.‌

every aspect of India-Nepal dispute, चीन को क्यों चुभ रही है सीमा पर भारतीय सड़क? बरकरार रहनी चाहिए भारत-नेपाल की दोस्ती

भारत के सड़क बनाने से चीन की आंखों में किरकिरी

नेपाल उत्तराखंड की साइड भारत के साथ जो सीमा साझा करता है वह महाकाली नदी की सीमा पर स्थित है. असल विवाद इस महाकाली नदी के विषय में ही है. विवाद की मुख्य वजह भारत ने कैलाश मानसरोवर जाने के लिए नई रोड 80 किलोमीटर की सड़क का निर्माण किया है उसको बताया जा रहा है. यह सड़क उत्तराखंड के काला पानी से शुरू होकर लिपुलेख दर्रा तक जाती है. पहले हम एक लंबे रास्ते से होकर जाते रहे हैं. यह सिक्किम के नाथूला दर्रा से होकर कैलाश मानसरोवर जाता है. यह पहाड़ी और दुर्गम रास्ता है.

नए सड़क मार्ग से कालापानी (उत्तराखंड) होते हुए लिपुलेख दर्रा से कैलाश मानसरोवर यात्रा की दूरी आसान और कम हो जाती है. यहां गौर करने वाली बात एक और भी है कि अगर यह रास्ता पूर्ण रूप से बना लेते हैं तो चीन की सीमा से सटे हुए कैलाश मानसरोवर पर्वत पर सेना की चौकी स्थापित कर भारतीय सेना‌‌ को एक और वैकल्पिक मार्ग मिल जाता है. उसे भविष्य में कभी भी युद्ध जैसे हालातों में काम में लिया जा सकता है.

भारत बॉर्डर रोड‌‌ ऑर्गेनाइजेशन बॉर्डर क्षेत्र में सड़क बनाती है. इसने उत्तराखंड के काला पानी से लिपुलेख दर्रा तक 80 किलोमीटर की सड़क बनाई. इस पर नेपाल ने आपत्ति जताते हुए उसे अपनी सीमा में होना दर्शाया. साथ ही उसने सुगौली की संधि को अपनाने की बात भी की. भारत भी सुगौली की संधि को ही मानता है. फिर विवाद क्यों उपजा? आइए, जानते हैं.

महाकाली नदी के तीन उद्गम स्थल

महाकाली नदी का उद्गम तीन जगहों से होता है जो क्रमशः लिंपियाथूरा (उत्तराखंड के पीथौड़ागढ़), काला पानी और लिपुलेख दर्रा है. इस पर भारत का पक्ष है कि महाकाली नदी जहां से नेपाल की सीमा प्रारंभ होती है उस नदी की सीमा अंतिम उद्गम लिपुलेख से प्रारंभ होती है. वहीं नेपाल ने वर्तमान में जारी नए नक्शे में प्रारंभिक उद्गम स्थल लिंपियाथूरा से ऐसा होने का दावा किया है. सुगौली की संधि के अनुसार महाकाली नदी की सीमा को ही नेपाल की सीमा माना गया है. यह तीनों ही उद्गम स्थल उत्तराखंड से आते हैं. यह भारत का क्षेत्र है और सुगौली की संधि के अनुसार महाकाली नदी का अंतिम उद्गम स्थान लिपुलेख से प्रारंभ होता है. इसके बावजूद वर्तमान में नेपाल ने अपनी सीमा को बढ़ाकर उत्तराखंड के लिंपियाथुरा तक बताया है.

राजनीतिक पहलू

अब आते हैं इसके राजनीतिक पहलू पर जो वर्तमान में नेपाल के प्रधानमंत्री के पी शर्मा ओली एनसीपी (नेपाल कम्युनिस्ट पार्टी) से आते हैं. यह कम्युनिस्ट विचारधारा की पार्टी है. इसकी विचारधारा चीन की कम्युनिस्ट विचारधारा से बिल्कुल मेल खाती है. यह कम्युनिस्ट विचारधारा भारत के प्रति कभी भी अच्छा रुख कतई नहीं रखती है. वर्तमान में नेपाल ने चीन से अच्छा खासा मोटा कर्ज ले रखा है. अगर कैलाश मानसरोवर का सड़क रास्ता खुलता है तो भारतीय सेना अपनी चौकियां बना सकती है. यही बात चीन को‌ सता रही है और वह नेपाल पर दबाव बना रहा है. इसकी पूरी संभावना है.

भौगोलिक परिस्थिति

नेपाल एक ऐसा देश है जो लैंड लॉक है. लैंड लॉक का अर्थ ऐसा देश जो अपनी सभी सीमाएं दो अन्य देशों से धरातलीय रूप से साझा करता हो. उनके बीच कोई समुद्री सीमा ना हो. साथ ही नेपाल एक बफर कंट्री भी है. इसका अर्थ है कि यह दो देशों के बीच में स्थित है. नेपाल के चीन की दिशा में सीमा पर पहाड़ी क्षेत्र है. इस रास्ते से व्यापार करना संभव नहीं है. भारत की तरफ सड़क मार्ग भी है.

every aspect of India-Nepal dispute, चीन को क्यों चुभ रही है सीमा पर भारतीय सड़क? बरकरार रहनी चाहिए भारत-नेपाल की दोस्ती

कारोबारी हालात

अगर नेपाल को चीन से किसी वस्तु का आयात-निर्यात करना हो तो उसे सड़क मार्ग से भारत होते हुए कोलकाता के बंदरगाहों से होकर समुद्र के रास्ते चीन जाना होगा. कुल मिलाकर आयात-निर्यात के लिए नेपाल भारतीय बंदरगाहों पर ही आश्रित है.

साल 2015 में भी तनावपूर्ण स्थिति में भारत ने नेपाल से लगती हुई सीमा का सड़क मार्ग बंद कर दिया था. इसके बाद नेपाल में चीन या अन्य देशों से आने वाले माल का आयात करना मुश्किल हो गया था. वह केवल हवाई मार्ग के द्वारा ही आयात निर्यात कर पा रहा था. एक समय ऐसा आया कि नेपाल के पास हवाई जहाज के लिए इंधन की मात्रा भी खत्म होने लगी. इसके बाद 2016 में उनके लिए फिर से रास्ते चालू हुए.

कुल मिलाकर नेपाल को दुनिया से जुड़े रहने के लिए सबसे ज्यादा आसान और सुगम कनेक्टिविटी भारतीय सीमाओं से ही मिल सकती है. चीन के रास्ते दुनिया से जुड़ने के लिए नेपाल को हिंद महासागर होते हुए लंबे और बेहद खर्चीले समुद्री मार्ग से होकर जाना होगा.

इसलिए बरकरार रहे मजबूत दोस्ती

‘ईश्वर ने आपको दोस्त अपने हिसाब से चुनने का अधिकार तो दिया है, लेकिन पड़ोसी आप नहीं चुन सकते.’ नेपाल हमारा पड़ोसी देश है और नेपाल के गोरखा सैनिक हमेशा हर लड़ाई में भारत के साथ रहे हैं. क्योंकि यह गोरखा सैनिक पहाड़ी इलाकों में युद्ध करने में पारंगत होते हैं. साथ ही नेपाल एक हिंदू बहुल देश भी है. इसकी संस्कृति भारत के साथ साझा हैं.

ऐसी स्थिति में भारत और नेपाल के पास एकमात्र रास्ता वार्ता का ही है. इसमें नेपाल सुगौली की संधि पर दी गई महाकाली नदी की सीमा तक सीमित रहे. साथ ही यह स्पष्ट करे कि महाकाली नदी की सीमा लिपु‌लेख के बाद प्रारंभ होती है.

देखिये परवाह देश की सोमवार से शुक्रवार टीवी 9 भारतवर्ष पर हर रात 10 बजे

Related Posts