‘वोट कटवा उम्मीदवार’ उतारकर कांग्रेस ने क्या पहले से हार मान ली है?

प्रियंका गांधी ने रायबरेली में कहा कि उनके उम्मीदवार जहां मजबूत हैं वहां बीजेपी को कड़ी टक्कर दे रहे हैं, जहां कमजोर हैं वहां बीजेपी के वोट काटेंगे. अब उम्मीदवार सोच रहे हैं कि किसको कमजोर बोल दिया.

“बीजेपी को यूपी में तगड़ा झटका लगेगा. वे बुरी तरह हारेंगे. जिन सीटों पर कांग्रेस मजबूत है और हमारे उम्‍मीदवार कड़ी टक्‍कर दे रहे हैं, वहां कांग्रेस जीतेगी. जहां हमारे उम्‍मीदवार थोड़े हल्‍के हैं, वहां हमने ऐसे उम्‍मीदवार दिए हैं जो बीजेपी का वोट काटे.”

प्रियंका गांधी ने ये बात रायबरेली में कार्यकर्ताओं से बातचीत के बीच कही. साथ ही ये भविष्यवाणी भी की कि उत्तर प्रदेश में बीजेपी बुरी तरह हार रही है. भविष्यवाणी का तो ये है कि मतगणना के दिन तक हर नेता अपने विरोधी की जमानत जब्त होने की करता है. मतगणना के बाद ही इस बात पर ध्यान जाता है कि हार की जिम्मेदारी किस पर डालनी है.

प्रियंका गांधी का ये बयान विरोधियों के लिए संजीवनी बूटी है. ऑक्सीजन है. ‘वोट काटने वाले उम्‍मीदवार’ वो ही पार्टी लगाती है जिसे जीतने की उम्मीद न हो. उसे उम्‍मीदवार नहीं, ना-उम्मीदवार कहना चाहिए. जिसे सिर्फ एक उम्मीद है कि विरोधी के वोट काटकर तीसरे विरोधी को जिता देगा.

वोट कटवा उम्मीदवार अभी तक निर्दलीय होते थे. जिनको जीतने की उम्मीद पाले उम्मीदवार कभी पैसे तो कभी धमकी देकर बिठा देते थे. कभी वो नहीं बैठते तो सच में समीकरण बिगाड़ देते थे. लेकिन एक राष्ट्रीय पार्टी वोट काटने के लिए उम्मीदवार उतारे, ये बात गले नहीं उतर रही.

प्रियंका की ये बात दो बातों की तरफ इशारा करती है. या तो कांग्रेस ने हथियार डाल दिए हैं. या फिर वो 2024 की तैयारी कर रही है. 2024 की तैयारी में भी वही बात है कि इस बार की बाजी हाथ से जा चुकी है. हालांकि प्रियंका गांधी ने ये नहीं बताया है कि ये वोट कटवा उम्मीदवार सिर्फ यूपी में हैं या पूरे देश में हैं.

प्रियंका गांधी अगर एकाध नाम बता देतीं या हल्का सा हिंट दे देतीं कि वो कौन सा वोट कटवा उम्मीदवार है तो बीजेपी का काम और आसान हो जाता. वो बस बता देतीं कि उस उम्मीदवार का नाम किस अक्षर से शुरू होता है, या कौन से फ्रेम का चश्मा लगाता है, या पब्लिक मीटिंग में सोता रहता है, बस एक हिंट दे देतीं. इतने में तो बीजेपी अपने उम्मीदवार के लिए संभावित मंत्रीपद तलाश लेते.

प्रियंका गांधी को अब समझ लेना चाहिए कि वो सक्रिय राजनीति में आ चुकी हैं. कांग्रेस बड़ी उम्मीद से उनको लेकर आई है. ऐसी निराशाजनक बातें नहीं करनी चाहिएं कि विरोधी खेमे में खुशी की लहर दौड़ जाए. इससे तो कांग्रेस के सारे उम्मीदवार टेंसन में होंगे कि पता नहीं मैडम ने किस उम्मीदवार को वोट कटवा कहा है.

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