प्रधानमंत्री जी, कश्मीर और कश्मीरियों के खिलाफ आप नहीं तो आपके राज्यपाल की इतनी हिमाकत कैसे हुई ?

‘कश्मीरियों से नहीं, कश्मीर के लिए है हमारी लड़ाई’.. ये बात पीएम मोदी ने राजस्थान के टोंक में एकदम खरी-खरी कही. पीएम का ये बयान देशभर से कश्मीरियों के साथ बदसलूकी की खबरों के बीच आया है. पुलवामा हमले के बाद कुछ अतिउत्साही लोगों ने जिस तरह कश्मीरियों के बहिष्कार जैसी बातें फैलाईं उसके बाद […]

‘कश्मीरियों से नहीं, कश्मीर के लिए है हमारी लड़ाई’.. ये बात पीएम मोदी ने राजस्थान के टोंक में एकदम खरी-खरी कही. पीएम का ये बयान देशभर से कश्मीरियों के साथ बदसलूकी की खबरों के बीच आया है. पुलवामा हमले के बाद कुछ अतिउत्साही लोगों ने जिस तरह कश्मीरियों के बहिष्कार जैसी बातें फैलाईं उसके बाद शासन-प्रशासन के लिए लॉ एंड ऑर्डर की देखभाल करना चुनौती बन गया. और तो और बीजेपी के नेता रहे और फिलहाल मेघालय के गवर्नर तथागत रॉय ने भी अपने ट्विटर पर फतवा जारी कर दिया था.

उन्होंने एक रिटायर्ड मेजर के ट्वीट को रिट्वीट किया था जिसमें कश्मीरियों के बहिष्कार का साफ-साफ आह्वान था, और बाद में उस ट्वीट से अपनी सहमति जताते हुए लिखा कि ‘मैं इस बात से सहमत हूं.’


ये पहली बार था जब राज्यों में राष्ट्रपति के सीधे नुमाइंदे माने जानेवाले राज्यपाल ने किसी सूबे के निवासियों के बहिष्कार की अपील की हो. संविधान के रक्षक राज्यपाल की ऐसी असंवैधानिक अपील ने ना सिर्फ चौंकाया बल्कि निराश भी किया.

इसी दौरान कश्मीरियों की सुरक्षा को लेकर सुप्रीम कोर्ट से भी निर्देश जारी हुए. उसी के बाद मोदी सरकार पर दबाव बढ़ा. उन्होंने अपनी रैली में कहा कि, ‘घटना छोटी थी या बड़ी मुद्दा नहीं है, यह होना ही नहीं चाहिए.’ 

, प्रधानमंत्री जी, कश्मीर और कश्मीरियों के खिलाफ आप नहीं तो आपके राज्यपाल की इतनी हिमाकत कैसे हुई ?

अब सवाल है कि प्रधानमंत्री मोदी ने आम लोगों को तो नसीहत दे दी लेकिन क्या राज्यपाल का कर्तव्य निभा रहे तथागत रॉय इसी सलाह को खुद के लिए भी मानेंगे?

क्या उन्हें प्रधानमंत्री की ये बात सुनाई देगी कि कश्मीर का बच्चा-बच्चा आतंकवादियों के खिलाफ है. 

क्या उन्हें प्रधानमंत्री की ये बात समझ में आएगी कि आम कश्मीरी भी आतंकवाद से मुक्ति चाहता है.

क्या उन्हें प्रधानमंत्री की ये बात गले उतरेगी कि कश्मीर और कश्मीरी दोनों हमारे ही हैं.

दरअसल देश का एक तबका पुलवामा हमले के लिए सारे कश्मीरियों को ही दोषी ठहराने में जुटा है. इस काम में आम लोगों के अलावा कई नेता भी शामिल हैं. अब पीएम मोदी का बयान आया है तो उम्मीद है कि कश्मीर को लेकर चल रहे भड़काऊ दुष्प्रचार पर थोड़ा ब्रेक लगेगा.. मगर सवाल प्रधानमंत्री से भी है कि तथागत रॉय और उन जैसे कई नेता जो पुलवामा हमले के बाद कश्मीरियों की छाती पर चढ़ बैठे उन्हें रोकने के लिए वो क्या कर रहे हैं? आम लोगों को तो मंच से समझा दिया गया लेकिन क्या तथागत रॉय जैसे अपने ही सहयोगियों को उन्होंने बातचीत करके ऐसे बयान ना देने की समझाइश दी?  जब देश में हालात नाज़ुक हैं,  सुप्रीम कोर्ट तक कश्मीरियों की सुरक्षा को लेकर फिक्रमंद है, प्रधानमंत्री तक को मंच से कश्मीरियों की हिफाज़त के लिए बोलना पड़ा हो तब दूसरी तरफ राजभवनों में बैठकर किए जा रहे गैर-ज़िम्मेदाराना ट्वीट रोके जाने के लिए क्या किया जा रहा है? आम लोग तो किसी के बहकाने से एकबारगी बहक सकते हैं, लेकिन जब बहकावे राज्यपाल पद पर बैठा शख्स दे रहा हो तो क्या प्रधानमंत्री के लिए सबसे पहले उस पर अंकुश लगाना ज़रूरी नहीं हो जाता?