राहुल गांधी को इन दो भाइयों से सीखना चाहिए, प्रचंड हार के बाद भी कैसे न दें इस्तीफा!

राहुल गांधी इस्तीफे पर अड़े हैं और उनकी पार्टी इस्तीफा न लेने पर अड़ी है. इस अड़ा-अड़ी के खेल में राहुल गांधी पाजिटिव बातें नहीं देख पा रहे.

राहुल गांधी का इस्तीफा ट्रेंडिंग है. एक ऐसी चीज जिसे किसी ने नहीं देखा फिर भी उस पर बात बराबर जारी है. राजनीति की गलियों में चर्चा जारी है कि प्रचंड हार के बाद से राहुल गांधी चुप हैं. किसी से बात नहीं कर रहे. इस्तीफा देने पर अड़े हुए हैं. इस बीच लखनऊ में कांग्रेस प्रवक्ता प्रदीप सिंह ने आमरण अनशन शुरू कर दिया है. उनकी मांग है कि राहुल गांधी अपना इस्तीफा वापस लें, नहीं तो वो भूखे प्यासे धरने पर बैठे रहेंगे.

Rahul Gandhi, राहुल गांधी को इन दो भाइयों से सीखना चाहिए, प्रचंड हार के बाद भी कैसे न दें इस्तीफा!

अभी तक सिर्फ भगवान वो अदृश्य शक्ति थी जिस पर दुनिया का भरोसा था, अब राहुल गांधी का इस्तीफा भी है. सोशल मीडिया पर लोग बातें कर रहे हैं कि राहुल गांधी ने राहुल गांधी को इस्तीफा दिया जिसे राहुल गांधी ने रिजेक्ट कर दिया और कहा राहुल जी आप पार्टी की कमान संभालिए. मनमोहन सिंह अपने प्रधानमंत्रित्व काल में तो नहीं बोलते थे लेकिन राहुल गांधी के इस्तीफे पर इतना जरूर बोला कि ‘हार जीत चलती रहती है. इस्तीफा मत दो.’

कांग्रेस में इस्तीफा देने की होड़ लगी है. उत्तर प्रदेश कांग्रेस के मुखिया राज बब्बर और पंजाब कांग्रेस चीफ सुनील जाखड़ समेत 13 बड़े नेता अपना इस्तीफा भेज चुके हैं. कहने को ये लोग नैतिकता के आधार पर हार की जिम्मेदारी ले रहे हैं लेकिन असल में राहुल गांधी को आइडिया दे रहे हैं. सबसे बड़ी जिम्मेदारी तो उन्हीं की है इसलिए इनडायरेक्टली ये नेता बता रहे हैं कि राहुल गांधी को क्या करना चाहिए. सच ये है कि राहुल गांधी के इस्तीफे का सबसे ज्यादा विरोध बीजेपी वाले कर रहे हैं.

Rahul Gandhi, राहुल गांधी को इन दो भाइयों से सीखना चाहिए, प्रचंड हार के बाद भी कैसे न दें इस्तीफा!

इधर कांग्रेस, उधर तृणमूल कांग्रेस, दोनों का हाल एक जैसा है. ममता बनर्जी ने भी साफ कर दिया था कि उनका मुख्यमंत्री बने रहने का अब मन नहीं है. उन्होंने भी इस्तीफा दिया तो उनकी पार्टी ने स्वीकार नहीं किया. इससे पहले कि कोई आमरण अनशन पर बैठे, ममता बनर्जी ने जिद छोड़ दी. यहां तक कि इस्तीफे का प्लान ड्रॉप कर वो पीएम मोदी के शपथग्रहण में भी जाने वाली थीं लेकिन एक दिन पहले निमंत्रण ठुकरा दिया.

सबसे ज्यादा स्वैग में तेजस्वी यादव और तेज प्रताप यादव हैं. इनके यहां न किसी ने इस्तीफा देने का दबाव बनाया और न इन्होंने दिया. पूरी पार्टी का सूपड़ा बिहार में साफ कराने के बाद तेज प्रताप यादव तेजस्वी के सपोर्ट में आ गए. ट्वीट भी कर दिया कि जिसको तेजस्वी के नेतृत्व पर शक है वो राजद पार्टी छोड़ दे. राहुल गांधी और पूरी कांग्रेस को इन भाइयों से सीखना चाहिए. इन्होंने ‘हार में या जीत में किंचित नहीं भयभीत मैं’ करके दिखाया है.