शहीद की पत्नी ने क्यों कहा?… नारेबाजी नहीं, खुद में बदलाव लाकर दीजिए श्रद्धांजलि!

 “सिर्फ जिंदाबाद और मुर्दाबाद के नारे लगाने से न तो शहीदों को श्रद्धांजलि मिलेगी और न ही देश का भला होगा, अगर आप सच में कुछ बदलना चाहते हैं तो आर्मी ज्वाइन कीजिए और अगर ये संभव नहीं है तो हर मामले में खुद को बेहतर बनाइए और बदलाव लाइए.” ये कहना है नासिक निवासी  शहीद स्क्वॉड्रन लीडर निनाद मांडवगणे की पत्नी विजेता का.

 “सिर्फ जिंदाबाद और मुर्दाबाद के नारे लगाने से न तो शहीदों को श्रद्धांजलि मिलेगी और न ही देश का भला होगा, अगर आप सच में कुछ बदलना चाहते हैं तो आर्मी ज्वाइन कीजिए और अगर ये संभव नहीं है तो हर मामले में खुद को बेहतर बनाइए और बदलाव लाइए. ये कहना है नासिक निवासी  शहीद स्क्वॉड्रन लीडर निनाद मांडवगणे की पत्नी विजेता का। निनाद मांडवगणे श्रीनगर के पास 27 फरवरी को दुर्घटनाग्रस्त हुए सेना के उस हेलिकॉप्टर में पायलट थे, जिसमें 5 अन्य वायुसेना कर्मी भी शहीद हो गए थे. शहीद स्क्वॉड्रन लीडर निनाद मांडवगणे की पत्नी विजेता ने कहा, कि ‘अगर आप सच में कुछ बदलना चाहते हैं तो आर्मी ज्वाइन कर सीमा पर जाइए. अगर आप ऐसा नहीं कर पा रहे हैं तो अपने आसपास को स्वच्छ रखिए और सार्वजनिक जगहों पर गंदगी न फैलाइए, महिलाओं को परेशान करना और शोषण करना बंद करिए, सांप्रदायिक नफरत को बढ़ावा मत दीजिए. ऐसा करने से ही देश में बड़ा बदलाव आएगा’.  शहीद के अंतिम दर्शन के लिए हजारों की भीड़ उमड़ी थी और इस दौरान लोगों ने भारत की माता की जय और पाकिस्तान मुर्दाबाद के नारे लगाए थे, इसके बाद शहीद की पत्नी ने लोगों से ये बातें कहीं.

शहीद की पत्नी ने जो भी कहा सौ फीसद सच कहा. इसमें कोई दो राय नहीं कि वीर शहीदों को सच्ची श्रद्धांजलि देने के लिए हमें अपने अंदर बदलाव लाने की जरूरत है. हमें वीरों की बहादुरी और बलिदान में फर्क करने से भी बचना होगा. चाहे जल हो या जमीन या फिर आसमान, हमारी रक्षा और सीमा की सुरक्षा के लिए जान न्योछावर करने वाले जांबाजों को सच्ची श्रद्धांजलि देना हमारा पहला कर्तव्य है. सैनिक चाहे देश की सीमा में शहीद हुए हों या फिर सीमा पार जाकर दुश्मनों से आंख में आंख मिलाकर लौट रहा हो, दोनों बराबरी के सम्मान के हकदार हैं. लेकिन ये दुखद है कि शुक्रवार को कुछ ऐसा हुआ जो शायद फिर कभी नहीं हो. एक ओर दुश्मन के घर में पराक्रम का प्रदर्शन कर लौट रहे अभिनंदन की आगवानी में पूरा देश वंदन कर रहा था तो दूसरी ओर देश की सीमा में शहीद सैनिकों की अंतिम विदाई खामोशी के साए में हो रही थी.

 आगवानी और विदाई में फर्क क्यों?

ये संयोग ही कहिए कि जिस दिन विंग कमांडर अभिनंदन ने पाकिस्तानी एफ-16 को उसकी सीमा में खदेड़ कर मार गिराया था, उसी दिन श्रीनगर के बडगाम में वायुसेना का एमआई-17 हेलिकॉप्टर हादसे का शिकार हो गया था. भारत-पाकिस्तान बॉर्डर पर तनातनी के बीच हवा में क्रैश हुए सेना इस हेलिकॉप्टर में 6 जाबांज सैनिक भी शहीद हो गए थे. इसके 2 दिन बाद शुक्रवार को जब पूरा देश अभिनंदन की आगवानी में जुटा था तो देश के अलग-अलग हिस्सों में हेलिकॉप्टर हादसे के वीर शहीदों को अंतिम विदाई दी जा रही थी. खास बात ये कि मीडिया ने भी वीर शहीदों की शहादत और बहादुरी को सलामी देने में फर्क किया. जबकि हेलिकॉप्टर हादसे में शहीद सैनिक भी अभिनंदन की तरह वंदन के हकदार थे.

हेलिकॉप्टर हादसे में हुए थे शहीद

जम्मू-कश्मीर के बडगाम में बुधवार को भारतीय वायुसेना का MI-17 हेलिकॉप्टर क्रैश  हो गया था. इसमें जान गंवाने वाले स्क्वॉड्रन लीडर निनाद मांडवगणे का पार्थिव शरीर शुक्रवार को नासिक लाया गया. उन्हें अंतिम विदाई और श्रद्धांजलि देने लोगों का भारी हुजूम उमड़ा था। तिरंगे में लिपटे वीर के लोगों ने नम आंखों से अंतिम दर्शन किए। हेलिकॉप्टर हादसे के बारे में अधिकारियों ने बताया था कि विमान दो हिस्सों में टूट गया और उसमें फौरन आग लग गई। इस हादसे में स्क्वाड्रन लीडर निनाद मांडवगणे और सिद्धार्थ वशिष्ट के अलावा विशाल कुमार पांडे, सार्जेंट विक्रांत सेहरावत, दीपक पांडे और पंकज कुमारशहीद हो गए थे. इन सभी को शुक्रवार को अंतिम विदाई दी गई. लेकिन नेशनल मीडिया में अभिनंदन की तरह जगह नहीं मिली.

बलिदान और बहादुरी में न कीजिए फर्क

ये सच है कि अभिनंदन की बहादुरी पर देश को फक्र है लेकिन इसमें भी कोई दो राय नहीं कि सीमा के अंदर शहीद सैनिकों का बलिदान भी किसी भी सूरत में कम नहीं है. दोनों ही बराबर सम्मान के हकदार हैं. चंडीगढ़ में स्क्वाड्रन लीडर सिद्धार्थ वशिष्ठ का अंतिम संस्कार पूरे रीति-रिवाजों के साथ किया गया. सिद्धार्थ अपने परिवार की चौथी पीढ़ी थे, जिन्होंने भारतीय सेना के लिए अपनी सेवा दी. सिद्धार्थ की पत्नी आरती सिंह भी इंडियन एयरफोर्स में स्क्वाड्रन लीडर हैं. आरती ने अपनी वर्दी में पति को श्रद्धांजलि दी. सिद्धार्थ भारत के वही वीर सिपाही थे, जिन्होंने केरल में आई बाढ़ के दौरान अपना बेहतरीन प्रदर्शन करके दिखाया था. केरल बाढ़ के दौरान रेसक्यू ऑपरेशन में अपनी जांबाजी दिखाने के लिए उन्हें काफी सराहना मिली थी. नासिक के रहने वाले शहीद सक्वाड्रन लीडर निनाद अनिल मांडवगणे की बेटीअभी दो साल की है. निनाद की अंतिम विदाई के मौके पर उनकी पत्नी ने कहा कि अगर मेरी बेटी बड़ी होकर सेना में जाना चाहेगी तो मैं जरूर भेजूंगी. हरियाणा के झज्जर जिले के गांव भदानी निवासी विक्रांत शेहरावत भी इस हादसे में शहीद हुए. विक्रांत का डेढ साल का बेटा है. पति का शव जैसे ही घर पहुंचा विक्रांत की पत्नी ने अपनी चूड़ियां तोड़ी और बेटे के साथ पति को गर्व के साथ सैल्यूट किया. कानपुर के रहने वाले शहीद कॉर्पोरल दीपक पांडे अपने माता-पिता का इकलौता सहारा था. लेकिन उन्हें अपने बेटे की शहादत पर गर्व है. दीपक के परिजनों का कहना था कि दीपक जब स्कूल में थे, तभी उन्होंने ठान लिया था कि वो इंडियन एयरफोर्स ज्वाइन करेंगे. बडगाम हेलिकॉप्टर हादसे में मथुरा के कॉर्पोरल पंकज कुमार भी शहीद हुए. 27 वर्षीय पंकज कुमार के पिता भी फौज से रिटायर्ड हैं. वाराणसी के रहने वाले विशाल कुमार पांडे इंडियन एयरफोर्स में फ्लाइट इंजीनियर थे. विशाल छुट्टी मिलने के बाद होली के लिए घर आने वाले थे.