एक दर्दनाक घटना में, राजस्थान के अलवर (Alwar) जिले में एक शराब ठेकेदार ने सेल्समैन के रूप में काम करने वाले एक दलित युवक को कथित रूप से पांच महीने का अपना बकाया वेतन मांगने पर उसे आग के हवाले कर दिया. पुलिस ने कहा कि कमल किशोर का अधजला शव बाद में शराब की दुकान में डीप फ्रीजर में मिला. कमल के भाई रूप सिंह ने खैरथल पुलिस स्टेशन में प्राथमिकी दर्ज कराई, जिसमें उसने उल्लेख किया कि शराब ठेकेदार सुभाष और राकेश यादव से बकाया वेतन मांगने पर कमल किशोर को जिंदा जला दिया गया. दोनों फरार हैं.

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भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष सतीश पुनिया ने सोमवार को ट्वीट किया, “ऐसा लगता है कि हम अफ्रीका में सोमालिया में रह रहे हैं, जहां कोई कानून-व्यवस्था नहीं है. क्या सीएम अशोक गहलोत को अपने पद पर रहने का कोई हक है.” उन्होंने एक हैशटैग क्राइमकैपिटलराजस्थान भी लगाया.

जिंदा जलाने की दूसरी घटना

राजस्थान के एक मंदिर के पुजारी को जमीन के विवाद में जिंदा जलाने के बाद अब जिंदा जलाने की ये दूसरी घटना सामने आई है. पुलिस के अनुसार, अलवर के झड़का गांव के रहने वाले मृतक कमल किशोर (22) की शनिवार की रात कमपुर गांव में जलने से मौत हो गई. पुलिस ने कहा कि एक फोरेंसिक टीम ने घटनास्थल का दौरा किया. पुलिस ने कहा, “मामले में और सबूत मिलने के बाद ही स्थिति स्पष्ट होगी.”

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रूप सिंह ने आरोप लगाया कि कमल किशोर का वेतन पिछले पांच महीनों से बकाया था. वह घर लौट आया, लेकिन शनिवार शाम को, ठेकेदार और उनके साथी उसके घर पहुंचे और कमल किशोर को अपने साथ ले गए. रूप सिंह के मुताबिक, रात में कमल किशोर के अंदर होने के बावजूद शराब की दुकान में पेट्रोल डालकर आग लगा दी गई.

फ्रीजर के अंदर मिला शव

रविवार की सुबह, जब दुकान के शटर को तोड़ा गया तो कमल किशोर फ्रीजर के अंदर मृत पाया गया. पुलिस शव को ऑटोप्सी के लिए खैरथल सैटेलाइट अस्पताल में ले गई. अपराधियों की गिरफ्तारी और न्यायायिक जांच की मांग कर रहे परिजनों ने रविवार शाम तक पोस्टमार्टम नहीं होने दिया था. दिनभर की मशक्कत, समझाने-बुझाने के बाद आखिरकार पोस्टमार्टम के बाद शव परिजनों को सौंप दिया गया.

राज्य चुनाव आयोग ने राजस्थान (Rajasthan) में जिला परिषद (Zila Parishad) और पंचायत समिति (Panchayat Samiti) चुनावों की घोषणा कर दी है. राज्य के 21 जिलों में 23 नवंबर से 5 दिसंबर को बीच चार चरणों में ये चुनाव कराए जाएंगे. आयोग ने बताया कि मतों की गणना 8 दिसंबर को होगी. राज्य चुनाव आयुक्त पीएस मेहरा ने कहा कि 21 जिलों में जिला परिषद और पंचायत समिति चुनाव के पहले चरण का मतदान 23 नवंबर, दूसरे चरण का 27 नवंबर और तीसरे चरण का 1 दिसंबर को होगा.

अजमेर, चूरू, नागौर, बांसवाड़ा, डूंगरपुर, पाली, बाड़मेर, हनुमानगढ़, प्रतापगढ़, भीलवाड़ा, जैसलमेर, राजसमंद, बीकानेर, जालौर, सीकर, बूंदी, झालावाड़, टोंक, चित्तौड़गढ़, झुंझुनू और उदयपुर जिले में चुनाव होंगे. उन्होंने कहा कि राज्य के शेष 12 जिलों में चुनाव नहीं हो रहे हैं, क्योंकि नगरपालिकाओं का परिसीमन अदालत के समक्ष लंबित है.

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21 जिलों में 21.41 करोड़ से अधिक मतदाता

इन 21 जिलों में 21.41 करोड़ से अधिक मतदाता हैं. यहां पर कुल 636 जिला परिषद सदस्य और 4,371 पंचायत समिति सदस्यों का चुनाव होना है. आयुक्त ने बताया कि 4 नवंबर को चुनाव सूचना जारी की जाएगी. इसके साथ ही नामाकंन पत्र भरने की प्रक्रिया शुरू होगी. प्रत्याशी 9 नवंबर शाम तीन बजे तक नामांकन भर सकेंगे. नामांकन पत्रों की जांच 10 नवंबर को होगी. 11 नवंबर तक नामांकन वापस लिया जा सकता है.

निर्वाचन क्षेत्रों में लागू आदर्श आचार संहिता

आयुक्त ने बताया कि नामांकन वापस लिए जाने के बाद चुनाव चिन्ह बांटे जाएंगे और प्रत्याशियों की सूची जारी की जाएगी. आयोग ने कहा कि चुनाव तारीखों की घोषणा के साथ ही आदर्श आचार संहिता संबंधित निर्वाचन क्षेत्रों में लागू हो गई है. चुनाव के खत्म होने तक संहिता का पालन करना होगा.

कोरोना संक्रमित पीपीई किट पहनकर देंगे वोट

राजस्थान में कोरोना काल के बीच शहर के नगर निगम हैरिटेज और ग्रेटर के चुनाव हो रहे हैं. इन चुनावों में कोरोना पॉजिटिव व्यक्ति भी पीपीई किट पहनकर वोट कर सकेगा. कोविड के नियमानुसार, अस्पताल में भर्ती होने या घर पर आईसोलेट कोरोना पॉजिटिव व्यक्ति भले ही बाहर नहीं निकल सकते, लेकिन उन्हें मताधिकार से वंचित नहीं किया जा सकता. आयोग ने उन्हें सशर्त मतदान करने का अवसर दिया है.

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 राजस्थान (Rajasthan) के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत (Ashok Gehlot) ने मंगलवार को कहा कि राजस्थान सरकार (Rajasthan Government) भी केंद्र द्वारा हाल ही में पारित कृषि संबंधी कानूनों (Agriculture Bill 2020) के खिलाफ विधेयक लाएगी और इसके लिए जल्द ही राज्य विधानसभा का विशेष सत्र बुलाया जाएगा. राज्य मंत्री परिषद की मंगलवार शाम को हुई बैठक में यह फैसला किया गया. मुख्यमंत्री गहलोत की अध्यक्षता में हुई इस बैठक में केन्द्र सरकार द्वारा किसानों से सम्बन्धित विषयों पर बनाए गए तीन नए कानूनों से राज्य के किसानों पर पड़ने वाले प्रभावों पर चर्चा की गई. बैठक के बाद जारी सरकारी बयान के अनुसार मंत्री परिषद ने राज्य के किसानों के हित में यह निर्णय किया कि किसानों के हितों को संरक्षित करने के लिए शीघ्र ही विधानसभा का विशेष सत्र बुलाया जाए.

गहलोत ने ट्वीट किया, ‘आज पंजाब की कांग्रेस सरकार ने इन कानूनों के विरुद्ध विधेयक पारित किए हैं और राजस्थान भी शीघ्र ऐसा ही करेगा’. बयान के अनुसार, राज्य मंत्री परिषद ने फसलों की न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) पर खरीद की अनिवार्यता पर जोर दिया. साथ ही, व्यापारियों द्वारा किसानों की फसल खरीद के प्रकरण में विवाद होने की स्थिति में उसके निपटारे के लिए दीवानी अदालत के अधिकारों को बहाल रखने पर भी चर्चा की. मंत्री परिषद का मत है कि राजस्थान में ऐसे प्रकरणों में फसल खरीद के विवादों के मण्डी समिति या दीवानी अदालत के माध्यम से निपटारे की व्यवस्था पूर्ववत रहनी चाहिए.

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30 नवम्बर तक रहेगा कोरोना के विरूद्ध जन आंदोलन

मंत्री परिषद ने माना कि नए कृषि कानूनों के लागू होने के बाद आवश्यक वस्तु अधिनियम के तहत सामान्य परिस्थितियों में विभिन्न कृषि जिन्सों के भंडार की अधिकतम सीमा हटाने से कालाबाजारी बढ़ने, अनाधिकृत भण्डारण तथा कीमतें बढ़ने की आशंका से इंकार नहीं किया जा सकता. बैठक में यह भी चर्चा की गई कि अनुबंध कृषि अधिनियम में न्यूनतम समर्थन मूल्य का प्रावधान रखना प्रदेश के किसानों के हित में होगा. बैठक में प्रदेश में कोरोना वायरस संक्रमण तथा इससे निपटने के लिए राज्य सरकार द्वारा किए जा रहे प्रबंधन पर भी चर्चा हुई. मंत्री परिषद ने इस बात पर संतोष व्यक्त किया कि राज्य में कोरोना वायरस से निपटने संबंधी प्रबंधन बेहतरीन रहा है.

मंत्री परिषद ने यह भी निर्णय किया कि कोरोना वायरस (Covid-19) के विरूद्ध जन आंदोलन को 31 अक्टूबर से एक माह और बढ़ाकर 30 नवम्बर तक जारी रखा जाए. इस बीच, गहलोत ने ट्वीट किया, ‘सोनिया गांधी (Sonia Gandhi) एवं राहुल गांधी (Rahul Gandhi) के नेतृत्व में भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस (Indian national Congress) हमारे अन्नदाता किसानों के पक्ष में मजबूती से खड़ी है और हमारी पार्टी किसान विरोधी कानून जो राजग (NDA) सरकार ने बनाए हैं, उनका विरोध करती रहेगी. आज पंजाब (Punjab) की कांग्रेस सरकार ने इन कानूनों के विरुद्ध विधेयक पारित किये हैं और राजस्थान भी शीघ्र ऐसा ही करेगा.’

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त्योहार और पर्व खुशियां लाते हैं लेकिन कई बार उनको सेलिब्रेट करने का तरीका पर्यावरण के लिए नुकसानदायक सिद्ध होता है. दीपावली बड़ा पर्व है. दीपावली में चायनीज सामानों की भरमार है. जिससे ना केवल देश की अर्थव्यवस्था कमजोर होती है बल्कि पर्यावरण को भी नुकसान पहुंचता है. अब जयपुर में चायनीज माल को तौबा करने का संकल्प लिया गया है.

हर घर रोशन हो इसी को ध्यान में रखते हुए जयपुर में पर्यावरण संरक्षण और आत्मनिर्भर भारत का एक बड़ा उदाहरण देखने को मिल रहा है. दीपावली पर गौ माता के गोबर से बनाए दीयों से दिवाली रोशन होगी. इसी कड़ी में जयपुर में महिलाएं खुद 5000 गाय के गोबर से दीपक बना रही हैं. एक और जहां गाय के गोबर से बने दीपक पर्यावरण की वायु को शुद्ध करेंगे वहीं महिलाएं भी आत्मनिर्भर भारत का एक बेहतरीन उदाहरण पेश कर रही हैं.

त्योहार हमारा, लेकिन सामान चायनीज

चीन किस तरह मार्केट को पकड़ता है इसका अंदाजा आप इसी से लगा सकते हैं कि चीन जिन त्योहारों को मानता ही नहीं है वह उसे मनाने के लिए सामान बनाता है. होली चीन में नहीं खेली जाती लेकिन उसकी पिचकारी चीन से बनकर आती है. चीन दीपावली नहीं मनाता लेकिन हमारे घरों को रोशन करने वाली लाइटें चीन से बनकर आती हैं. लेकिन अब यह तस्वीर बदल रही है. भारत ने यह ठान लिया है कि जब पर्व भारतीय हैं तो उसकी कमाई कोई और क्यों ले जाए.

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कुछ इसी तर्ज पर जयपुर की सैकड़ों महिलाओं ने तय किया है कि इस बार दीपावली पर जलने वाले दीपक चायनीज नहीं बल्कि भारतीय होंगे, वह भी गाय के गोबर से बने हुए. जयपुर में पिंजरापोल गौशाला में यह अनोखी मुहिम शुरू हुई है. इस मुहिम से कोरोना के संकट काल में महिलाओं को रोजगार मिलेगा.

ऐसे बनाया जाएगा दीपक

दीपक बनाने के लिए पहले गाय के गोबर को इकट्ठा किया जाता है. उसके बाद उसे उसको गूंथा जाता है, इसके बाद गाय के गोबर के दीपक बनाए जाते हैं. दीपक बनने के बाद उन्हें सूखने के लिए छोड़ दिया जाता है. सूखने के बाद इन दीयों पर गेरुआ रंग चढ़ाया जाता है.

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प्रतिदिन 100 महिलाएं हजारों दीपक बना रही है. इन महिलाओं को प्रतिदन 350 रुपए मिल रहे हैं. महिलाओं का कहना है हम गाय के गोबर के दीपक बना रहे हैं ताकि दीवाली पर भारतीय संस्कृति की महक हो ना कि चायनीज आइटम की.

गुर्जर आरक्षण के मुद्दे पर राजस्थान सरकार को एक बार फिर भारी विरोध प्रदर्शनों का सामना करना पड़ सकता है. गुर्जर समुदाय की तरफ से शनिवार को मुख्यमंत्री अशोक गहलोत को अल्टीमेटम दिया गया कि अगर उनकी मांग पूरी नहीं हुईं तो 1 नवंबर से बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन (Gujjar Protest in Rajasthan) होंगे. कहा गया है कि राजस्थान को ‘बंद’ कर दिया जाएगा.

शनिवार को गुर्जर समुदाय की राजस्थान के भरतपर में महापंचायत हुई थी. यह महापंचायत गुर्जर नेता किराड़ी सिंह बैंसला (Kirori Singh Bainsla) ने बुलाई थी. इसमें हिम्मत सिंह भी शामिल थे, जो वैसे बैंसला से अलग हो चुके हैं. बैंसला ने कहा, ‘हम चाहते हैं कि सरकार 2011 से लेकर 2019 के बीच हमसे किए गए वादों को निभाए.’

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राजस्थान को बंद करने की धमकी

मीटिंग के बाद किराड़ी सिंह बैंसला के बेटे विजय बैंसला ने कहा कि फिलहाल कहीं फसल बोने तो कहीं काटने का काम जारी है. ऐसे में सरकार को नवंबर तक का वक्त दिया गया है. 1 नवंबर को फिर महापंचायत बुलाई गई है. पहले किए गए वादों को अगर पूरा नहीं किया जाता है तो राजस्थान को बंद कर देंगे.

राजस्थान सरकार से क्या हैं गुर्जर समुदाय की मांगें

समुदाय लंबे वक्त से अति पिछड़ा वर्ग (MBC) के तहत रिजर्वेशन मांग रहा है. इसके साथ फिलहाल राज्यों में जिन 15 चीजों की भर्ती चल रही है उसमें 5 प्रतिशत आरक्षण मांगा जा रहा है. इसके साथ-साथ पिछले प्रदर्शन के दौरान जिन लोगों की मौत हुई उनके परिवारजनों के लिए मदद, देवनारायण स्कीम को लागू करना आदि शामिल हैं.

राजस्थान (Rajasthan) में अब सियासी नियुक्तियों का पिटारा खुल रहा है. बुधवार को राज्य सरकार ने राजस्थान लोक सेवा आयोग (Rajasthan Public Service Commission) का अध्यक्ष के साथ-साथ अन्य सदस्यों की नियुक्ति की. इसमें सबसे चौंकाने वाला जो नाम सामने आया वो कवि कुमार विश्वास (Kumar Vishwas) की पत्नी का था. कुमार विश्वास की पत्नी मंजू शर्मा को राज्य सरकार ने राजस्थान लोक सेवा आयोग का सदस्य बनाने का फैसला लिया है.

कवि कुमार विश्वास कई बार सियासी तौर पर और कई बार कविता के जरिए कांग्रेस पार्टी व राहुल गांधी पर हमला बोल चुके हैं. दिसंबर 2019 में कुमार विश्वास ने राजस्थान के जयपुर में कवि सम्मलेन के दौरान राहुल गांधी पर हमला बोलते हुए कविता के माध्यम से कहा था कि… अधूरी जवानी का क्या फायदा, बिन कथानक कहानी का क्या फायदा, जिसमें धुलकर नजर भी ना पावन बनी, आंख में ऐसे पानी का क्या फायदा.

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ये प्रेम पर पक्तियां थीं. पहली पंक्ति राहुल गांधी पर थी कि इस अधूरी कहानी का क्या फायदा… मुझे कांग्रेसियों से बड़ी सहानुभूति है ना बहू मिल पा रही है और ना ही बहुमत. वहीं उन्होंने और सियासी दलों पर भी हमला बोला लेकिन राहुल गांधी के खिलाफ ये शब्द कई दिनों तक चर्चा का विषय बना रहा.

अजमेर से हैं कुमार विश्वास की पत्नी

कुमार विश्वास की पत्नी मंजू शर्मा राजस्थान के अजमेर की रहने वाली हैं. अजमेर के सिविल लाइंस की रहने वाली मंजू शर्मा 1994-95 में हिंदी की प्राध्यापक नियुक्त हुई थीं. राजस्थान में प्रोफेसर की नौकरी करने के दौरान उनकी मुलाकात कुमार विश्वास से हुई और कुछ समय बाद दोनों ने शादी कर ली.

कुमार विश्वास की सीएम गहलोत से नजदीकियां!

राजस्थान लोक सेवा आयोग में कुमार विश्वास की पत्नी की नियुक्ति के बाद से कई तरह की चर्चाएं हैं. ऐसा कहा जा रहा है कि कुमार विश्वास की अशोक गहलोत से नजदीकियां बढ़ रही हैं. 2019 के अंदर अशोक गहलोत सरकार के कला संस्कृति विभाग के कार्यक्रम में भी कुमार विश्वास को बुलाया गया था.

डॉक्टर भूपेंद्र सिंह बने अध्यक्ष

दरअसल, राजस्थान लोक सेवा आयोग में नियुक्तियां राजनीतिक होती हैं. इसीलिए इस तरह के कयास लगाए जा रहे हैं. वहीं पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) डॉक्टर भूपेंद्र सिंह को वीआरएस लेने के बाद राजस्थान लोकसभा आयोग का अध्यक्ष बनाया गया है.

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राजस्थान के पूर्व उपमुख्यमंत्री सचिन पायलट (Sachin Pilot) के मीडिया मैनेजर (Media Manager)  लोकेन्द्र सिंह ने राजस्थान हाई कोर्ट (Rajasthan HC) का रुख कर फोन टैपिंग मामले में उनके खिलाफ दर्ज एफआईआर (FIR) को रद्द करने की अपील की.

कोर्ट में पायलट की तरफ से केस लड़ रहे वकील एसएस होरा (Lawyer SS Hora) ने मीडिया से बातचीत में कहा कि कहा कि उन्होंने हाईकोर्ट से एफआईआर (FIR) रद्द करने की विनती की है. उन्होंने कहा कि लोकेंद्र सिंह ने कोई अपराध (Crime) नहीं किया है.

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फोन टैपिंग मामले में लोकेंद्र सिंह पर दर्ज FIR

यह मामला 1 अक्टूबर को सचिन पायलट के मीडिया मैनेजर लोकेंद्र सिंह और आजतक के जयपुर के संपादक शरत कुमार के खिलाफ राज्य पुलिस की एक एफआईआर से संबंधित है, जिसमें जैसलमेर के एक होटल में सीज किए गए विधायकों के फोन टैपिंग के मामले में भटकाने वाली और नकली खबर फैलाने का आरोप लगाया गया था.

वकील ने कहा कि एफआईआर में दावा किया गया है कि यह दो वर्गों के बीच दुश्मनी का मामला है. वकील ने सावल किया कि कौन सा वर्ग, क्या विधायक एक वर्ग हैं.  इसके साथ ही वकील होरा ने कहा कि सभी चैनलों पर केंद्रीय एजेंसियों के हवाले से एक ही न्यूज दिखाई गई और न्यूज चैनलों को अपने सोर्सेज का खुलासा करने की जरूरत भी नहीं पड़ी.

‘सभी चैनलों ने दिखाई एक सी खबर फिर अपराध कैसा’

वकील होरा ने कहा कि न्यूज 18 नेशनल और न्यूज 18 राजस्थान दोनों ने ही सुबह आठ बजे और दस बजे एक ही खबर को दो बार दिखाया, वहीं राजस्थान आजतक ने इसे करीब 3.30 बजे प्रसारित किया, जबकि मुकदमे में कहा गया है कि राजस्थान आजतक ने लोकेंद्र सिंह से प्राप्त इनपुट पर वह खबर दिखाई थी.

वकील ने पूछा कि जब एक ही खबर पहले से ही देशभर में दिखाई जा रही थी, तो इससे क्या नुकसान हुआ. उन्होंने कहा कि एफआईआर में राजनीतिक मकसद से दर्ज काई गई है, इसलिए इसे रद्द कर दिया जाना चाहिए.  मामला 14 अक्टूबर को उच्च न्यायालय के समक्ष सूचीबद्ध होने की उम्मीद जताई जा रही है, हालांकि आजतक संपादक शरत कुमार ने हाईकोर्ट का दरवाजा नहीं खटखटाया है.

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बतादें कि सचिन पायलट के मीडिया मैनेजर के खिलाफ आईटी एक्ट के तहत केस दर्ज कराया गया है. जयपुर पुलिस ने लोकेंद्र सिंह पर केस दर्ज किया है. यह पूरा मामला जैसलमेर के होटल में ठहरे विधायकों की फोन टैपिंग का है.

राजस्थान की अशोक गहलोत सरकार ने करौली में पुजारी की हत्या के मामले की जांच CBCID को सौंप दी है. मुख्यमंत्री कार्यालय (CMO) ने रविवार को इसकी जानकारी दी है. CMO ने कहा की मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने करौली में एक पुजारी की मौत की जांच सीबीसीआईडी पुलिस अधीक्षक विकास शर्मा को सौंप दी है.

दरअसल पुजारी बाबूलाल वैष्णव गुरुवार को मंदिर की जमीन पर अतिक्रमण करने से भूमाफियाओं को रोक रहे थे, इसी दौरान उन्हें जिंदा जला दिया गया था. वे करौली जिले के बुकना गांव के राधा गोपाल जी मंदिर में पुजारी थे.

कथित तौर पर लगभग 6 लोगों ने मंदिर के पुजारी पर पेट्रोल डालकर जला दिया था. इसके बाद पुजारी को स्थानीय अस्पताल ले जाया गया और फिर से वहां से जयपुर अस्पताल में रेफर कर दिया गया था, जहां उनकी मौत हो गई.

इसी के साथ अशोक गहलोत ने गोंडा में पुजारी की हत्या के मामले पर उत्तर प्रदेश की बीजेपी सरकार को घेरा. उन्होंने ट्वीट कर कहा, “राजस्थान में हमारे यहां घटना हो गई थी, जिसमें पुलिस ने तत्परता दिखाकर तुरंत मुख्य मुजरिम को गिरफ्तार भी कर लिया. यूपी सरकार को चाहिए कि वो भी गोंडा (उत्तर प्रदेश) में पुजारी को गोली मारे जाने की घटना में फौरन कार्रवाई करें.”

पीड़ित परिवार को 10 लाख रुपए की आर्थिक मदद

इससे पहले बाबूलाल वैष्णव के परिवार वालों ने 24 घंटे से ज्यादा समय तक विरोध के बाद शनिवार शाम पुजारी का अंतिम संस्कार कर दिया. अशोक गहलोत (Ashok Gahlot) सरकार ने पीड़ित परिवार को 10 लाख रुपए की आर्थिक मदद और एक सदस्य को सरकारी नौकरी देने की घोषणा की है, जिसके बाद पुजारी का अंतिम संस्कार किया गया. इसके साथ ही आरोपियों की मदद करने वाले दो अधिकारियों को निलंबित कर दिया गया है.

आश्वासन के बाद लिया शव

एक ब्राह्मण नेता सुरेश मिश्रा ने कहा कि पुलिस अधिकारियों की एक टीम ने जब उनकी मांगों को पूरा करने का आश्वासन दिया तब जाकर परिवार ने उनका शव लिया. बाद में ग्रामीणों ने धमकी दी कि जब तक परिवार की मांग पूरी नहीं हो जाती तब तक पुजारी का अंतिम संस्कार नहीं किया जाएगा, जिसके बाद इस घटना का संज्ञान लेते हुए राजस्थान के राज्यपाल कलराज मिश्र ने शनिवार को मुख्यमंत्री अशोक गहलोत से फोन पर बात की.

राजस्थान: जिंदा जलाए गए पुजारी के परिजनों का अंतिम संस्कार से इनकार, मनाने में जुटा पुलिस-प्रशासन

राजस्थान (Rajasthan) के करौली जिले में मंदिर के पुजारी की हत्या के मामले में 24 घंटे से ज्यादा समय तक विरोध के बाद शनिवार शाम पुजारी का अंतिम संस्कार कर दिया गया. अशोक गहलोत (Ashok Gahlot) सरकार ने पीड़ित परिवार को 10 लाख रुपए की आर्थिक मदद और एक सदस्य को सरकारी नौकरी देने की घोषणा की है, जिसके बाद पुजारी का अंतिम संस्कार किया गया. इसके साथ ही आरोपियों की मदद करने वाले दो अधिकारियों को निलंबित कर दिया गया है.

न्यूज एजेंसी आईएएनएस की खबर के मुताबिक पुजारी बाबूलाल वैष्णव गुरुवार को मंदिर की जमीन पर अतिक्रमण करने से भूमाफियाओं को रोक रहे थे, इसी दौरान उन्हें जिंदा जला दिया गया था. वे करौली जिले के बुकना गांव के राधा गोपाल जी मंदिर में पुजारी थे.

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कथित तौर पर लगभग 6 लोगों ने मंदिर के पुजारी पर पेट्रोल डालकर जला दिया था. इसके बाद पुजारी को स्थानीय अस्पताल ले जाया गया और फिर से वहां से जयपुर अस्पताल में रेफर कर दिया गया था, जहां उनकी मौत हो गई.

कई ब्राह्मण संगठनों ने शुक्रवार को अस्पताल के सामने प्रदर्शन कर स्थानीय पुलिस थाना प्रभारी के खिलाफ कार्रवाई करने और मामले को दूसरे सर्कल कार्यालय में ट्रांसफर करने की मांग की थी. साथ ही पुजारी के परिवार को आर्थिक मदद देने और एक परिजन को सरकारी नौकरी देने की मांग भी की थी.

आश्वासन के बाद लिया शव

एक ब्राह्मण नेता सुरेश मिश्रा ने कहा कि पुलिस अधिकारियों की एक टीम ने जब उनकी मांगों को पूरा करने का आश्वासन दिया तब जाकर परिवार ने उनका शव लिया. बाद में ग्रामीणों ने धमकी दी कि जब तक परिवार की मांग पूरी नहीं हो जाती तब तक पुजारी का अंतिम संस्कार नहीं किया जाएगा, जिसके बाद इस घटना का संज्ञान लेते हुए राजस्थान के राज्यपाल कलराज मिश्र ने शनिवार को मुख्यमंत्री अशोक गहलोत से फोन पर बात की.

मुख्यमंत्री ने कहा है कि राज्य सरकार ने मामले का संज्ञान लिया है और पुलिस पूरी जांच कर रही है और आरोपियों को नहीं बख्शा जाएगा. इसी बीच शनिवार को बीजेपी ने अलका गुर्जर, सांसद रामचरण बोहरा और भाजयुमो के पूर्व नेता जितेंद्र मीणा की तीन सदस्यीय टीम को जांच के लिए गांव भेजा.

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राजस्थान (Rajasthan) के करौली जिले में भूमि विवाद को लेकर पुजारी को जिंदा जलाए जाने पर गांववालों का गुस्सा फूट पड़ा है. ग्रामीणों लोगों ने पुजारी का अंतिम संस्कार करने से इनकार कर दिया है. परिजनों का कहना है कि जब तक इस मामले में शामिल सभी आरोपियों की गिरफ्तारी नहीं हो जाती तब तक वो शव का अंतिम संस्कार नहीं करेंगे. पुलिस प्रशासन ने परिजनों को कई बार समझाने का प्रयास किया, मगर परिजन अपनी मांग पर अड़े हुए हैं.

परिजनों ने राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत (Ashok Gahlot) के सामने कुछ मांगे रखी हैं, उनका कहना है कि जब तक मांगे पूरी नहीं की जाएंगी तब तक वो पुजारी के शव का अंतिम संस्कार नहीं करेंगे. मृतक पुजारी बाबूलाल के एक रिश्तेदार ने सरकार से 50 लाख रुपये मुआवजे की मांग करते हुए कहा कि ‘हम चाहते हैं कि 50 लाख मुआवजा और परिवार के एक सदस्य को सरकारी नौकरी दी जाए और सभी आरोपियों को गिरफ्तार कर उनका समर्थन करने वाले पटवारी और पुलिसकर्मियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए’

मालूम हो कि करौली जिले के सपोटरा इलाके में एक मंदिर के पुजारी बाबू लाल वैष्णव पर पांच लोगों ने हमला किया था, आरोप है कि मंदिर के पास की खेती की जमीन पर कब्जा करने की कोशिश कर रहे इन लोगों ने पुजारी पर पेट्रोल डालकर आग लगा दी.

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गहलोत ने घटना को दुर्भाग्यपूर्ण बताया

पुलिस के मुताबिक, वो और उनका परिवार गांव के राधा कृष्ण मंदिर की देखरेख करते थे और मंदिर के नाम पर दान की गई भूमि का इस्तेमाल पुजारी द्वारा खेती के लिए किया जा रहा था. गुरुवार को सुबह करीब 10 बजे आरोपी कैलाश कुछ लोगों के साथ आया और जमीन पर टिन शेड लगाने लगा. जब पुजारी द्वारा इसका विरोध किया गया, तो उन्होंने उस पर पेट्रोल डालकर आग लगा दी.

गहलोत ने इस घटना को दुर्भाग्यपूर्ण बताया और ट्वीट करते हुए लिखा, ‘यह अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण एवं निंदनीय है, सभ्य समाज में ऐसी करतूत का कोई स्थान नहीं है, प्रदेश सरकार इस दुखद समय में शोकाकुल परिजनों के साथ है’.

बता दें कि मुख्य आरोपी को गिरफ्तार कर लिया गया है, लेकिन इस मामले में अन्य आरोपियों को पकड़ने के लिए उनकी तलाश की जा रही है. अपराध की गंभीरता को देखते हुए, एसपी ने अपराधियों का पता लगाने के लिए जांच टीम का गठन किया है.

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राजस्थान में पुजारी की मौत के बाद से ब्राह्मण समाज में घटना को लेकर काफी नाराजगी है. उधर छात्र संगठनों और बीजेपी कार्यकर्ताओं ने भी कलेक्टर एसपी को ज्ञापन सौंपकर हत्यारोपियों की गिरफ्तारी की मांग की है. दरअसल करौली जिले के सपोटरा इलाके में एक पुजारी को कुछ लोगों ने बुधवार को पेट्रोल डालकर जिंदा जला दिया था, जिसके बाद जयपुर के SMS अस्पताल में इलाज के दौरान गुरुवार को पुजारी की मौत हो गई.

इस घटना पर युवाओं ने सवाल उठाए हैं कि अगर किसी दलित की मौत होती तो राजनीतिक रोटियां सेकने कई संगठन और राजनीतिक दल धरना प्रदर्शन और घड़ियाली आंसू बहाने पहुंच जाते, लेकिन ब्राह्मण होना इस देश में अपराध है, जिसके चलते अभी तक परिवार को किसी प्रकार की सुरक्षा भी नहीं दिलाई गई है. परिवार के लोग अब भी दहशत में हैं.

वही गांव में कोई भी इस घटना पर कुछ बोलने को तैयार नहीं है. इस दौरान युवाओं ने सवाल उठाया कि पुलिस प्रशासन की सांठगांठ के चलते सिवायचक, गौचर, सरकारी भूमि और मंदिर की जमीनों पर भू-माफियाओं ने कब्जा कर रखा है. विरोध करने पर आए दिन मारपीट-दादागिरी करते हैं.

क्या था मामला?

बूकना गांव में बुधवार सुबह मंदिर की भूमि को लेकर दो पक्षों में हुए विवाद के दौरान आग से गंभीर रुप से झुलसे मंदिर पुजारी ने गुरुवार शाम जयपुर में उपचार के दौरान दम तोड़ दिया. इससे पहले पुजारी बाबूलाल ने पुलिस को दिए बयान में बताया था कि मंदिर भूमि पर कब्जा रोकने पर भू-माफियाओं ने उस पर पेट्रोल डालकर आग लगा दी. पुजारी के इस बयान के बाद गुरुवार को सपोटरा थाने में प्राथमिकी दर्ज हुई. मामले में पुलिस ने मुख्य आरोपी कैलाश मीणा और उसके बेटे को गिरफ्तार कर लिया है.

वारदात में सपोटरा पुलिस पर लापरवाही के भी आरोप लग रहे हैं. इधर पुलिस ने मामला दर्ज होने के बाद आरोपियों की तलाश शुरू कर दी है. मामले में एसपी मृदुल कच्छावा ने 6 टीमें गठित कर आरोपियों की तलाश शुरू की, जिसके बाद पुलिस ने मुख्य आरोपी कैलाश मीणा को गिरफ्तार कर लिया है.

बताया जा रहा है कि मंदिर भूमि पर कुछ लोग कब्जा कर रहे थे. इसको लेकर काफी समय से विवाद की स्थिति बनी हुई थी. गांव वालों की इस मामले में पंचायत भी हुई, जिसमें पंच पटेलों ने मंदिर भूमि पर कब्जा करने वालों से अतिक्रमण नहीं करने और कब्जा हटाने को कहा था, लेकिन उन्होंने पंच पटेलों की बात नहीं मानी. वे इस भूमि पर छप्पर डालकर कब्जा पुख्ता कर रहे थे. इस पर पुजारी ने रोका, तो आरोप है कि उन्होंने पुजारी पर पेट्रोल छिड़क कर आग लगा दी. घटना में पुलिस पर देर से FIR दर्ज करने और कार्रवाई में ढिलाई के आरोप लगे हैं.

पुजारी के परिवार की पांच मांगों पर सरकार की सहमति

वहीं पुजारी की मौत के बाद कई संगठनों के लोगों ने SMS अस्पताल की मोर्चरी के बाहर प्रदर्शन किया. हालांकि, मृतक पुजारी के परिवार की पांच मांगों पर सरकार से सहमति बन गई है.

घटना के बाद बीजेपी नेताओं ने ट्वीट करके सरकार पर सियासी आरोप लगाए हैं. बीजेपी के प्रदेशाध्यक्ष सतीश पूनिया ने ट्विटर पर लिखा- प्रदेश में हर तरह के अपराधों की घटनाएं बढ़ती जा रही है. सपोटरा में मंदिर के पुजारी को जिंदा जलाने की घटना यह दर्शाती है कि अपराधियों में कानून का भय समाप्त हो चुका है. प्रदेश की जनता भयभीत है, डरी हुई है, सहमी हुई है, आखिर गहलोत जी आप कब तक अपराधियों के मसीहा बनकर रहोगे?? इसके बाद केंद्रीय मंत्री प्रकाश जावड़ेकर ने भी इस मामले पर सवाल उठाया और अशोक गहलोत सरकार को घेरने की कोशिश की.

असल में सवाल तो राजस्थान सरकार की कानून व्यवस्था पर उठता ही है. आखिर क्यों सरकार अब तक मौन है?? अब तक मुख्यमंत्री अशोक गहलोत व उनके मंत्री ट्वीट करने तक ही सीमित क्यों है? अब तक कोई नेता उस पुजारी के परिवार से नहीं क्यों मिला?? सवाल ये भी क्या कांग्रेस का कोई दिल्ली का नेता अब जायेगा करौली??

पुलिस पर उठते सवाल

पुजारी को जला कर मारने की घटना में पुलिस पर समय रहते कार्रवाई नहीं करने के आरोप लगे हैं. जब इतने लंबे समय से विवाद चल रहा था, तो पुलिस कहां सो रही थी? समय रहते पुलिस ने कार्रवाई क्यों नहीं की? पंच पटेलों की तरफ से मामले को हल करने के प्रयास में नहीं दिखी पुलिस की भूमिका. घटना के बाद देरी से FIR हुई दर्ज. इतना ही नहीं पुलिस पर दबंगों को सहयोग करने के भी आरोप लग रहे हैं.

राजस्थान: जमीन विवाद को लेकर पेट्रोल डालकर पुजारी को जिंदा जलाया, मुख्य आरोपी गिरफ्तार

राजस्थान (Rajasthan) में मंदिर की जमीन को लेकर चल रहे विवाद में एक पुजारी (Priest) की जलाकर हत्या मामले में सीएम अशोक गहलोत ट्वीट कर दुख जाहिर किया.उन्होंने  इस घटना को दुर्भाग्यपूर्ण बताया, उन्होंने कहा कि सभ्य समाज में इस तरह की घटनाओं की कोई जगह नहीं है. दोषियों को बख्शा नहीं जाएगा.

घटना करौली जिले के सपोटरा के बुकना गांव की है. बताया जा रहा है कि मंदिर की जमीन (Temple’s Land) को लेकर दो पक्षों में विवाद चल रहा था, जिसे लेकर गुरुवार को मंदिर के 50 साल के पुजारी को पेट्रोल छिड़ककर जला (Burn) दिया गया. वहीं पुजारी के एक रिश्तेदार का कहना है कि आरोपियों का पूरा परिवार इस हत्या में शामिल है,सभी को जल्द गिरफ्तार किया जाना चाहिए, पुजारी की हत्या के बाद पूरे ब्राह्मण समाज में गुस्से का माहौल है.

 

पचास फीसदी जली हुई हालत में पुजारी को सवाई मानसिंह अस्पताल (SMS Hospital) में भर्ती कराया गया, जहां इलाज के दौरान उनकी मौत (Death)हो गई. खबर के मुताबिक छह लोगों ने पुजारी पर हमला किया था.

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जमीन हड़पने के लालच में पुजारी को जिंदा जलाया

बताया जा रहा है कि पुजारी भू-माफियाओं से मंदिर से संबंधित जमीन वापस लेने की कोशिश कर रहे थे, उसी दौरान उन पर हमला किया गया. खबर के मुताबिक मंदिर के अधिकारियों ने जमीन का कुछ हिस्सा पुजारी को गिफ्ट में दिया गया था, उस जमीन पर वह एक घर बना रहे थे, लेकिन भू-माफिया उस जमीन पर कब्जा करना चाहते थे, जिसकी वजह से पेट्रोल डालकर उसे आग के हवाले कर दिया गया. इस मामले में पुलिस ने मुख्य आरोपी कैलाश मीमा को गिरफ्तार किया है.

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पुजारी की हत्या का मुख्य आरोपी गिरफ्तार

करौली के एसपी मृदुल कच्छवा ने बताया कि पुजारी बाबूलाल ने पुलिस को दिए बयान में कहा था कि कैलाश मीणा और उसके बेटों समेत कुछ लोग मंदिर की जमीन पर अवैध कब्जा करना चाहते थे, विवाद के दौरान आरोपियों ने बाड़े को आग लगा दी, जिसमें वह गंभीर रूप से जल गए. उनके बयान के बाद ही कैलाश मीणा को गिरफ्तार किया गया है. पुलिस का कहना है कि पुलिस की छह टीमें इस मामले में लगी हुई हैं, बचे हुए आरोपियों को भी जल्द गिरफ्तार किया जाएगा.

राजस्थान सरकार (Rajasthan Government) ने राज्य के अधिकारियों को सांसदों और विधायकों (MPs and MLAs) के सम्मान (Respect) को लेकर दिशानिर्देश जारी किया है. इसमें कहा गया कि सांसदों और विधायकों के दौरे के समय अधिकारियों (Officials) को उनके सम्मान में खड़ा होना चाहिए. साथ ही सांसद-विधायक जब वापस लौट रहे हों, उस समय भी इस तरह का सम्मान दिखाया जाना चाहिए.

दरअसल, जनता के प्रतिनिधियों की ओर से उठाए गए मुद्दों और भेजे गए पत्रों पर तत्काल कार्रवाई करने को लेकर राज्य सरकार ने सभी अधिकारियों को दिशानिर्देश जारी किए हैं. सांसदों और विधायकों के सम्मान में खड़े होने का निर्देश इसी का हिस्सा है.

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सर्कुलर पर मुख्य सचिव के हस्ताक्षर

राज्य के प्रशासनिक सुधार विभाग की ओर से 23 सितंबर को जारी सर्कुलर में ये निर्देश दिए गए हैं. इस सर्कुलर पर मुख्य सचिव राजीव स्वरुप के हस्ताक्षर हैं.

‘अधिकारियों को होना चाहिए विनम्र’

सर्कुलर में कहा गया है कि ‘जब कभी सांसद या विधायक सार्वजनिक कल्याण के लिए पत्र लिखें या सरकारी विभाग से संपर्क करें, ऐसे में उन्हें विनम्रतापूर्वक और सम्मान के साथ व्यवहार करना चाहिए. अधिकारियों को सही और विनम्र होना चाहिए. जब भी सांसद-विधायक उनसे मिलने के लिए आएं तो उन्हें उनके सम्मान में खड़े हो जाना चाहिए. साथ ही जनप्रतिनिधियों द्वारा सूचित समस्याओं/समाधानों पर त्वरित कार्रवाई होनी चाहिए.’

इस सर्कुलर की प्रतियां राज्य के सभी विभाग प्रमुखों, जिला कलेक्टर्स, संभागीय आयुक्तों, जिला एसपी और अन्य अधिकारियों और विभागों को भेजी गई हैं.

‘पत्र मिलने की दी जाए सूचना’

सर्कुलर में यह भी कहा गया है कि सांसदों और विधायकों द्वारा भेजे गए पत्र के मिलने के सूचना दी जानी चाहिए. साथ ही जनप्रतिनिधियों की ओर से पत्र पर जो मुद्दे उठाए गए हैं, उन हुई कार्रवाई का अपडेट भी सौंपना होगा.

राजस्थान सरकार ने मीडिया पर लगाई पाबंदी! नेता उड़ा रहे कोरोना गाइडलाइन का मजाक

राजस्थान के बाड़मेर से एक नाबालिग लड़की के साथ रेप की खबर सामने आई है. बताया जा रहा है कि मंगलवार को पंचायती राज चुनाव के तीसरे चरण का मतदान चल रहा था. शिव थानातंर्गत गांव में लड़की के परिवारजन मतदान करने गए हुए थे, इस दौरान दो लड़कों ने नाबालिग लड़की का घर से अपहरण कर लिया. एक लड़के ने रेप किया तो दूसरे ने वीडियो बना लिया.

लड़की के परिजनों ने पुलिस में घटना की शिकायत की है जिसके बाद पुलिस ने केस की जांच शुरू कर दी है. परिवारजन लड़की को ज़िला राजकीय अस्पताल ले आए जहां उसका इलाज चल रहा है. पुलिस ने परिजनों की रिपोर्ट पर अज्ञात लोगों के खिलाफ पॉक्सो और आईटी एक्ट में मामला दर्ज कर आरोपियों को तलाश शुरू कर दी है.

अज्ञात लोगों के खिलाफ मामला दर्ज

ज़िला पुलिस अधीक्षक आनंद शर्मा के मुताबिक रेप करने वाले लड़कों को नाबालिग लड़की पहचानती नहीं थी और इस वजह से अज्ञात लोगों के खिलाफ मामला दर्ज किया गया है. अलग-अलग टीमें बनाकर आरोपियों की तलाश शुरू कर दी है.

नाबालिग हॉस्पिटल में भर्ती

परिजनों ने भियाड़ चौकी में गुमशुदगी की रिपोर्ट देने के बाद परिजनों और पुलिस ने तलाश शुरू की तब नाबालिग स्कूल के पास अचेत अवस्था मे मिली. लड़की को ज़िला मुख्यालय राजकीय हॉस्पिटल में देर रात भर्ती करवाया गया. जहां उसका इलाज चल रहा है.

कलेक्टर और एसपी पहुंचे हॉस्पिटल

बुधवार सुबह ज़िला कलेक्टर विश्राम मीणा पुलिस और पुलिस अधीक्षक आनंद शर्मा हॉस्पिटल पहुंचे. नाबालिग और उसके परिजनों से मुलाकात की और पूरी घटना की जानकारी ली. बता दें कि घटना के 24 घंटे बाद भी आरोपी पुलिस की पकड़ से बाहर हैं. परिवारजन पुलिस से मांग कर रहे कि हमे न्याय दिलाएं और आरोपी को जल्द गिरफ्तार करें.

इस मामले पर राजस्थान की पूर्व सीएम वसुंधरा राजे ने ट्वीट कर लिखा-

राजस्थान की सियासत में एक बार फिर हंगामा हो सकता है. दरअसल राजस्थान में हॉर्स ट्रे​डिंग के मामले के दौरान फोन टैपिंग का मुद्दा एक बार फिर उछला है. फिर से अशोक गहलोत ने सचिन पायलट के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है. इस बार गहलोत गुट ने पायलट समर्थक विधायकों को छोड़कर पायलट के मीडिया मैनेजर के साथ-साथ एक पत्रकार पर आईटी एक्ट के तहत मामला दर्ज करवाया है.

पूर्व उपमुख्यमंत्री सचिन पायलट और मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के बीच जब अदावत चल रही थी, तब दोनों की गुटों की ओर से खबरें दी जा रही थी. इस मामले में सचिन पायलट कैंप की तरफ से जैसलमेर के होटल में विधायकों के फोन टैपिंग के जो आरोप लगाए गए थे उसे लेकर सचिन पायलट के मीडिया मैनेजर लोकेंद्र सिंह पर जयपुर पुलिस साइबर थाना पुलिस ने मुकदमा दर्ज किया है.

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दरअसल मामला 7 अगस्त का है और मामला अब 1 अक्टूबर को जाकर दर्ज हुआ है. सियासी गलियारों में इस बात की चर्चा है कि क्या अशोक गहलोत फिर पायलट के खिलाफ मोर्च खोलने वाले हैं.

पायलट की इजाजत के बिना घर में घुसी टीम

इतना ही नहीं जयपुर पुलिस की साइबर थाने की टीम बिना पायलट की इजाजत लेकर उनके निवास में घुसकर उनके मीडिया मैनेजर का बयान लिया और उसके बाद मुकदमा दर्ज लिया. साइबर थाने के एसएचओ सुरेंद्र पंचोली का बिना पायलट से बात किए उनके निवास पर जाकर बयान लेना इतना भी आम नहीं है, क्योंकि पायलट कांग्रेस के वरिष्ठ नेता हैं ओर पूर्व उपमुख्यंत्री रहे हैं. जाहिर सी बात है एसएचओ पर ऊपर से कोई दबाव होगा.

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मामला एक पुलिस कंट्रोल रूम में तैनात ड्यूटी अफसर ने दर्ज करवाया है. एफआईआर में लिखा है कि अफसर 6 अगस्त को कंट्रोल रूम में डयूटी कर रहा था. ऐसे में राजस्थान सरकार के ऊपर पुलिस के टेलीफोन टेपिंग करने के आरोप सुनकर उसे इतना बुरा लगा कि उसने साइबर थाने में जाकर मुकदमा दर्ज करा दिया. वहीं साइबर थाने ने सचिन पायलट के स्टाफ व खबर चलाने वाले पत्रकार शरत कुमार को दोषी मानते हुए विधायकपुरी थाने में मुकदमा दर्ज करा दिया.

बता दें कि सचिन पायलट पर स्पेशल एसओजी ने मुकदमा दर्ज किया था, जिसके अन्दर सचिन पायलट को देशद्रोह के मुकदमे के तहत नोटिस दिया था. जिसके बाद नाराज होकर पायलट ने बगावत कर दी थी. वही बाद में पायलट और गहलोत की सुलह के बाद पूरा मामला खत्म हो गया था.

विशेष अदालत ने मंगलवार को राजस्थान के अलवर में पिछले साल 19 वर्षीय दलित महिला से बलात्कार के लिए पांच में से चार लोगों को आजीवन कारावास की सजा सुनाई है. अदालत ने कहा कि पांचवे शख्स ने सोशल मीडिया पर अपराध का वीडियो डाला उसे पांच साल जेल में बिताने होंगे.

अनुसूचित जाति और जनजाति अधिनियम के तहत मामलों की सुनवाई करते हुए विशेष अदालत ने ये फैसला सुनाया. अलवर के थानागाजी में 26 अप्रैल 2019 को पति के सामने पांच पुरुषों ने एक महिला का बलात्कार किया था. FIR दर्ज करने में देरी और गैंगरेप के कथित वीडियो को सोशल मीडिया पर प्रसारित करने पर कार्रवाई नहीं करने के मामले में विपक्ष हमलावर हुआ.

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FIR के 16 दिन बाद दर्ज हुई चार्जशीट

पुलिस ने एफआईआर के 16 दिन बाद 18 मई को आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की थी. प्राथमिकी के अनुसार, चार पुरुषों और एक किशोर ने महिला के साथ बलात्कार किया जबकि एक अन्य व्यक्ति ने पूरी घटना को फिल्माया. सोशल मीडिया पर वीडियो नहीं डालने को लेकर महिला से 10 हज़ार रुपए की मांग भी की जा रही थी.

आईपीसी की कई धाराओं में दर्ज हुआ केस

छोटे लाल (22), हंसराज गुर्जर (20), अशोक कुमार गुर्जर (20) और इंद्राज सिंह गुर्जर (22) पर भारतीय दंड संहिता की कई धाराओं में मामला दर्ज किया गया. पुलिस ने SC/ST एक्ट की विभिन्न धाराओं और आईटी एक्ट को भी एफआईआर में शामिल किया. जांच के दौरान, राज्य सरकार ने तत्कालीन पुलिस अधीक्षक राजीव पचार को हटा दिया और थानागाजी एसएचओ सरदार सिंह को कथित ढिलाई के लिए निलंबित कर दिया

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राजस्थान में बढ़ते रेप के मामलों (Rape Cases in Rajasthan) के खिलाफ भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने आज प्रदर्शन किया. इस दौरान पुलिस और भाजपा कार्यकर्ताओं में भिड़ंत हो गई. पुलिस ने भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष सतीश पुनिया को हिरासत में ले लिया. यूपी के बाद अब राजस्थान में बढ़ते बलात्कार के मामलों पर विपक्ष हमलावर हो गया है.

उत्तर प्रदेश (Uttar Pradesh) के हाथरस गैंगरेप के मामले को लेकर कांग्रेस ने भारी विरोध किया था, जिसके बाद पुलिस और कांग्रेस पार्टी के कार्यकर्ता आमने-सामने हो गये थे. अब राजस्थान में भाजपा कार्यकर्ता सड़कों पर उतरे हैं. विरोध के दौरान माहौल गर्म हो गया और धक्का-मुक्की की नौबत आ गई.

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राजस्थान की राजधानी जयपुर की सड़कों पर सोमवार को बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष सतीश पूनिया की अगुवाई में सैकड़ों कार्यकर्ता प्रदर्शन कर रहे थे. बीजेपी की एक टीम ने बारां पहुंचकर पीड़िता के परिवार से मुलाकात भी की. गिरफ्तार किए गए सतीश पूनिया को पुलिस अशोक नगर थाने लेकर चली गयी.

सतीश पूनिया ने कहा कि महिलाओं के खिलाफ अत्याचार के मामले में देश में अगला नंबर राजस्थान का है, लिहाज विपक्ष का विरोध करना, सड़को पर उतरना जरूरी था. वहीं जिस तरह प्रदर्शन किया गया उसको लेकर अब सोशल मीडिया पर लोग सवाल उठा रहे है. लोगों का कहना है कि विरोध के दौरान भाजपा कार्यकर्ताओं ने सोशल डिस्टेंसिंग के नियमों का मज़ाक उड़ाया. राजस्थान सरकार ने राज्य में बढ़ते कोविड मामलों के चलते जयपुर समेत प्रदेश के 10 अन्य जिलों में धारा 144 लगा रखी है.

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राजस्थान के डूंगरपुर हिंसा (Dungur Pur Violence) मामले में पुलिस ने रविवार तक करीब 100 से ज्यादा लोगों (Over Hundred People) को गिरफ्तार किया है. पुलिस ने हिंसा के मामले में 26 सितंबर को 759 लोगों के खिलाफ एफआईआर (FIR) दर्ज की थी, यह एफआईआर (FIR) बिछीवाड़ा पुलिस स्टेशन में दर्ज की गई थी.

पुलिस ने कहा कि उन्होंने डूंगरपुर हिंसा (Dungur Pur Violence) के आरोपियों की पहचान के लिए सोशल मीडिया (Social Media) पर वायरल वीडियो और मीडिया द्वारा दिखाए गए फुटेजों (Footage) की मदद ली, जिसके बाद करीब 100 से ज्यादा लोगों को गिरफ्तार किया गया है.

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बतादें कि हिंसक प्रदर्शन के दौरान प्रदर्शनकारियों ने कई इमारतों को भी नुकसान पहुंचाया था. इस हिंसक झड़प में 2 लोगों की मौत हुई थी. पुलिस ने कहा था कि स्थिति से निपटने के लिए इलाके में रैपिड फोर्स (Rapid Force) की दो टीमों को तैनात किया गया. सरकार ने स्थिति पर नियंत्रण पाने के लिए जिले भर में इंटरनेट सेवाओं को बंद कर दिया था.

इससे पहले हिंसक विरोध प्रदर्शन मामले में 55 लोगों को गिरफ्तार किया गया था. पुलिस ने कहा था कि बाकी आरोपियों को पकड़ने के लिए छापेमारी की जा रही हैं. डूंगरपुर के एसपी जय यादव ने बताया था कि राजस्थान के डूंगरपुर में हिंसा (Protest) के मामले में सदर और बिछीवाड़ा पुलिस थानों में 35 मामले दर्ज किए गए थे, उस दौरान 55 लोगों को गिरफ्तार किया गया था, और अब करीब 100 आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया गया है.

आदिवासी समुदायों के प्रदर्शनकारियों ने डूंगरपुर के पास राष्ट्रीय राजमार्ग 8 को जाम कर प्रदर्शन किया. प्रदर्शन के दौरान पुलिसकर्मियों पर पथराव किया गया. प्रदर्शनकारियों की मांग थी कि शिक्षकों भर्ती में सामन्य क्षेणी के लिए आरक्षित 1167  रिक्त पदों पर उनके समुदाय के लोगों की भर्ती हो. योग्य उम्मीदवारों की कमी के कारण 2018 से ये भर्ती खाली पड़ी है.

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इस मामले में आदिवासी प्रदर्शनकारियों ने राजस्थान के मंत्री अर्जुन सिंह बामनिया, एमएलए दयाराम परमार और दूसरे नेताओं से मुलाकात की थी, इस दौरान उन्होंने आरक्षित सीटों पर उनके समुदाय के लोगों की भर्ती की मांग की थी.

 

देशभर में महिलाओं और बच्चियों के साथ रेप (Rape) के मामले थमने का नाम नहीं ले रहे हैं. अब राजस्थान के हनुमानगढ़ (Hanuman Garh) में एक नाबालिग के साथ गैंगरेप (Gang Rape) की खबर सामने आई है. हनुमानगढ़ जिले के पीलीबंगा थाना इलाके में तीन लोगों ने नाबालिग (Minor Girl) के साथ गैंगरेप किया. पीड़िता की मां ने तीनों आरोपियों के खिलाफ थाने में शिकायत दर्ज कराई है.

नाबालिग के साथ गैंगरेप मामले में गुरप्रीत सिंह, बग्गु सिंह, रणजीत सिंह के खिलाफ मामला दर्ज किया गया है. तीनों आरोपी (Three Accused) फिलहाल फरार हैं. पुलिस ने पीड़ित परिवार को तीनों आरोपियों के खिलाफ मामले की जांच और जल्द गिरफ्तारी का भरोसा दिया है.

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गैंगरेप के आरोपियों पर कई धाराओं में केस दर्ज

रावतसर के पुलिस उप अधीक्षक रणवीर सिंह मीणा ने कहा कि धारा 341, 342, 354(क), 376डी और 5एल/6 पोस्को एक्ट के तहत तीनों आरोपियों के खिलाफ मामला दर्ज किया गया है, और उनकी तलाश की जा रही है. पुलिस के मुताबिक नाबालिग 1 जुलाई से लापता थी. सात अगस्त को उसने पुलिस स्टेशन में आकर गैंगरेप की शिकायत दर्ज कराई, पुलिस पूरे मामले की जांच कर रही है. अब तक आरोपियों को गिरफ्तार नहीं किया गया है.

इन दिनों बेटियों से अत्याचार को लेकर पूरा देश आक्रोशित है. हालही में उत्तर प्रदेश के हाथरस में एक 19 साल की दलित लड़की के साथ गैंगरेप किया गया, जिसके बाद पीड़िता की अस्पताल में इलाज के दौरान ही मौत हो गई, वहीं यूपी के बलरामपुर में एक 22 साल की लड़की की भी गैंगरेप के बाद मौत हो गई. उत्तर प्रदेश में गैंगरेप की इन घटनाओं ने पूरे देश को हिलाकर रख दिया है.

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यूपी के साथ एमपी और राजस्थान से भी गैंगरेप की घटनाएं सामने आ रही हैं. हालही में राजस्थान के बारां में दो लड़कियों के साथ गैंगरेप का मामला सामने आया था, जिसमें सीएम गहलोत ने बचाव करते हुए कहा था कि लड़कियों से गैंगरेप नहीं हुआ था, वह अपनी मर्जी से लड़कों के साथ गई थीं, ऐसा बयान खुद लड़कियों ने मजिस्ट्रेट के सामने दिया था. हालांकि पीड़ित परिवार ने कहा था कि उन्हें धमकाया जा रहा है.

इस समय बेटियों की सुरक्षा को लेकर पूरा देश सवाल उठा रहा है. यूपी की घटनाओं के बाद पुलिस प्रशासन के साथ ही योगी सरकार भी विपक्ष के निशाने पर है. विपक्ष लगातार इस मुद्दे पर राजनीति कर रहा है.

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत (Mohan Bhagwat) चार दिन के दौरे पर राजस्थान पहुंचे हैं. शनिवार को संघ प्रमुख भागवत ने जयपुर स्थित सेवा सदन में जयपुर प्रांत की टोली से कई मुद्दों पर चर्चा की. भागवत ने कोरोना काल में संघ के स्वंयसेवकों द्वारा किए गए सेवा कार्यों, शिक्षा और स्वरोजगार के कामों पर चर्चा के दौरान कहा कि सामाजिक सद्भाव बैठक होनी चाहिए, जिससे हमारे समाज को रूढ़ियों और कुरीतियों से मुक्ति मिल सके. साथ ही देश के सामने जो समस्या है, उनका समाधान सामाजिक स्तर पर निकाला जा सके.

RSS के जयपुर प्रांत संपर्क प्रमुख हेमंत सेठिया ने बताया कि संघ के सरसंघचालक दो दिन के दौरे पर जयपुर आए हुए हैं. राजस्थान में सरसंघचालक चार दिन के प्रवास पर हैं. जयपुर में दो स्तर की बैठक हुई. तीसरे स्तर में खुली चर्चा हुई. आज प्रांत स्तर के लोगों के साथ सरसंघचालक ने दो स्तर की बैठक की. बैठक के अंदर कई विषयों पर चर्चा हुई, जैसे कि कोरोना काल में स्वंयसेवको ने कौन-कौन से सेवा कार्य अब तक किए और आने वाले समय में किस-किस तरह की समस्या आ सकती है.

हेमंत सेठिया ने कहा कि आने वाले समय में कोरोना के समय प्रमुख रूप से जो ​दो ​तीन तरह की समस्या आएंगी उसमें किस तरह से स्वयंसेवकों को जुटना चाहिए उसके उपर विचार हुआ. संघ की दैनिक शाखा और दैनिक बैठकों को स्थानीय स्तर पर सरकार के सारे निर्देर्शों का पालन करते हुए किस तरह से पहले की तरह शुरू करना चाहिए इस पर भी चर्चा हुई है.

​शिक्षा के क्षेत्र में संवाद के जरिए निकाला जाए समाधान

संघ प्रमुख मोहन भागवत ने कहा कि आज जरूरत है कि शिक्षा के क्षेत्र में संवाद के जरिए समाधान निकाला जाए. स्कूल मैनेजमेंट, शिक्षकों, अभिभावकों और दानदाताओं चारों से बातचीत करके समाधान निकालना चाहिए. दरअसल बैठक के अंदर चर्चा हुई कि कोरोना के कारण शैक्षिक संस्थान बंद होने से निजी स्कूलों के शिक्षकों को आर्थिक परिस्थितियों से जूझना पड़ रहा है. इस पर जिला स्तर पर समिति बनाकर चर्चा करके समाधान निकलने की बात हुई.

“संघ और समाज का एक दिशा में चलने का नजरिया बने”

संघ प्रमुख मोहन भागवत ने चर्चा के अन्दर कहा कि संघ ने जितना बड़ा सेवा कार्य कोरोना की परिस्थिति में किया है. उसी तरह के सेवा कार्यों को अब जिले स्तर और खंड स्तर पर किया जाना चाहिए. इसमें शिक्षा व्यवस्था स्वरोजगार, लोगों की समस्याएं सुनकर उसके उपायों की योजना पर विचार होना चाहिए. ताकि संघ व समाज का एक दिशा में चलने वाला नजरिया बने. इतना ही नहीं स्वरोजगार विषय पर चर्चा करते हुए भागवत ने कहा कुल कितने लोगों को आजीविका चाहिए? कितनों को मिल गई है? कितने बचे हुए हैं? और बड़े स्थानों पर कितने वापस लौटेंगे? इस तरह के आंकड़ों के साथ योजना पूर्वक काम होना चाहिए.

हाथरस डीएम का वीडियो वायरल होने के बाद जयपुर में भड़के लोग, घर के बाहर फेंका कचरा

भारत की तितली की 1328वीं प्रजाति की खोज राजस्थान में ‘बिग बटरफ्लाई मंथ (Big Butterfly Month)’ के दौरान की गई है, जिसे 5 सितंबर से मनाया जा रहा है. डूंगरपुर जिले के सागवाड़ा के रहने वाले तितली विशेषज्ञ और शिक्षक मुकेश पंवार ने स्पीलिया जेबरा (Spilia zebra butterfly) नाम की इस प्रजाति को ढूंढ़ निकाला.

पिछले 15 सालों से तितलियों पर शोध कर रहे वागड़ नेचर क्लब के सदस्य पंवार ने 8 नवंबर, 2014 को सागवाड़ा के धनराज फार्म हाउस में स्पीलिया जेबरा को पहली बार देखा. उन्होंने उसकी एक तस्वीर खींचकर पहचान कराने के लिए उत्तराखंड के भीमताल में बटरफ्लाई रिसर्च इंस्टीट्यूट (Butterfly Research Institute) को भेज दिया.

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तेज गति से उड़ान भरती है यह तितली

लगभग छह साल की लंबी रिसर्च के बाद संस्थान के डायरेक्टर पीटर स्मेटाचौक ने ऐलान किया कि यह भारत की 1328वीं तितली है. स्मेटाचौक ने कहा कि तेज गति से उड़ान भरने वाली इस तितली की चौड़ाई 2.5 सेंटीमीटर है. तितली की यह प्रजाति आमतौर पर पाकिस्तान (Pakistan) में पाई जाती है. बताया जाता है कि साल 2016 में पाकिस्तान की एक किताब बटरफ्लाई ऑफ पाकिस्तान में भी इस तितली के बारे में जिक्र किया गया है. राजस्थान की तितलियों पर शोध कर रहे पंवार ने तितलियों की 111 प्रजातियों को देखकर उनकी पहचान की है.

बिग बटरफ्लाई मंथ

देशभर में तितलियों को गिनने, समझने और उनके संरक्षण की मुहिम को लोगों तक ले जाने के लिए ‘बिग बटरफ्लाई मंथ’ मनाया जाता है. इसमें शोधकर्मियों, विशेषज्ञों और पर्यावरण प्रेमियों से लेकर फोटोग्राफी के शौकीन और हर वर्ग के लोग शामिल होते हैं. हाल ही में सितंबर महीने में ही पर्यावरण और जैव विविधता संरक्षण के लिए काम कर रहे दो पर्यावरण वैज्ञानिकों को राजस्थान में तितलियों की दो नई प्रजातियों- ट्राई कलर पाइड फ्लेट और स्पॉटेड स्माल फ्लेट को ढूंढने में सफलता मिली थी.

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सियासत को ड्रामा इसलिए कहा जा रहे है, क्योंकि देश के कई नेताओं की फिक्र सतही नजर आ रही है. नेताओं के ड्रामे देखकर ऐसा कतई नहीं लग रहा कि किसी को देश की बेटियों की फिक्र है. कांग्रेस हाथरस की बेटी के लिए इंसाफ मांग रही है, तो बीजेपी राजस्थान की ओर इशारा कर रही है, जहां कांग्रेस की सरकार है. क्या बेटियां कई स्तरों पर बंटी हुई हैं? क्या राजस्थान की इन बेटियों की फिक्र यूपी सरकार को नहीं करनी चाहिए?

राजस्थान के सिरोही जिले की एक बिटिया अब इस दुनिया में नहीं रही और जिस वजह से नहीं रही, उस वजह ने पूरे गांव का कलेजा चीर दिया है. पूरा गांव रो रहा है. सिरोही के अनादरा थाने में दर्ज रिपोर्ट कहती है कि वो सिर्फ 6 साल की बच्ची थी, जिसके साथ 25 सितंबर को रेप हुआ और फिर उसकी गला घोंटकर हत्या कर दी गई. आरोपी फरार है और पुलिस की टीमें लकीर पीट रही हैं.

इधर राजस्थान के बांसवाड़ा में एक मां का कलेजा फटा जा रहा है, जिसने अपनी इकलौती बेटी खो दी है. 18 साल से भी कम उम्र की उस बच्ची को रात में आरोपी उठाकर ले गए. उसके साथ गैंगरेप किया और फिर उसकी जहर देकर हत्या कर दी. आरोपियों ने अपना गुनाह कबूल लिया. बावजूद इसके पुलिस सबूत ढूंढ रही है.

“आरोपियों ने खुद मान लिया, लेकिन पुलिस गवाह मांग रही है”

पीड़िता के भाई का कहना है, “आरोपियों ने खुद ही मान लिया है कि हमने किया है और कर दिया है, तो अब क्या करें. फिर भी पुलिस बोल रही है गवाही चाहिए. मामला तूल पकड़ने के बाद पुलिस ने 1 अक्टूबर को केस तो दर्ज कर लिया, लेकिन आरोपी खुलेआम घूम रहे हैं.”

वहीं अजमेर की एक महिला शुक्र मना सकती है कि उसकी जान तो बच गई, लेकिन देश का सिस्टम उसे गैंगरेप से नहीं बचा सका. ये महिला अपने मायके जा रही थी, जब इसके साथ गैंगरेप की वारदात को अंजाम दिया गया. अब पीड़िता हर जगह गुहार लगा रही है, लेकिन सिस्टम सोया पड़ा है. पीड़िता ने बताया कि तीन लोग, जिनमें से वो दो को नहीं जानती है.

अब सवाल उठता है कि आखिर इस समस्या का हल क्या है? क्योंकि सरकारें आती हैं, जाती हैं, लेकिन बेटियां यूं ही मरती रहती हैं. हर घंटे नई निर्भया सामने आ जाती है.

‘ताऊ ने कहा- मीडियावालों को खेत पर ले आओ, पुलिस घर से नहीं निकलने दे रही’, हाथरस पीड़िता का चचेरा भाई

यूपी के हाथरस मामले की चर्चा अभी पूरे देश में है. वहीं हाथरस के जिला अधिकारी का एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है. वीडियो में डीएम प्रवीण कुमार पीड़ित परिवार को धमकाते हुए नजर आ रहे है. सोशल मीडिया पर ये वीडियो जमकर वायरल हो रहा है. वहीं डीएम के जयपुर स्थित वैशाली नगर आवास पर लोगों ने शुक्रवार को हंगामा किया.

बताया जा रहा है कि ये विरोध भीमसेना की तरफ से किया गया. इतना ही नहीं विरोध करने वालों ने डीएम के आवास के बाहर कचरा फेंक दिया. दरअसल डीएम प्रवीण कुमार मूल रूप से जयपुर के रहने वाले हैं. उनका आवास जयपुर के वैशालीनगर के ब्लॉक ई में है. घटना की सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और मामला शांत कराया.

वायरल वीडियों में क्या है?

वायरल हो रहे वीडियो में डीएम प्रवीण कुमार पीड़ित परिवार से कह रहे हैं कि मीडिया तो आज है, कल नहीं रहेगी. हम यहीं रहेंगे. अपने बयानों को बार-बार मत बदलो. वहीं इतना ही नहीं जब इससे पहले भी प्रशासनिक अधिकारी पीड़िता के गांव पहुंचे थे तो उनको विरोध का सामना करना पड़ा था. डीएम प्रवीण कुमार को भी काफी विरोध का सामना करना पड़ा था. वहां जब प्रभारी मंत्री और सांसद पहुंचे तो उनके खिलाफ भी जमकर नारेबाजी हुई थी और उनको वापास लौटना पड़ा था.

पुलिस कर रही है जांच

जयपुर के वैशाली नगर थाना अधिकारी अनिल जैमन ने बताया कि इस घटना की सूचना हमें फोन पर मिली थी. हमारी चेतक जब पहुंची तो वहां सिर्फ कचरा डला नजर आया. हम वीडियो फुटेज के आधार पर लोगों की तलाश करने की कोशिश कर रहे हैं. वहीं उन्होनें बताया कि डीएम साहब के जिस मकान पर कचरा फेंका है वहां अभी किरायेदार रहते हैं पुलिस जांच के बाद जो अपराधी होगा उसके खिलाफ कार्रवाई होगी.

हाथरस सामूहिक दुष्कर्म (Hathras gang rape) और हत्या मामले में राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत (Ashok Gehlot) ने शुक्रवार को सवाल किया कि उत्तर प्रदेश सरकार के पास अगर छिपाने के लिए कुछ नहीं है तो फिर विपक्षी नेताओं को हाथरस जाने से क्यों रोक दिया गया. उन्होंने परिवार की अनुपस्थिति में मंगलवार और बुधवार की रात दुष्कर्म पीड़िता के अंतिम संस्कार पर भी सवाल उठाया.

मुख्यमंत्री गहलोत ने सचिवालय में महात्मा गांधी (Mahatma Gandhi) को पुष्पांजलि अर्पित करने के बाद मीडिया से बात की. गहलोत ने कहा, “हाथरस मामले में घोर लापरवाही बरती गई है. पीड़िता का रात दो बजे अंतिम संस्कार किया गया. इस तरह के मामले के बारे में कभी नहीं सुना.”

‘अंतिम अलविदा कहने की भी नहीं दी अनुमति’

कांग्रेस नेता और राज्य के मुख्यमंत्री गहलोत ने कहा, “आप पुलिस सहायता के साथ रात में दाह संस्कार करते हैं, जबकि गरीब मां चिल्लाती रहती है और अपनी बेटी को एक बार देखने की प्रार्थना करती रहती है. आप उसे अंतिम अलविदा कहने की अनुमति भी नहीं देते हैं. इस तरह की घटना पहले कभी देखने को नहीं मिली.”

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BJP ने भी उठाए राजस्थान सरकार पर सवाल

राजस्थान में मुख्य विपक्षी दल भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने भी इस घटना को लेकर राज्य सरकार पर सवाल उठाए हैं कि कांग्रेस नेता राहुल गांधी और प्रियंका गांधी कांग्रेस शासित राजस्थान के बारां जिले में क्यों नहीं आते?

इस पर मुख्यमंत्री ने कहा, “हाल ही में तीन BJP नेता डूंगरपुर के खेरवाड़ा गांव जाना चाहते थे. पार्टी विधायक मदन दिलावर और अन्य BJP नेता वहां गए, लेकिन हमने उन्हें नहीं रोका. विपक्ष का कर्तव्य है कि वह घटनास्थल का दौरा करे और किसी भी मामले में जमीनी स्थिति के बारे में जानें.”

‘विपक्षी नेताओं के तौर पर जा रहे थे हाथरस’

मुख्यमंत्री गहलोत ने कहा, “मैं स्पष्ट करना चाहता हूं कि वे (विपक्षी नेता) विपक्षी नेताओं के तौर पर हाथरस जा रहे थे. एक विपक्षी के रूप में आप भी अपने नेताओं को दिल्ली से बुला सकते हैं. हम उन्हें अनुमति देंगे और जरूरत पड़ने पर BJP नेताओं को पुलिस सुरक्षा (Police protection) भी उपलब्ध करवाई जाएगी.” (IANS)

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राजस्थान के सवाई माधोपुर में  (Sawai Madhopur minor rape case) नाबालिग बालिका से दुष्कर्म करवाने का मामला लगातार तूल पकड़ता जा रहा है. वहीं इस मामले में एक के बाद एक परते खुलती चली जा रही हैं.पूर्व में इस मामले का कनेक्शन सीधे तौर पर भाजपा (BJP) की पूर्व महिला जिला अध्यक्ष सुनीता वर्मा (Sunita verma) से जुड़ा हुआ माना जा रहा था.अब इस मामले में आरोपी बनाई गई पूजा उर्फ पूनम चौधरी (Poonam Chaudhary) कांग्रेस सेवादल के महिला मोर्चा की जिलाध्यक्ष निकली. जिससे कांग्रेस तथा भाजपा दोनों ही पार्टियों में इस मामले को लेकर उथल-पुथल मच गई है.

वहीं इस घिनौने कार्य में भाजपा तथा कांग्रेस दोनों का ही गठबंधन नजर आ रहा है. इस मामले में पुलिस द्वारा कार्यवाही करते हुए विगत दिनों जहां सुनीता वर्मा उसके साथी हीरालाल, जिला उद्योग केंद्र के लिपिक संदीप शर्मा तथा कलेक्ट्रेट के चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी श्योराम मीणा को पुलिस गिरफ्तार कर चुकी है.

वहीं अब तक इस मामले में आरोपी पूजा को पुलिस गिरफ्तार नहीं कर सकी है.लेकिन पूजा की गिरफ्तारी के लिए पुलिस उसके संदिग्ध ठिकानों पर लगातार दबिश दे रही है. इस मामले में अभी कुछ और चेहरों के बेनकाब होने की आशंका पुलिस द्वारा जताई जा रही है. पुलिस इस मामले में गहनता के साथ जांच में जुटी है.

पूर्व भाजपा महिला जिला अध्यक्ष समेत अब तक पांच लोग गिरफ्तार

इस मामले में अब तक कुल मिलाकर 5 लोग गिरफ्तार किए जा चुके हैं .जिनमें पूर्व भाजपा महिला जिला अध्यक्ष सुनीता वर्मा, उसका साथी हीरालाल, जिला उद्योग केंद्र का लिपिक संदीप शर्मा, कलेक्ट्रेट का चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी श्योराम मीणा तथा पांचवा खंडा कॉलोनी का इलेक्ट्रीशियन राजू लाल रेगर शामिल है.आरोपी सुनीता वर्मा तथा हीरालाल को न्यायालय द्वारा 3 अक्टूबर तक पुलिस रिमांड पर दोबारा सौंपा गया है. साथ ही श्योराम मीणा को न्यायिक अभिरक्षा में भेजने के आदेश जारी किए गए हैं.

भाजपा ने की जांच की मांग

गौरतलब है कि पुलिस ने आरोपी सुनीता वर्मा और हीरालाल को विगत 26 सितंबर को गिरफ्तार किया गया था.उसके पश्चात 27 सितंबर को न्यायालय में पेश किया गया. तभी से आरोपी वर्मा तथा हीरालाल पुलिस रिमांड पर चल रहे हैं. विगत दिनों यह मामला प्रकाश में आने के पश्चात भाजपा द्वारा तुरंत प्रभाव से सुनीता वर्मा को पद से हटा दिया गया था.वहीं भाजपा जिला अध्यक्ष ने भी इस मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की है.

ऐसे रची गई साजिश, 2000 के लिए नाबालिग से दुष्कर्म

कलेक्ट्रेट का चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी शिवराम मीणा आरोपी सुनीता वर्मा के संपर्क में तब आया था. जब वह कई मर्तबा ज्ञापन देने के लिए कलेक्टर के पास जाती थी, तब लॉकडाउन काल के दौरान कई मर्तबा आरोपी शोराम मीणा ने सुनीता वर्मा को सैनिटाइजर आदि भी उपलब्ध करवाए थे. इस दौरान शोराम मीणा पर भी नाबालिग के साथ बलात्कार करने का आरोप है जिसके बाद पुलिस ने उसे गिरफ्तार किया.

आरोपी इलेक्ट्रीशियन राजू लाल रेगर सुनीता वर्मा के मकान में बिजली फिटिंग का कार्य करता था. वहीं सुनीता वर्मा से राजू लाल रेगर को बिजली फिटिंग मजदूरी के ₹2000 लेने थे.कई बार पैसे का तकाजा करने के पश्चात आरोपी सुनीता वर्मा ने नाबालिक से दुष्कर्म करवा कर अपने पैसों का हिसाब चुकता कर लिया. इस मामले में आरोपी राजू लाल रेगर को भी पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया.

मामले से भाजपा व कांग्रेस का कनेक्शन

उपरोक्त मामले में नाबालिग से दुष्कर्म करवाने को लेकर मुख्य आरोपी सुनीता वर्मा भाजपा में सवाई माधोपुर जिले की महिला मोर्चा से जिलाध्यक्ष रही हैं.हालांकि मामला सुर्खियों में आने के बाद उसे पद से तुरंत प्रभाव से निष्कासित कर दिया गया.

वहीं इसी मामले में नाबालिक का संपर्क सुनीता वर्मा से करवाने वाली आरोपी पूजा उर्फ़ पूनम चौधरी की पुलिस सरगर्मी से तलाश कर रही है.पूनम चौधरी सवाई माधोपुर जिला कांग्रेस सेवा दल की महिला मोर्चा की जिला अध्यक्ष पद पर कार्यरत है.

यूपी के बाद अब राजस्थान में रेप (Rape in Rajasthan) के मामले रुकने का नाम नहीं ले रहे हैं. बारां के बाद अब बांसवाड़ा, सिरोही, अजमेर और जयपुर से रेप और गैंगरेप के अलग-अलग केस सामने आए हैं. मिली जानकारी के मुताबिक, बांसवाड़ा में एक लड़की की नग्न लाश हॉस्पिटल में मिली है. वहीं, सिरोही में महज 6 साल की मासूम से हैवानियत की गई.

इसके अलावा जयपुर (Rape in Rajasthan) के एक महिला से होटल में गैंगरेप का मामला सामने आया है. वहीं अजमेर में पीहर जा रही महिला को बंधक बनाकर रेप का मामला सामने आया है.

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जयपुर के विश्वकर्मा इलाके में गैंगरेप

विश्वकर्मा इलाके में स्थित एक होटल में बुधवार रात परिचित युवक के अपने साथियों के साथ मिलकर एक महिला से सामूहिक दुष्कर्म किया. फिलहाल पुलिस मामले की जांच कर रही है. एसएचओ मांगीलाल विश्नोई ने बताया कि सरदारशहर चुरू निवासी 26 वर्षीय महिला ने मामला दर्ज कराया है. वह अपने पति व बच्चों के साथ हरमाडा इलाके में किराए पर रहती हैं. घटनाक्रम के मुताबिक, बुधवार शाम को उसने परिचित विनोद वर्मा को कॉल कर 1000 हजार रुपए की मदद मांगी.

बातचीत के बाद आरोपी विनोद वर्मा कार लेकर उसके पास आया और उसको कार में बैठाकर अपने साथ विश्वकर्मा इलाके में स्थित एक होटल में ले गया. आरोप है कि विनोद वर्मा ने पहले उसको शराब पिलाई. नशे में आरोपी विनोद और उसके दो दोस्तों ने उसके साथ दुष्कर्म किया.

उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश के बाद अब राजस्थान (Rajasthan) में भी दो नाबालिगों के साथ गैंगरेप ( Gang Rape) का मामला सामने आया है. आरोप है कि राजस्थान के बारां (Baran) से दो नाबालिग लड़कियों को कोटा और जयपुर ले जाकर दो लड़कों ने तीन दिनों तक उनका गैंगरेप किया. वहीं पुलिस बच्चियों के साथ गैंगरेप की घटना से इनकार कर रही है. पुलिस (Police) का कहना है कि लड़कियों ने अपने बयान में गैंगरेप की बात से इनकार किया है.

इस मामले में राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत (CM Ashok Gehlot) ने ट्वीट कर कहा कि बारां की घटना की तुलना हाथरस जैसी वीभत्स घटना से करके मीडिया का एक वर्ग देश की जनता को गुमराह करने का काम कर रहा है. इसके साथ ही उन्होंने कहा कि घटना होना एक बात है और घटना पर कार्रवाई होना दूसरी बात है. अगर घटना हुई तो कार्रवाई भी तुरंत की गई.

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सीएम अशोक गहलोत (CM Ashok Gehlot)ने कहा कि लड़कियों ने खुद मजिस्ट्रेट के सामने दिए गए बयानों में अपनी मर्जी से लड़कों के साथ घूमने जाने, और उनके साथ ज्यादती न होने की बात कही. मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने कहा कि लड़कियों का मेडिकल (Medical)  कराया गया. जांच में पता चला है कि लड़के भी नाबालिग हैं, आगे की जांच अब भी जारी है.

लड़कियों के पिता ने पुलिस को दिए बयान में आरोप लगाया कि दोनों आरोपी 18 सितंबर की रात को उनकी 13 और 15 साल की बेटियों को बहला फुसलाकर अपने साथ जिले से बाहर ले गए. आरोपी उन्हें कोटा और जयपुर लेकर गए और तीन दिनों तक उनके साथ गैंगरेप किया. 21 सितंबर को दोनों लड़कियां कोटा में मिली थीं.

पुलिस ने दावा किया कि नाबालिग लड़कियों ने अपने बयान में रेप के आरोपों से इनकार किया है, जबकि दोनों बच्चियों ने कैमरे के सामने खुद नशीला पदार्थ पिलाकर गैंगरेप की बात स्वीकार की थी. परिवार का आरोप है कि उन्हें आरोपियों के खिलाफ शिकायत दर्ज नहीं करने की धमकी दी गई थी.

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पीड़ित परिवार का आरोप है कि दो लड़के बारां से उनकी नाबालिग बच्चियों को कथित तौर पर अपहरण कर जयपुर और कोटा ले गए, जहां आरोपियों ने तीन दिनों तक उनके साथ गैंगरेप किया. हालांकि पुलिस गैंगरेप के आरोपों से इनकार कर रही है.

राजस्थान के डूंगरपुर (Dungarpur) के हिंसक विरोध प्रदर्शन मामले में 55 लोगों को गिरफ्तार किया है. पुलिस ने कहा कि बाकी आरोपियों को पकड़ने के लिए छापेमारी की जा रही हैं. डूंगरपुर के एसपी जय यादव ने बताया कि राजस्थान के डूंगरपुर में हिंसा (Protest) के मामले में सदर और बिछीवाड़ा पुलिस थानों में 35 मामले दर्ज किए गए हैं और 55 लोगों को गिरफ्तार किया गया है. हालांकि बाकी आरोपियों की तलाश की जा रही हैं. लूटे गए समानों को दोबारा बरामद करने की कोशिश की जा रही है.

गुरुवार को आदिवासी समुदायों के प्रदर्शनकारियों ने डूंगरपुर के पास राष्ट्रीय राजमार्ग 8 को जाम कर प्रदर्शन किया गया. प्रदर्शन के दौरान पुलिसकर्मियों पर पथराव किया गया. प्रदर्शनकारियों की मांग है कि सामन्य क्षेणी के लिए आरक्षित 1167 रिक्त पदों पर उनके समुदाय के लोगों की भर्ती हो. योग्य उम्मीदवारों की कमी के कारण 2018 से ये भर्ती खाली पड़ी है.

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बता दें कि प्रदर्शनकारियों ने कई इमारतों को भी नुकसान पहुंचाया है. इस हिंसक झड़प में 2 लोगों की मौत हो चुकी हैं. पुलिस का कहना है कि स्थिति से निपटने के लिए इलाके में रैपिड फोर्स (Rapid Force) की दो टीमों को तैनात कर दिया है. सरकार ने स्थिति पर नियंत्रण पाने के लिए जिले भर में इंटरनेट सेवाओं को बंद कर दिया है. वहीं अधिकारियों का कहना है कि स्थिति अभी भी तनावपूर्ण है.

जयपुर के डीजीपी भूपेंद्र सिंह ने स्थिति की समीक्षा करते हुए वरिष्ठ अधिकारियों से प्रतिक्रिया ली. उन्होंने बताया कि आरएएफ की दो कंपनियों के अलावा तीन वरिष्ठ अधिकारियों को भी डूंगरपुर भेज गया था.

लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला (Om Birla) के पिता श्रीकृष्ण बिरला (Shrikrishna Birla) का मंगलवार देर रात निधन हो गया है. उनके निधन पर कई राजनीतिक लोगों ने शोक व्यक्त किया है.

सांसद रामदास अठावले ने ट्वी कर लिखा- ”लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला जी के पिताजी श्री कृष्ण बिरला जी के परलोकगमन का दु:खद समाचार प्राप्त हुआ. श्री ओम बिरला जी एवं परिवार के सदस्यों को इस दुःख की घड़ी को सहन करने की शक्ति प्रदान हो और दिवंगत आत्मा को शांति मिले यही कामना करता हूं. ओम शांति.”

विधायक नारायण बेनीवाल ने शोक जताते हुए लिखा- ”लोकसभा अध्यक्ष श्री ओम बिरला के पिताजी के निधन के दुःखद समाचार प्राप्त हुए हैं! ईश्वर से प्रार्थना करता हूं कि दिवंगत आत्मा को अपने श्री चरणों में स्थान दें व शोक संतप्त परिजनों को यह दु:ख सहन करने की शक्ति प्रदान करें.”

कोरोनाकाल (Covid-19) के अंदर देश में सबसे पहले लॉकडाउन राजस्थान (Rajsathan) के अंदर लगा,वहीं राजस्थान सरकार ने कोरोना के अन्दर भीलवाड़ा मॉडल को लेकर देशभर में खुब वाहवाही लूटी. लेकिन उसी राज्य में कोरोना (Covid-19) की गाइडलाइन का जमकर मजाक राजस्थान (Rajasthan) के नेताओं ने उड़ाया.

अब कोरोना बेकाबू हो गया है लिहाजा सरकार ने राज्य के 11 जिलों के अंदर धारा 144 लगा दी है, वहीं अशोक गहलोत सरकार ने अब मीडिया पर अघोषित पाबंदी लगा दी है. दरअसल मुख्यमंत्री निवास के आस-पास मीडिया के लिये अघोषित पाबंदी लगा दी है.

सोमवार को राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत को राज्यपाल से मिलने जाना था,इस दौरान जब मीडियाकर्मी वहां पहुंचे तो उन्हें वहां खड़ा होने से साफ मना कर दिया गया और वहां से पुलिस ने मीडिया को हटा दिया. इस मामले में सांसद हनुमान बेनीवाल ने राज्य सरकार पर सवाल उठाते हुए कहा कि सीएम का मीडिया की स्वायत्तता पर हमला निंदनीय है.

नेताओं ने उड़ाया कोरोना के नियमों का मखौल, मीडिया पर रोक

राजस्थान की चाहे कोई भी पार्टी हो यहां नेताओं ने जमकर कोरोना के नियमों का मखौल उड़ाया है. सत्ता पार्टी कांग्रेस इसमें सबसे आगे रही है.अशोक गहलोत सरकार ने राज्यसभा चुनाव के दौरान होटल में विधायकों की बाड़ाबंदी की.

एक होटल के अंदर 200 से ज्यादा लोग एकत्रित हुए और जमकर सोशल डिस्टेंस पर कोरोना गाइडलाइन का मजाक बना. उसके बाद अशोक गहलोत और सचिन पायलट की आपसी लड़ाई के दौरान जब पायलट के साथ 19 विधायक हरियाणा चले गये थे तो उस दौरान भी बाड़ाबंदी हुई और नियमों का जमकर मखौल उड़ा,वहीं हाल ही में नीट और जेईई परीक्षा के विरोध में कांग्रेस पार्टी ने प्रदर्शन किया जब नियमों का मखौल उड़ा, ऐसा कई बार विपक्ष के प्रदर्शनों में भी नजर आया.

वहीं हाल ही में सरकार ने कोरोना के बढ़ते प्रकोप को देखकर धारा 144 लगा दी,जिसके अनुसार सावर्जनिक जगह पर एक साथ 5 से ज्यादा लोग खड़े नहीं हो सकते, लेकिन मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने खुद किसानों के लिये आए नए बिल के विरोध में राजस्थान प्रदेश कांग्रेस कार्यालय के अंदर प्रेस वार्ता की और जमकर सोशल डिस्टेंसिंग की धज्जियां उड़ाई और बड़ी तादात में पत्रकारों को अंमत्रित किया. लेकिन अब पत्रकारों के लिये धारा 144 नियमों का हवाला देकर मुख्यमंत्री निवास के आस-पास पुलिस पत्रकारों को खड़े नहीं रहने दे रही है.

पत्रकारों पर पहले ही पाबंदी लगाने की बात कर चुके हैं मुख्यमंत्री

राजस्थान के मुख्यमंत्री जो हमेशा ये बयान देते हैं कि मीडिया केंन्द्र सरकार के दबाव में काम कर रहा है वो खुद मीडिया पर अघोषित पाबंदी लगाने की कोशिश करते हैं. राजस्थान में कांग्रेस सरकार के एक साल पूरे होने पर सीएम अशोक गहलोत ने बयान दिया था कि ‘हम उन्हीं चैनलों को विज्ञापन देंगे जो हमें हमारी खबर दिखाएंगे. ऐसा नहीं हो सकता कि हमारे मंत्री आपकी खबर के लिए फोन करते रहें कि हमारी खबर दिखा दो और हम आपको विज्ञापन भी दें. विचारधारा से प्रेरित होकर आप कुछ लोगों की खबर दिखाते हैं.’

इतना ही नहीं सीएम अशोक गहलोत (Ashok Gehlot) ने मीडिया को साफ चेतावनी देते हुए कहा कि ‘एजेंडे के तहत खबर दिखाने वाले चैनलों को मैं विज्ञापन नहीं दूंगा. मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने कहा कि आप खबर दिखाओ, मेरी आलोचना करो, चाहे जितनी करो, मगर खबर को तोड़ मरोड़ कर और एजेंडे के तहत खबर दिखाओगे तो सरकार विज्ञापन नहीं देगी.

अपनों पर नहीं रहा भरोसा तो मीडिया पर निकाल रहे भड़ास: हनुमान बेनीवाल

राष्ट्रीय लोकतांत्रिक पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक व नागौर सांसद हनुमान बेनीवाल ने मीडिया कर्मियों की आवाजाही पर रोक लगाने के मामले पर कहा कि सीएम अशोक गहलोत द्वारा चौथे स्तंभ की स्वायत्ता पर हमला निंदनीय कृत्य है,और सीएम को जब खुद अपनों पर भरोसा नहीं रहा तो अपनी भड़ास मीडिया पर निकाल रहे हैं, जो कि अनुचित है. सांसद ने कहा कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में मीडिया की भी महत्पूर्ण भूमिका है ऐसे में राजस्थान सरकार द्वारा सत्ता का दबाव मीडिया पर लगाना अनुचित है.

वहीं इस मसले पर जब टीवी9 भारतवर्ष ने सरकार डीपीआर मंत्री रधु शर्मा से बात करने की कोशिश की लेकिन उनका फोन स्विच ऑफ था,वहीं परिवहन मंत्री प्रताप सिंह खाचारियावास ने कहा कि मैं मुख्यमंत्री को पूरा मसला बता दूंगा,लेकिन वे हनुमान बेनीवाल के बयान पर कोई टिप्पणी नहीं करना चाहते हैं.

इससे पहले राजस्थान में पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे ने सचिवालय में पत्रकारों पर पाबंदी लगा दी थी, वहीं अशोक गहलोत ने सचिवालय में विडियो जर्नलिस्ट पर पाबंदी लगा रखी है.