Coronavirus Lockdown में हर दिन जरूरतमंदों तक खाना पहुंचा रहा अक्षय पात्र फाउंडेशन

अक्षय पात्र संस्थान (Akshaya Patra Foundation) के प्रबंधक ने बताया कि 'इस शाखा के माध्यम से प्रतिदिन रोटी-सब्जी, खिचड़ी, चावल, दाल जैसे खाद्य पदार्थ पकाए जाते हैं. जिला प्रशासन और नगर निगम की सहायता से जरूरतमंद और गरीब मजदूरों तक खाना पहुंचाया जाता है.'
Akshaya Patra Foundation, Coronavirus Lockdown में हर दिन जरूरतमंदों तक खाना पहुंचा रहा अक्षय पात्र फाउंडेशन

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Narendra Modi) ने रविवार को ‘मन की बात’ में देश से अन्नदाता के सम्मान की बात कही थी. पीएम मोदी ने महाभारत काल के अक्षय पात्र की बात करते हुए कहा कि उस अक्षय पात्र में गरीबों के लिए खाना कभी खत्म नहीं होता था.

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कुछ ऐसा ही नजारा हमें राजस्थान (Rajasthan) की राजधानी जयपुर में देखने को मिल रहा है. जयपुर का अक्षय पात्र जो जगतपुरा में स्थित है. कोरोनावायरस (Coronavirus) के संकट के समय इस अक्षय पात्र की रसोई के अंदर एक लाख से ज्यादा लोगों के लिए स्वादिष्ट और पौष्टिक खाना प्रतिदिन प्रतिदिन बनता है.

एक घंटे में बनाई जाती हैं 10,000 रोटियां

खास बात यह है कि यहां एक घंटे में 10,000 रोटियां बनाई जाती हैं. सैकड़ों बाल्टी दाल बनती है. साथ ही प्रतिदिन खिचड़ी, चावल और सब्जी भी बनती है. इस रसोई में प्रतिदिन एक लाख के करीब लोगों का भोजन तैयार किया जाता है.

राज्य में जब से लॉकडाउन शुरू हुआ है, तब से नियमित रूप से अक्षय पात्र संस्थान के द्वारा गरीब, जरूरतमंद, फुटपाथ पर जीवन बसर करने वालों और दिहाड़ी मजदूरों के लिए भोजन तैयार किया जाता है और बंटवाया जाता है.

संस्थान के प्रबंधक ने बताया कि अक्षय पात्र की इस शाखा के माध्यम से प्रतिदिन रोटी-सब्जी, खिचड़ी, चावल, दाल जैसे खाद्य पदार्थ पकाए जाते हैं. जिला प्रशासन एवं नगर निगम की सहायता से शहर के विभिन्न इलाकों में जरूरतमंद और गरीब मजदूरों तक पहुंचाया जाता है.

‘गुणवत्ता का रखा जाता है विशेष ध्यान’ 

उन्होंने बताया, “खाने में गुणवत्ता का विशेष ध्यान रखा जाता है. रसोई में मौजूद हाईटेक मशीनों के द्वारा यह भोजन तैयार किया जाता है. विशेष रूप से खाना बनाते समय व बनवाने से लेकर तक सोशल डिस्टेंसिंग और अन्य जरूरी एहतियात बरती जाती है.”

उन्होंने बताया कि हाथों का कम से कम उपयोग किया जाता है और सब्जियों को क्लोरीन के पानी के माध्यम से साफ किया जाता है. खाना बनाने में लगे सभी कर्मचारियों को कई चरणों के माध्यम से सैनिटाइज किया जाता है और सभी बचाव साधनों का उपयोग करते हुए खाना बनाने के कार्य में लगाया जाता है.

संस्थान के प्रबंधक ने बताया, “यहां पर लोगों का बॉडी टेंपरेचर चेक किया जाता है. मास्क लगाए जाते हैं. उसके बाद किचन में खाना बनाने वालों को भेजा जाता है. कच्चा माल रखने के लिए अलग से व्यवस्था की जाती है. खाना पहुंचाने वाली गाड़ियों को भी नियमित सेनेटाइज किया जाता है.”

अक्षय पात्र संस्थान पहुंचा रहा भोजन

कोरोना की महामारी में जहां एक ओर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी कहते हैं कि कोई भी भूखा नहीं सोएगा, ऐसे में अक्षय पात्र संस्थान इस कथन को कारगर सिद्ध करती हुई नजर आती है. अक्षय पात्र संस्थान देश के कई इलाकों में कार्यरत है और अनेक स्कूलों में बच्चों को भोजन मुहैया कराने का काम भी करती है.

कोरोना त्रासदी में अक्षय पात्र संस्थान जरूरतमंदों तक भोजन पहुंचाने का काम कर रही है. यहां की खासियत यह है कि मांग कितनी भी ज्यादा क्यों ना हो किंतु गुणवत्ता से समझौता नहीं किया जाता. गुणवत्ता और शुद्धता इस संस्थान की सबसे पहली प्राथमिकता रहती है.

कोरोना जैसी महामारी में शुद्धता का ध्यान रखना बेहद जरूरी हो जाता है. कोरोना महामारी के चलते पहले दिन से ही अक्षय पात्र का किचन एक बड़े विकल्प के रूप में नजर आने लगा था. राज्य सरकार और प्रशासन ने उनसे संपर्क करके सभी जरूरतमंद इलाकों में भोजन उपलब्ध कराने की इस मुहिम में सहयोग लिया.

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