VIDEO: राम-कृष्ण के भजन गाते हैं फिरोज के पिता, बेटी का नाम लक्ष्मी, फिर BHU में विरोध क्यों?

बीएचयू में संस्कृत के प्रोफेसर फिरोज खान की नियुक्ति को लेकर हो रहे विवाद के बीच टीवी9 भारतवर्ष की टीम उनके परिवार के पास पहुंची.

बनारस हिंदू विश्वविद्यालय (BHU) के संस्कृत विभाग में असिस्टेंट प्रोफेसर के पद पर राजस्थान के निवासी फिरोज खान की नियुक्ति पर घमासान मचा हुआ है. ये विरोध एक गैर हिंदू के संस्कृ‍त शिक्षक बनने पर हो रहा है.

बीएचयू में नियुक्ति को लेकर हो रहे विवाद के बीच जब टीवी9 भारतवर्ष की टीम ग्राउंड जीरो पर निकली. टीम ने जाना कि जयपुर के पास बगरू के रहने वाले फिरोज खान का परिवार क्या करता है.?

आप फिरोज खान के परिवार के बारे में ये बातें जानकर हैरान रह जाएंगे. मजहब की लकीर से बांटने वालों के लिए फिरोज का परिवार एक जिंदा नसीहत है. फिरोज खान भले ही मुस्लिम हैं, लेकिन कर्म से उनके पूरे परिवार का सनातन धर्म से गहरा लगाव है.

भजनों के मास्टर

गांव पहुंचने पर पता चला कि उनके पिता का नाम रमजान खान है. लेकिन उनको लोग रमजान के नाम से कम मुन्ना मास्टर के नाम से ज्यादा जानते हैं. उनके पिता के पास पहुंचे तो मुन्ना मास्टर संस्कृत भाषा के मास्टर नहीं बल्कि भगवान श्रीकृष्ण और भगवान राम के भजनों में मास्टर निकले.

गौसेवक हैं रमजान खान

इनके पिता रमजान खान गौसेवक हैं. वह एक गौशाला चलाते हैं. इसके चलते पूरे कस्बे के लोग रमजान खान को गौपालक के रूप में जानते हैं. भजनों के बाद मुन्ना मास्टर अपनी दिनचर्या के अनुसार ही गौसेवा पर निकल गये. बगरू कस्बे की गौशाला में गायों को गुड़ खिलाने लग गये.

बेटी का नाम लक्ष्मी

फिरोज खान के पिता रमजान ने बताया कि उनके घर जब बेटी का जन्म दीपावाली पर हुआ था उसका नाम ही मैंने लक्ष्मी रख दिया. इतना ही नहीं रमजान खान ने भगवान श्रीकृष्ण, गौमाता की महानता पर कई भजन लिखे हैं. मुन्ना यानि रमजान ने एक पुस्तक भी लिखी है, जिसका नाम श्री श्याम सुरक्षि वंदना है. रमजान खान ने बताया मैनें भी संस्कृत शिक्षा ली थी, संस्कृत भाषा में भजन लिखता हूं. फिरोज को भी गांव के संस्कृत स्कूल मैं पढ़ाकर वहीं शिक्षा दिलाई.

हिंदू संगठनों के कार्यक्रम में भजन

रमजान खान पिछले 30 वर्षो से श्याम सेवा संस्थान से जुड़े हुए है उनके साथ जाकर जगह-जगह श्याम भजन गाते हैं. इतना ही नहीं फिरोज के पिता ने बताया कि वो हिन्दू संगठनों के कार्यक्रम में जाकर भजन गाते हैं. आरएसएस के कार्यक्रम में जाकर भी कई बार भजन गाये है.

रामायण की चौपाईयां भी कंठस्थ

फिरोज के पिता रमजान ने बताया कि आज से 15-20 साल पहले आस-पास गायों को परेशान किया जाता था. किसी को कुल्हाड़ी मार दी, किसी को चारा समय पर नहीं मिलता था. हमने 5 से 10 लोगों को समूह बनाकर सेवा का काम शुरू किया. रमजान ने बताया कि वो रोज सुबह गौशाला जाते हैं और वहां गायों की सेवा करते हैं. रमजान खान को हनुमान चालीसा और रामायण की चौपाईयां भी कंठस्थ है.

‘उर्दू को नहीं संस्कृत को चुना’

रमजान ने कहा कि उनको मुस्लिम होने का अहसास पहली बार हुआ है जब फिरोज का विरोध शुरू हुआ. रमजान ने कहा उनकी पहचान ही हिन्दुत्व है. विरोध करने वालों पर कहा कि उनको तो यहीं कहना चाहता हूं, पहले वो लोग हमारे परिवार को जाने फिर विरोध करें. छात्रों को गर्व होना चाहिये कि फिरोज ने उर्दू को नहीं संस्कृत को चुना.

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