24 घंटे में तीन बच्चियों से रेप, भाजपा प्रदेश अध्यश सतीश पूनियां ने साधा गहलोत पर निशाना

“क़ानून व्यवस्था मुख्यमंत्री, गृहमंत्री की प्राथमिकता में नहीं है और यही कारण है कि यहां पर लगातार ब्लात्कार, दुष्कर्म, हत्या, डकैती से लेकर चैन स्नेचिंग की वारदात होती है.”
Ashok Gehlot, 24 घंटे में तीन बच्चियों से रेप, भाजपा प्रदेश अध्यश सतीश पूनियां ने साधा गहलोत पर निशाना

राजस्थान में बिगड़ती कानून व्यवस्था के हालात पर भाजपा प्रदेशाध्यक्ष सतीश पूनिया ने कहा कि, मुख्यमंत्री अशोक गहलोत का अधिकांश समय दिल्ली की यात्राओं में निकलता है, पुलिस से उनका कोई कंम्यूनिकेशन नहीं रहता है और जिस तरीके की ब्लात्कार की घटनाएं हुई हैं उससे साफ तौर पर जाहिर है कि सरकार पूरी तरह से कमजोर है.

‘अशोक गहलोत ग्रह मंत्रालय के भी मुखिया हैं. वो स्वयं नंबर 2 मंत्रालय भी देखते हैं, और किसी भी प्रदेश का गृहमंत्री उस प्रदेश के दूसरी बड़ी धुरी होता है. ये सामान्य तौर भी कहा जाता है क्योंकि किसी भी प्रदेश की कानून व्यवस्था सबसे अहम कड़ी होती है. यदि कानून व्यवस्था नहीं होगी तो उस प्रदेश में अमन, चैन, खुशहाली नहीं होगी, मुख्यमंत्री जी दस महीने से ग्रह मंत्री भी हैं. एक बार भी उन्होने किसी तरह का बयान नहीं दिया, न ही जिम्मेदारी ली, ये साफ तौर पर जाहिर है कि वो कुंडली मारकर सरकार में तो काबिज हैं लेकिन उनके पास समय नहीं है.’

सतीश पूनिया ने कहा कि, क़ानून व्यवस्था मुख्यमंत्री, गृहमंत्री की प्राथमिकता में नहीं है और यही कारण है कि यहां पर एक के बाद एक ब्लात्कार, दुष्कर्म, हत्या, डकैती से लेकर चैन स्नेचिंग की वारदात होती है. निश्चित रूप से मुझे लगता है कि क़ानून व्यवस्था सरकार की प्राथमिकता में नहीं है जिसके वो स्वयं मंत्री हैं.

गुजरात शराब बंदी को लेकर जारी ट्विटर वॉर के विषय मे सतीश पूनिया ने कहा, देखिये मुझे लगता है कि पड़ोसी प्रदेश की चिंता की बजाय वो राजस्थान की व्यवस्था सम्भाल ले और 8 इस बात को पुख्ता भी कर दे कि 8 बजे बाद राजस्थान में शराब नहीं बिकती, तो मुझे लगता है कि बयान बाजी के आधार पर.

‘निश्चित रूप से ये जो सारी स्थितियां बनी हैं और उसमें कांग्रेस का अंतर्कलह एक बड़ा कारक है. पायलट साहब का भी बयान था कि क्रिकेट की सियासत से कांग्रेस को नुकसान हुआ है, तो मुझे लगता है कि ऐसी कमजोर कानून व्यवस्था और इस तरह की अंतर्कलह की स्थिती में यदि कोई पार्टी सत्ता में होती है तो उसका सीधा सीधा नुकसान पार्टी को होता है.’

‘मुझे लगता है गहलोत बहुत अरसे से अनुभवी नेता हैं लेकिन राजनीति के इतिहास में अक्सर इस बात का जिक्र होता है कि गहलोत जी ने अपनी कूटनीति से अच्छे क़द्दावर चेहरों को चाहे वो किसी जाति के रहे हो उनको उभरने नहीं दिया ऐसे बहुत से उदाहरण हैं. नवलकिशोर शर्मा जी लेकर, राजेश पायलट, परसराम मदेरणा, ये उनकी अपनी सियासत है कि उन्होंने इतने वर्षों तक कूटनितिक तरीके से राजनीति चलायी है. इससे कांग्रेस पार्टी प्रभावित हुई है.’

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