डूबने लगा है रेगिस्तान का जहाज, भारत में तेजी से घट रही ऊंटों की संख्या

राजस्थान प्रदेश में 20वीं पशु गणना की गई. इस गणना के अंदर ऊंटों की संख्या के आंकड़े चौकाने वाले सामने आए हैं.

विश्व में ऊंटों की संख्या के लिहाज से भारत लगातार पीछे हो रहा है. अफ्रीका में ऊंट बढ़ रहे हैं और भारत में लगातार ऊंटों की संख्या में कमी हो रही है. पूरे विश्व में कुल 1.4 करोड़ ऊंट हैं जिसके लगभग 90 फीसदी ऊंट केवल अफ्रीका में है.

ऊंट राजा-रजवाड़ो की शाही सवारी में शामिल होते हैं. ऊंट को रेगिस्तान का जहाज भी कहा जाता है. BSF के जवान भी सीमा पर निगरानी के लिए ऊंट का सहारे लेते हैं. भारत-पाकिस्तान बॉर्डर पर हमारी सुरक्षा में जवानों का साथ देने वाले ऊंट अब पूरी तरह से खतरे में है.

20वीं पुश गणना में आंकडे चिंतानजनक

राजस्थान प्रदेश में 20वीं पशु गणना की गई लेकिन पशु गणना के अंदर रेगिस्तान के जहाज की संख्या के आंकड़े चौकाने वाले सामने आए हैं. हांलाकि पशु गणना में प्रदेश में गाय और भैसों की संख्या में वृद्वि हुई है. लेकिन प्रदेश में ऊंट व गधों की संख्या में भारी कमी दर्ज की गई है.

डूबता रेगिस्तान का जहाज

20वीं पशु गणना में ऊंटों की संख्या में 34.69 प्रतिशत कमी हुई ह़ै. यानि जहां पहले राजस्थान में ऊंटों की संख्या 3.26 लाख थी तो वहां पर ये संख्या धटकर 2.13 लाख रह गई है.

क्यों कम हो रही है ऊंटों की संख्या

जानकारों के मुताबिक ऊंटों की संख्या की कमी के पीछे कई कारण हैं. जानकारों की माने तो कमी का प्रमुख कारण ये हैं.

  • चरागाहों की कमी.
  • ऊंटों में प्रजनन की कमी.
  • युवा कम ऊंट पालन करते हैं.
  • चारे की कमी के साथ ऊंटों की धटती संख्या के लिए तस्करी और ऊंटों का अवैध रूप से वध भी जिम्मेदार है.

सरकार को क्या कदम उठाने चाहिए

  • ऊंट पालन के लिए जागरूकता अभियान चलाने चाहिए.
  • ऊंट को एक डेयरी पशु के रूप में विकसित करते हुए इसके लिए उन्नत चारागाहों के विकास पर सरकार ज्यादा से ज्यादा काम करें.
  • ऊंटों का प्रजनन बढ़े इस विषय पर सरकार को काम करना चाहिए,प्रजनन के लिए सरकार को टेस्ट टयूब वैज्ञानिक विधि भी उपयोग कर सकती है.
  • किसानों को जागरूक करना चाहिए खेती में ट्रैक्टर और मशीन की जगह ऊंटों का इस्तमाल करें.

अनुदान राशि बहुत कम 

राजस्थान की प्रदेश सरकार ने ऊंट की इस धटती संख्या को देखकर ऊंट विकास योजना की शुरुआत की थी. जिसके तहत हर ऊंटनी के प्रसव पर ऊंट पालक को 10 हजार रुपए की अनुदान राशि सरकार द्वारा दी जाती है. लेकिन ऊंट पालकों की माने तो यह राशि बहुत कम है. इस राशि को बढ़ाना चाहिए.

राज्य पशु का दर्जा भी दिया गया

राजस्थान सरकार ने वर्ष 2014 के अंदर ऊंट को बचाने के लिए इसे राज्य पशु का दर्जा भी दिया गया. इसको बचाने के लिए राज्य सरकार ने प्रयास भी किए लेकिन सही प्रयास होने के कारण लगातार संख्या में कमी होती जा रही है. भारत के 80 फीसदी से ज्यादा ऊंट राजस्थान में पाए जाते हैं.

राजस्थान में वर्ष 1991 तक ऊंटों की संख्या लगभग 10 लाख तक थी. इसके बाद से लगातार ऊंटों की संख्या कम हो रही है. अगर सरकार ने समय रहते इस विषय पर ध्यान नहीं दिया तो ऊंटों के अस्तित्व समाप्त हो सकता है. विलुप्त हो सकता है हमारा रेगिस्तान का जहाज?

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