Rajasthan के रण में अब बजरी कारोबारी की एंट्री, BJP ने कहा- माफिया से पैसा ले रही गहलोत सरकार

BJP विधायक और प्रदेश महामंत्री मदन दिलावर ने आरोप लगाया कि ये उसी बजरी करोबारी का होटल है, जहां पर गहलोत (Ashok Gehlor) ने अपने विधायकों को रूकवाया है. गहलोत अब डरा-धमका कर अपनी सरकार बचाना चाहते हैं.
gravel businessman in Rajasthan Political Crisis, Rajasthan के रण में अब बजरी कारोबारी की एंट्री, BJP ने कहा- माफिया से पैसा ले रही गहलोत सरकार

राजस्थान की सियासी उठापटक (Rajasthan Political Crisis) के बीच, जहां मुख्यमंत्री अशोक गहलोत (Ashok Gehlot) के अपने समर्थन ​वाले विधायकों को जयपुर (Jaipur) से जैसलमेर (Jaisalmer) शिफ्ट करने पर अब राजस्थान के चर्चित बजरी कारोबारी का नाम भी जुड़ गया है. ये नाम इसलिए जुड़ रहा है, क्योंकि गहलोत ने अपने गुट के विधायकों को जिस होटल सूर्यागढ़ में शिफ्ट किया, उस होटल का संबंध राजस्थान के बड़े बजरी किंग से जुड़ा है. भाजपा विधायक और प्रदेश महामंत्री मदन दिलावर ने आरोप लगाया कि ये वही बजरी करोबारी का होटल है, जहां पर गहलोत ने अपने विधायकों को रूकवाया है. गहलोत अब डरा-धमका कर अपनी सरकार बचाना चाहते हैं.

“कांग्रेस सरकार तस्करों से पैसा लेकर विधायकों पर कर रही खर्चा”

राजस्थान भाजपा के नवनियुक्त प्रदेश महामंत्री और कोटा से विधायक मदन ​दिलावर (Madan Dilawar) ने गहलोत सरकार पर बड़ा आरोप लगाते हुए कहा कि मुख्यमंत्री अशोक गहलोत अपनी सरकार बचाने के लिए तस्करों, डैकेतों से पैसा इकट्ठा करके अपने लोगों पर खर्चा कर रही है. इसका ताजा उदारण है ​जैसलमेर, जहां विधायक रूकवाए हुए हैं, वो बजरी कारोबारी मेघराज सिंह शेखावत का होटल है, जिसके और पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे (Vasundhara Raje) के बीच मिलिभगत के आरोप अशोक गहलोत पांच साल से लगा रहे थे. जब वो विपक्ष में थे.

“विधायकों को डरा-धमका कर रखा जा रहा”

दिलावर ने आगे कहा कि हालांकि बजरी कारोबारी और वंसुधरा राजे का कोई लेना-देना नहीं था. अभी डरा-धमका कर विधायकों को वहां रूकवाया गया है. इतना ही नहीं मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने जैसलमेर में गाजी फकीर का संरक्षण ले रखा है, जिस पर कई मुकदमें दर्ज हैं, जो हिस्ट्रीशीटर रहा है. कई बार राष्ट्रविराधी गतिविधियों का आरोप उस पर लगता रहा है.

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बीजेपी विधायक ने कहा कि कांग्रेस को राष्ट्र प्रेम से कोई लेना-देना नहीं है. ये अपनी सरकार बचाने के लिए किसी के भी चरणों में जाकर गिर सकते हैं. कल तक जिनकों ये चोर बता रहे थे, आज उनके साथ ब्लैकमेलिंग कर रही है गहलोत सरकार.

विपक्ष में रहते हुए गहलोत ने भी बनाया था मुद्दा

मालूम हो कि कांग्रेस ने विधानसभा चुनाव में बजरी के खानों के आवंटन को मुद्दा बनाया था, लेकिन उसी बजरी किंग के पांच सितारा होटल के अंदर गहलोत कैंप की बाड़ेबंदी है. वहीं कांग्रेस प्रवक्ता अर्चना शर्मा कहा कहना है कि भाजपा के सरकार को अस्थिर करने का षड्यंत्र का खुलासा हो गया है. इसलिए अब ये बौखला कर इस तरह के बयान दे रहे हैं. शर्मा ने कहा कि होटल में विधायकों को रखने का मतलब किसी को फायदा पहुंचाना नहीं है. अर्चना शर्मा ने कहा कि इस कारोबारी के रिश्ते तो पिछली वसुंधरा राजे की अुगवाई वाली सरकार के साथ माने जाते रहे हैं.

सुप्रीम कोर्ट की रोक के बाद भी जारी बजरी खनन

सुप्रीम कोर्ट ने बजरी खनन पर रोक लगा रखी है, लेकिन फिर बजरी का कारोबार धड़ल्ले से जारी है. राजस्थान में अब शराब माफियों की जगह बजरी माफिया ने ले ली. बजरी माफिया के आंतक का शिकार हर दूसरे दिन प्रदेश में कोई न कोई हो रहा है. बजरी के इस खेल के चलते पिछले छह साल से बजरी की कीमतें असमान छूने लगी हैं. बता दें कि 2013 में जब गहलोत विधानसभा चुनाव हारे और वसुंधरा राजे की अगुवाई में बीजेपी सत्ता में आई तब बीजेपी सरकार की नजर बजरी की इन खानों के आवंटन पर गई. कई तरह के आरोप-प्रत्यारोप भी लगते रहे. इस बीच सुप्रीम कोर्ट ने राजस्थान में बजरी खनन पर भी रोक लगा दी थी और तब से अब तक रोक जारी है.

क्या है असली कहानी?

दरअसल इस बजरी कारोबारी की कहानी बेहद दिलचस्प है, क्योंकि कहा जाता है कि बीजेपी के एक दिग्गज नेता के बिजनेस में इसकी साझेदारी है. ऐसे में अब कई सवाल खड़े हो रहे हैं कि बीजेपी के कुछ दिग्गज नेताओं से करीबी रिश्ता होने के बावजूद गहलोत का भरोसा इस कारोबारी के होटल पर क्यों है? सवाल ये खड़ा हो रहा है आखिर राज क्या है?

जयपुर वाले होटल में भी रहा विवाद

वहीं इससे पहले मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने जयपुर के जिस फेयरमाउंट होटल में विधायको को रखा, वो भी शुरू से विवादों में रहा है. हाल ही में आयकर और ईडी ने बाड़ेबंदी के दिन भी वहां छापेमारी की थी. होटल फेयरमाउंट के मालिक को ईडी ने भी पूछताछ के लिए तलब किया था. इतना ही नहीं होटल में मनी लॉड्रिंग के जरिए मॉरिशस से 96 करोड़ के निवेश के आरोप भी हैं.

इस होटल के मालिक मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के पुत्र वैभव गहलोत (Vaibhav Gehlot) के पार्टनर भी हैं. केंद्रीय एजेंसियों की इस होटल पर सख्ती के बाद गहलोत विधायकों को जैसलमेर ले गए, लेकिन वहां भी विवादों का साया पीछा नहीं छोड़ रहा है.

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