राजस्थान: कोटा के बाद अब बीकानेर के पीबीएम अस्पताल में 162 बच्चों की हुई मौत

बीकानेर का पीबीएम अस्पताल (PBM Hospital) संभाग का सबसे बड़ा अस्पताल है. दिसंबर के आंकड़ों के हिसाब से अस्पताल में हर दिन पांच से ज्यादा बच्चों की मौत हो रही है.
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कोटा के बाद अब बीकानेर में भी बच्चों की मौत का मामला सामने आया है. बीकानेर के पीबीएम शिशु अस्पताल में बीते साल में सिर्फ दिसंबर में ही 162 बच्चों की मौत हो गई है. यह आंकड़ा कोटा के जे. के. अस्पताल से काफी ज्यादा है. वहीं कोटा में पिछले 35 दिनों में 110 बच्चों की मौत हो चुकी है.

बीकानेर का पीबीएम अस्पताल (PBM Hospital) संभाग का सबसे बड़ा अस्पताल है. दिसंबर के आंकड़ों के हिसाब से अस्पताल में हर दिन पांच से ज्यादा बच्चों की मौत हो रही है. दिसंबर के महीने में पीबीएम अस्पताल में 2219 बच्चे जन्में और भार्ती हुए. जिनमें से 162 यानि 7.3 फीसदी बच्चों की मौत हो गई है. पूरे साल में जनवरी से दिसंबर तक यहां कुल 1681 बच्चों की मौत हो चुकी है.

सरदार पटेल मेडिकल कॉलेज के प्रिंसिपल डॉ. एच. एस. कुमार ने अस्पताल की लापरवाही को नकारते हुए कहा कि ज्यादातर मौत ऐसे नवजात बच्चों की होती हैं, जो गंभीर हालत में आस-पास के गांव से रेफर होकर अस्पताल में पहुंचते हैं. डॉ. कुमार ने कहा, “यहां पहुंचने पर हालत इतनी गंभीर होती है कि उन्हें बचाना मुश्किल हो जाता है. जननी सुरक्षा योजना और भी कई लाभकारी योजनाओं के चलते दूरदराज इलाकों के गंभीर बच्चे संभाग के इकलौते पीबीएम अस्पताल (PBM Hospital) के आईसीयू (ICU) के लिए रेफर कर दिए जाते हैं और पीबीएम के डॉक्टर उनका अच्छा इलाज करने का प्रयास करते हैं फिर भी गंभीर बच्चों की मौत हो जाती है.”

इससे एक दिन पहले ही बीकानेर के कलेक्टर कुमार पाल गौतम ने जब पीबीएम अस्पताल का दौरा किया तो वहां उन्हें कई खामियां देखने को मिलीं. इस पर उन्होंने डॉक्टरों को काफी लताड़ भी लगाई.

अगर व्यवस्थाओं की बता की जाए तो, 220 बैड वाले पीबीएम शिशु हॉस्पिटल में 140 बैड जनरल वार्ड के हैं. वहीं 72 बैड नियोनेटल इंटेंसिव केयर यूनिट यानि नवजात बच्चों की देखभाल के लिए हैं. इसके बावजूद जनरल वार्ड में भर्ती बच्चों की बेडशीट काफी गंदी हो चुकी हैं. तो वहीं उन्हें रात को सर्दी से बचाने के लिए ओढ़ने को कंबल भी नहीं दिए जा रहे हैं. फिलहाल इस घटना के सामने आने के बाद अस्पताल प्रशासन ने चुप्पी साध ली है और हर कोई अस्पताल की व्यवस्थाएं चाक-चौबंद दिखाने का प्रयास कर रहा है.

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