Rajasthan government's new excise policy, राजस्थान सरकार की नई आबकारी नीति, शराब बंदी के वादे के बावजूद रेवेन्यू बढ़ाने पर जोर
Rajasthan government's new excise policy, राजस्थान सरकार की नई आबकारी नीति, शराब बंदी के वादे के बावजूद रेवेन्यू बढ़ाने पर जोर

राजस्थान सरकार की नई आबकारी नीति, शराब बंदी के वादे के बावजूद रेवेन्यू बढ़ाने पर जोर

राजस्थान सरकार ने शनिवार को नई आबकारी नीति जारी की है. वैसे तो यह नीति 31 मार्च 2021 तक वैध रहेगी लेकिन माना जा रहा है कि इसे एक साल और बढ़ाया भी जा सकता है.
Rajasthan government's new excise policy, राजस्थान सरकार की नई आबकारी नीति, शराब बंदी के वादे के बावजूद रेवेन्यू बढ़ाने पर जोर

राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत सत्ता में आने से पहले और सत्ता में आने के बाद कई बार राज्य में शराब बंदी को लेकर बयान दे चुके हैं. वहीं पिछले दिनों मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने खुद मंत्रालय के अधिकारियों को बिहार जाकर वहां पर चल रही शराब बंदी की रिपोर्ट लाने को भी कहा था.

जिसके बाद राजस्थान सरकार की एक 4 सदस्यों की टीम ने 5 दिन तक बिहार में रहकर एक रिपोर्ट भी तैयार की, जिसमें बताया गया कि बिहार में शराबंदी से वहां के लोगों के जीवन स्तर में काफी सुधार हुआ है.

पिछले साल दिसंबर में बिहार गई इस टीम ने गोपालगंज के सीमावर्ती इलाकों का दौरा करने के बाद रिपोर्ट सौंपी थी, लेकिन अब राजस्थान सरकार ने अधिकारियों की इस रिपोर्ट को ठंडे बस्ते में रखते हुए नई आबकारी नीति जारी कर दी है. जिसमें कमाई पर ज्यादा फोकस किया गया है, हालांकि सरकार मद्य संयम नीति के जरिए शराब रोकथाम के लिये जागरूकता की बात कह रही है.

क्या है नई आबकारी नीति?

राजस्थान सरकार ने शनिवार को नई आबकारी नीति जारी की है. वैसे तो यह नीति 31 मार्च 2021 तक वैध रहेगी लेकिन माना जा रहा है कि इसे एक साल और बढ़ाया भी जा सकता है. वहीं राज्य सरकार की इस नई नीति से राजस्व बढ़ने की भी काफी उम्मीद है, क्योंकि इस नीति के अंदर कमाई पर ज्यादा फोकस रखा गया है. साथ ही सरकार ने आबकारी से प्राप्त होने वाली आय का अपना लक्ष्य भी बढ़ा दिया है.

राजस्थान सरकार ने इस साल का अपना लक्ष्य लगभग 10,500 करोड़ का रखा है. इसके तहत शराब की दुकानों के लिए नए लाइसेंस भी जारी किए जाएंगे. वहीं इस नीति के तहत आबकारी विभाग की वित्तीय स्थित को सुधारने के लिए विभाग और पुलिस द्वारा 2020-21 से पहले अवैध शराब के मामलों में जब्त वाहनों की नीलामी भी की जायेगी.

इस नीलामी से करीब 25 करोड़ रुपए के राजस्व की उम्मीद है. जिसका 50 फीसदी हिस्सा विभाग में नए संसाधन खरीदने के लिए इस्तेमाल किया जाएगा. साथ ही अलवर के बहरोड़ और भरतपुर में आबकारी प्रयोगशाला स्थापित करने का प्रस्ताव भी इस नीति में शामिल है.

इसके अलावा नई आबकारी नीति में शराब की दुकानों की संख्या में कोई बदलाव नहीं किया गया है. न ही शराब बेचने के समय में कोई बदलाव किया गया है. हालांकि सरकार ने शराब की दुकान के लाइसेंस और क्लब-बार के लाइसेंस की फीस जरूर बढ़ाई है.

इसमें 5 स्टार होटल के लिए 30 लाख रुपए सालाना, 4 स्टार होटल के लिए 22 लाख रुपए, 3 स्टार होटल के लिए 15 लाख रुपए और लग्जरी ट्रेन के लिए 10 लाख रुपए की फीस रखी गई है

मद्य संयम नीति पर दिया जोर

राजस्थान सरकार का आबकारी विभाग हर बार आबकारी नीति के साथ-साथ मद्य संयम नीति भी जारी करता है. इसके तहत शराब से होने वाले नुकसान का प्रचार-प्रसार और शराब की उच्च गुणवत्ता पर ध्यान दिया जाता है.

यहां मजे की बात यह है कि आबकारी विभाग हर बार मद्य संयम नीति पर काम करने के दावे तो हमेशा करता लेकिन हर बार अधिकारियों का ध्यान इस नीति पर कम बल्कि शराब बिक्री पर ज्यादा होता है.

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