राजस्थान HC ने बिना पढ़े-लिखे लोगों से ड्राइविंग लाइसेंस वापस लेने का आदेश क्यों जारी किया?

दीपक सिंह नाम के एक शख़्स ने याचिका दायर कर परिवहन विभाग को ट्रांसपोर्ट वाहन चलाने के लिए लाइसेंस जारी करने का निर्देश जारी करने को कहा था.

नई दिल्ली: राजस्थान हाई कोर्ट ने पैदल यात्रियों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए सभी निरक्षर व्यक्तियों यानि कि वैसे लोग जो पढ़े-लिखे नहीं हैं उनसे ड्राइविंग लाइसेंस वापस लेने का आदेश जारी किया है.

हाईकोर्ट ने आदेश जारी करने से पहले कहा कि निरक्षर ड्राइवर सड़कों और चौराहों पर लगे साइनबोर्ड्स और चेतावनी नहीं पढ़ सकते हैं. वो पैदल चलने वालों लोगों के लिए ख़तरा हैं इसलिए उनके ड्राइविंग लाइसेंस वापस लिए जाएं.

दरअसल दीपक सिंह नाम के एक शख़्स ने याचिका दायर कर परिवहन विभाग को ट्रांसपोर्ट वाहन चलाने के लिए लाइसेंस जारी करने का निर्देश जारी करने को कहा था. इस शख़्स को तकरीबन 13 साल पहले हल्के मोटर वाहन चलाने के लिए लाइसेंस जारी किया गया था.

याचिका पर विचार करते हुए जस्टिस संजीव प्रकाश शर्मा ने पाया कि याचिकाकर्ता निरक्षर है, बावजूद इसके उसे ड्राइविंग लाइसेंस प्रदान किया गया.

जिसके बाद जस्टिस संजीव प्रकाश शर्मा ने दीपक सिंह की याचिका ख़ारिज़ करते हुए कहा, ‘अदालत का मानना है कि मोटर वाहन नियमों को न केवल लाइसेंस लेने वाले व्यक्तियों के लाभ के लिए तैयार किए जाने की आवश्यकता है, बल्कि उन लोगों को भी नियमों को ध्यान में रखना चाहिए जो सड़कों का उपयोग कर रहे हैं.’

यहां तक की कोर्ट ने याचिकाकर्ता का हल्के मोटर वाहन (एलएमवी) वाला ड्राइविंग लाइसेंस भी वापस लेने का आदेश दिया है. साथ ही सरकार से एक महीने के भीतर अनुपालन रिपोर्ट दाखिल करने को भी कहा गया है.

हालांकि केंद्रीय मोटर वाहन नियम (सीएमवीआर) में गैर-वाणिज्यिक हल्के मोटर वाहनों के लिए ड्राइविंग लाइसेंस प्राप्त करने के लिए न्यूनतम योग्यता का कोई प्रावधान नहीं है. नियम के मुताबिक प्रत्येक आवेदक को सड़क और यातायात के संकेत से जुड़े कुछ वस्तुनिष्ठ प्रश्न के जवाब देने होते हैं.

वहीं वाणिज्यिक वाहन का ड्राइविंग लाइसेंस पाने के लिए आवेदक को कम से कम आठवीं पास होना चाहिए.