राजस्थान सियासी संकट: स्पीकर की अर्जी पर सुप्रीम कोर्ट में सिब्बल ने दी ये दलील, पढ़ें- बेंच ने क्या कहा

सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) की टिप्पणी - असंतोष जाहिर कर रहे विधायकों की आवाज इस तरह दबाई नहीं जा सकती, वे जनता के चुने हुए प्रतिनिधि हैं, फिर तो लोकतंत्र ख़त्म हो जाएगा, क्या वे अपनी असहमति व्यक्त नहीं कर सकते?
Rajasthan political crisis in the Supreme Court, राजस्थान सियासी संकट: स्पीकर की अर्जी पर सुप्रीम कोर्ट में सिब्बल ने दी ये दलील, पढ़ें- बेंच ने क्या कहा

राजस्थान विधानसभा के स्पीकर सीपी जोशी की याचिका पर सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने टिप्पणी की है कि क्या चुने गए प्रतिनिधि अपनी असहमति नहीं जता सकते? अगर असंतोष की आवाज को दबाया जाएगा तो लोकतंत्र खत्म हो जाएगा. सुप्रीम कोर्ट ने राजस्थान हाई कोर्ट से कहा है कि वह 24 जुलाई को अपना आदेश पारित करें, लेकिन आदेश सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर निर्भर करेगा. सुप्रीम कोर्ट सोमवार को अगली सुनवाई करेगी.

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सचिन पायलट और कांग्रेस के 18 बागी विधायकों को स्पीकर द्वारा अयोग्यता का नोटिस जारी करने के मामले पर राजस्थान हाई कोर्ट कल फैसला सुनाएगा. आइए, जानते हैं कि सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान स्पीकर के वकील कपिल सिब्बल ने क्या दलील दी और जस्टिस बेंच ने उनसे क्या कहा-

सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी – असंतोष विधायकों की आवाज इस तरह दबाई नहीं जा सकती, वे जनता के चुने हुए प्रतिनिधि हैं, फिर तो लोकतंत्र ख़त्म हो जाएगा, क्या वे अपनी असहमति व्यक्त नहीं कर सकते?

सिब्बल: लेकिन फिर उन्हें समझाना पड़ेगा. यह स्पीकर ही तय करेंगे, कोई कोर्ट नहीं.

SC: यह सिर्फ एक दिन की बात है. आप इंतजार क्यों नहीं कर सकते?

SC ने सिब्बल से पूछा: इंट्रा-पार्टी लोकतंत्र पर आपका क्या विचार है?

SC: क्या पार्टी की बैठक में भाग लेने के लिए व्हिप जारी किया जा सकता है?

सिब्बल ने इनकार किया कि जोशी ने बैठक के लिए व्हिप जारी किया. “यह केवल एक नोटिस था, व्हिप नहीं.”

सिब्बल- लेकिन यह एक बैठक में शामिल नहीं होने से ज्यादा यह उनकी पार्टी विरोधी गतिविधियों के बारे में है.

जस्टिस अरूण मिश्रा ने स्पीकर के वकील कपिल सिब्बल से पूछा कि मान लीजिए किसी नेता का किसी दूसरे नेता पर भरोसा नहीं, तो क्या आवाज उठाने पर उसे अयोग्य करार दिया जाएगा, पार्टी में रहते हुए वे अयोग्य नहीं हो सकते, फिर ये यह एक उपकरण बन जाएगा और कोई भी आवाज नहीं उठा सकेगा लोकतंत्र में, असंतोष की आवाज इस तरह बंद नहीं हो सकती.

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि कुछ मसले पार्टी के आंतरिक लोकतंत्र से जुड़े होते हैं.

सिब्बल- स्पीकर को तय करने दिया जाए कि विधानसभा के बाहर की गतिविधि के लिए इन विधायकों पर कार्रवाई हो सकती है या नहीं.

विधायकों के वकील मुकुल रोहतगी ने कहा कि स्पीकर ने खुद दो बार हाईकोर्ट में कार्रवाई टालने पर सहमति दी है.

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि ये लोकतंत्र से संबंधित महत्वपूर्ण प्रश्न हैं. लोकतंत्र कैसे चलेगा? ये बहुत गंभीर मुद्दे हैं. इस मामले को डिटेल में सुना जाएगा, इसके लिए विस्तृत सुनवाई की आवश्यकता होगी.

सिब्बल: तो हाईकोर्ट के आदेश को स्थगित करें.

SC: लेकिन यही हमें जांचने की जरूरत है.

सिब्बल: हाईकोर्ट में लंबित याचिका यहां स्थानांतरित करें.

SC : अभी नहीं.

इससे पहले वकील कपिल सिब्बल ने राजस्थान विधानसभा के स्पीकर का पक्ष रखा-

कपिल सिब्बल ने सुप्रीम कोर्ट में 1992 के किहोटो होलोहॉन मामले में दिए संविधान पीठ के फैसले का हवाला दिया, कहा कि इस फैसले के मुताबिक अयोग्यता के मसले पर स्पीकर का फैसला आने से पहले कोर्ट दखल नहीं दे सकता है. अयोग्य ठहराने की प्रकिया पूरी होने से पहले कोर्ट में दायर कोई भी याचिका सुनवाई योग्य नहीं है.

सिबल ने सुप्रीम कोर्ट के एक अन्य मामले में हाल ही में दिए गए आदेश का हवाला दिया जिसमें सुप्रीम कोर्ट ने स्पीकर को एक उचित समय में फ़ैसला लेने का आग्रह किया था, न कि स्पीकर को कोई आदेश या स्पीकर को तय तारीख़ पर अयोग्य घोषित करने की प्रक्रिया पूरी करने या रोकने के लिए कहा गया था.

SC ने सिब्बल से पूछा- इस मामले में विधायकों की किस आधार पर अयोग्यता मांगी गई है?

सिब्बल : ये विधायक पार्टी की बैठक में शामिल नहीं हुए. वे पार्टी विरोधी गतिविधियों में लिप्त हैं. उन्होंने साक्षात्कार दिया कि वे एक फ्लोर टेस्ट चाहते हैं. वे हरियाणा के एक होटल में हैं. वह अपनी एक अलग पार्टी बनाने की साज़िश में लगे हुए हैं. वे राज्य की मौजूदा सरकार को गिराना चाहते हैं.

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