रणथंभौर नेशनल पार्क में सरेआम बाघ का शिकार, पकड़ने गई पुलिस टीम पर गांववालों ने किया पथराव

रणथंभौर नेशनल पार्क में पिछले 9 साल में 26 बाघ लापता है. हाल ही इसकी रिपोर्ट वन विभाग ने राज्य सरकार को भेजी है. लेकिन अब तक राज्य सरकार ने जिम्मेदारों पर कोई एक्शन नहीं लिया है.
Tiger hunt Ranthambore National Park, रणथंभौर नेशनल पार्क में सरेआम बाघ का शिकार, पकड़ने गई पुलिस टीम पर गांववालों ने किया पथराव

राजस्थान के रणथंभौर में बाघ के शिकार का मामला सामने आया है. बाघ का शिकार करने के बाद शिकारी डंडे पर लटकाकर अपने साथ ले गए. यह घटना सवाई माधोपुर में घटी. जब पुलिस को इस बात की सूचना मिली तो वे उस गांव में पहुंचे जहां शिकारी बाघ को ले गए थे.

पुलिस के साथ वन विभाग की टीम को देखकर गांव वालों ने टीम पर हमला कर दिया. पुलिस को हवाई फायरिंग करके अपनी जान बचाकर वापस आना पड़ा. हमले में 6 वनकर्मी घायल हो गए.

दो शिकारियों ने पुलिस के सामने किया आत्मसमर्पण

इस घटना में 12 ग्रामीणों को भी चोटें आईं हैं. वहीं हमले के बाद शिकारियों ने असरार और सुनेफ उर्फ कालू ने देसी टोपीदार बंदूक समेत बोदल नाका पर आत्मसमर्पण कर दिया. पुलिस ने उनको गिरफ्तार कर अन्य नामजद आरोपियों के खिलाफ मामला दर्ज किया है. बता दें कि पुलिस 11 फरवरी को भी शिकारियों को पकड़ने गई थी. लेकिन शिकारी उनके हाथ नहीं आए थे.

9 साल में 26 बाघ लापता

खुलेआम बाघों का शिकार होना किसी त्रासदी से कम नहीं है. वही रणथंभौर नेशनल पार्क में पिछले 9 साल में 26 बाघ लापता है. हाल ही इसकी रिपोर्ट वन विभाग ने राज्य सरकार को भेजी है. लेकिन अब तक राज्य सरकार ने जिम्मेदारों पर कोई एक्शन नहीं लिया है. अब इन मिसिंग टाइगर पर जब टीवी 9 भारतवर्ष ने जिम्मेदारों से बात करने की कोशिश की तो उन्होनें कोई जवाब नहीं दिया.

1973 में राष्ट्रीय पशु घोषित

20 वीं शताब्दी की शुरुआत में अंग्रेजों की हुकमत अपनी ताकत का दिखावा करने के लिये ब्रिटिश आर्मी के अधिकारी रियासतों के साथ मिलकर अक्सर बाघों के शिकार का खेल खेला करते थे. हाथियों पर सवार ब्रिटिश आर्मी के जवान गाय और भेड़ों को चारा बनाकर घेराबंदी करते थे करके शिकार करते थे. शिकार करना उनके शौक में शुमार हो चुका था.

उस दौर में हजारों की तादात में बाघों का शिकार कर बाघों को मारा गया. इस दौर में शिकार की वजह से भारत में बाघों की संख्या में बढ़े पैमाने पर कमी आई. वहीं आजादी के बाद से लगातार भारत बाघों के संरक्षण के लिए काम कर रहा है. सन् 1973 में बाघ को राष्ट्रीय पशु घोषित किया गया.

सिस्टम पर उठ रहे सवाल

वहीं बाद में वन्य जीवों के सरंक्षण के लिये समय-समय पर देशभर में अभ्यारण और नेशनल पार्क बनाए गए. उन्हीं में राजस्थान का रणथंभौर नेशनल पार्क शुमार है. जहां बड़ी संख्या में बाघों का घर है लेकिन इन दिनों इनके घर के अंदर कुछ शिकारियों ने हमला कर रखा है. इस तरह शिकार की तस्वीरें को देखकर सिस्टम पर कई सवाल खड़े हो रहे हैं.

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