वो वजहें जिनकी वजह से गहलोत-पायलट के बीच आई दरार! ऐसे हुई थी अनबन की शुरुआत

सचिन पायलट (sachin Pilot) के करीबी नेता कहते हैं कि वो राज्य सरकार में अपने समर्थकों के लिए महत्वपूर्ण पोर्टफोलियो चाहते हैं. इस वक्त पायलट के पास लोक निर्माण विभाग, ग्रामीण विकास और पंचायती राज, विज्ञान और प्रौद्योगिकी और सांख्यिकी विभाग है.
reasons behind rift between Gehlot-Pilot! know how the conflict started, वो वजहें जिनकी वजह से गहलोत-पायलट के बीच आई दरार! ऐसे हुई थी अनबन की शुरुआत

राजनीतिक विशेषज्ञों की मानें तो राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत और उपमुख्यमंत्री सचिन पायलट के बीच मतभेद (Rajasthan Political Crisis) 2018 में सरकार के गठन के साथ ही शुरू हो गए थे. विधानसभा चुनावों में कांग्रेस ने भारतीय जनता पार्टी को राजस्थान की सत्ता से बाहर कर दिया था.

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हिन्दुस्तान टाइम्स की खबर के मुताबिक सूत्रों ने कहा कि चुनाव परिणाम के वक्त से ही दोनों में कई मुद्दों पर अनबन शुरू हो गई थी. हाल ही में पैदा हुआ विवाद राजस्थान कांग्रेस प्रमुख का पद था. जनवरी 2014 से पायलट राजस्थान कांग्रेस का अध्यक्ष पद संभाल रहे हैं और उस पद पर किसी और को नियुक्त करने की बात कही गई थी.

करीबियों के लिए महत्वपूर्ण पोर्टफोलियो चाहते हैं पायलट

पायलट के करीबी नेता कहते हैं कि वो राज्य सरकार में अपने समर्थकों के लिए महत्वपूर्ण पोर्टफोलियो चाहते हैं. इस वक्त पायलट के पास लोक निर्माण विभाग, ग्रामीण विकास और पंचायती राज, विज्ञान और प्रौद्योगिकी और सांख्यिकी विभाग है. राजनीतिक चर्चा ये भी है कि पायलट का अपने नौकरशाहों के साथ मतभेद था जिसमें खास तर पर पीडब्ल्यूडी में, यहां कुछ अधिकारियों को पायलट का करीबी नहीं माना जाता है.

2019 में अपनी सरकार के खिलाफ हुए थे पायलट

चुनाव परिणामों के बाद पायलट के करीबियों ने उन्हें जीत का श्रेय दिया, लेकिन कांग्रेस हाईकमान ने सीएम गहलोत (Ashok Gehlot) को बनाया और पायलट को उपमुख्यमंत्री. अक्टूबर 2019 में नगरपालिका चुनाव से पहले राज्य में एक नियम लाया गया, जिसमें गैर निर्वाचित सदस्य भी महापौर और नगर पालिकाओं के प्रमुखों के पदों के लिए खड़े हो सकते थे. पायलट ने इस कदम की कई मौकों पर खिलाफत की. उन्होंने कहा कि इससे सिविक बॉडी में बैक डोर एंट्री का रास्ता साफ होगा. जिसके बाद इस फैसले को वापस ले लिया गया.

कोटा में बच्चों की मौत पर पायलट ने सरकार की आलोचना की

इस साल जनवरी में कोटा में बेड्स की कथित तौर पर कमी और सुविधाएं न होने के कारण 107 बच्चों ने दम तोड़ दिया, जिसके बाद पायलट ने अपनी ही सरकार से मामले में जवाबदेही तय करने को कहा. स्वास्थ्य मंत्री रघु शर्मा को गहलोत का वफादार माना जाता है.

गहलोत ने ऐसे साधा था सचिन पायलट पर निशाना

राजस्थान में लोकसभा चुनावों में कांग्रेस एक भी सीट नहीं जीती, इस पर गहलोत ने कहा था कि पायलट वैभव गहलोत (अशोक गहलोत के बेटे) की हार की जिम्मेदारी लें, क्योंकि वो राज्य में अध्यक्ष पद की भूमिका में हैं.

राजनीतिक विशेषज्ञ प्रकाश भंडारी ने कहा कि पार्टी ने लंबे समय से अपने दो नेताओं के बीच के संकट को नजरअंदाज किया है. भंडारी ने कहा कि नेतृत्व को संगठन के प्रभारी महासचिव केसी वेणुगोपाल को भेजना चाहिए ताकि इस मुद्दे को सुलझाया जा सके.

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