‘छन से जो टूटे कोई सपना…’ महाराष्ट्र में पवार-राजस्थान में पायलट की घर वापसी, आखिर भारी पड़े ‘महारथी’

सबकुछ जुड़ने के बीच राजस्थान की सियासत (Rajasthan Politics) में एक राजनीतिक सपना टूट गया, बिल्कुल वैसे ही जैसे कुछ महीनों पहले महाराष्ट्र (Maharashtra) में भी एक सपना टूटा था, वहां भी एक महत्वकांक्षा नंबर गेम और सियासत के महारथियों के आगे हार गई.

राजस्थान की सियासत (Rajasthan Politics) का ऊंट किस करवट बैठना था ये कल पायलट कैंप (Pilot Camp) की बैठक, सचिन पायलट (Sachin Pilot) के बयान और कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी (Sonia Gandhi) के अशोक गहलोत (Ashok Gehlot) को फोन ने साफ कर दिया. पायलट ने कांग्रेस की फ्लाइट की कॉकपिट में फिर शामिल होने के संकेत दे दिए हैं. राज्य में पिछले काफी दिनों से चल रहा सियासी उठा-पटक का खेल शांति से खत्म होता नज़र आ रहा है.

हमारी पार्टी में शांति और भाईचारा बना रहेगा

अशोक गहलोत (Ashok Gehlot) ने भी बयान जारी कर दिया है कि हमारी पार्टी में शांति और भाईचारा बना रहेगा. बीजेपी (BJP) ने सरकार को गिराने की पूरी कोशिश की, लेकिन हमारी पार्टी के सभी विधायक एक साथ हैं, एक ने भी हमारा साथ नहीं छोड़ा. गहलोत के इस बयान में एक शब्द शायद पायलट की तरफ इशारा कर रहा है.

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सबकुछ जुड़ने के बीच राजस्थान की सियासत में एक राजनीतिक सपना (Political Dream) टूट गया, बिल्कुल वैसे ही जैसे कुछ महीनों पहले महाराष्ट्र (Maharashtra) में भी एक सपना टूटा था, वहां भी एक महत्वकांक्षा नंबर गेम और सियासत के महारथियों के आगे हार गई. राजस्थान में सचिन पायलट का सीएम बनने का सपना और महाराष्ट्र में अजित पवार (Ajit Pawar) का डिप्टी सीएम बनने का सपना.

दो सपनों का एक जैसा टूटना

भले ही दोनों राज्यों की स्थितियां बेहद अलग रही हों, लेकिन सपने तो एक जैसे ही थे. पायलट के सपने ने राजस्थान की सियासत में पिछले महीने से सियासी भूचाल ला दिया था. लड़ाई सड़क से लेकर हाईकोर्ट, सुप्रीम कोर्ट तक गई, सरकार राजभवन के दरवाजे पर भी धरने पर बैठ गई, लेकिन सुलह हुई दिल्ली जाकर, कांग्रेस हाईकमान के दरवाज़े पर.

अब्दुल हमीद अदम का एक शेर है

“शायद मुझे निकाल कर पछता रहे हों आप
महफ़िल में इस ख़्याल से फिर आ गया हूं मैं”

राजस्थान (Rajasthan) के इस पूरे सियासी घटनाक्रम पर फिलहाल ये शेर एकदम फिट बैठता है, मानों सचिन पायलट (Sachin Pilot), सीएम अशोक गहलोत (Ashok Gehlot) से कुछ यूं दिल के जज़्बात शेयर करने की कोशिश कर रहे हैं. राजस्थान में सियासी झगड़ा राजस्थान पुलिस के विशेष कार्यबल (एसओजी) के राज्य में विधायकों की खरीद-फरोख्त और निर्वाचित सरकार को अस्थिर करने के आरोपों के संबंध में 10 जुलाई को एक मामला दर्ज करने से शुरू हुआ.

ऐसे बगावती तेवरों में आए पायलट

ये बात पायलट को खली और उन्होंने बगावती रवैया अख्तियार कर लिया. सियासी गलियारों में चर्चा थी कि सचिन पायलट राजस्थान विधानसभा में जीत के बाद से सीएम बनना चाहते थे, लेकिन उनका सपना अशोक गहलोत को मुख्यमंत्री बनाने के साथ टूट गया. पार्टी में उसी वक्त से दोनों के बीच सबकुछ सही नहीं चल रहा था. हालांकि नोटिस वाली बात के बाद लड़ाई खुलकर सामने आई. अब उम्मीद है कि कांग्रेस ने इस सियासी उठापटक पर जीत दर्ज की है.

उस रोज़ वो हुआ जिसने सबको हैरत में डाल दिया

अब बात दूसरे सपने की, अजित पवार (Ajit Pawar) राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (NCP) के मंझे हुए नेता है, साथ ही शरद पवार के भतीजे भी हैं, लेकिन उस रोज़ कुछ ऐसा हुआ जिसने सभी को हैरत में डाल दिया.

ऐसे टूटा अजित पवार का सपना

पर्दे के सामने जहां कांग्रेस-शिवसेना-NCP के बीच सरकार बनाने को लेकर कोशिश चल रही थी, लेकिन पवार 22 विधायकों को लेकर भारतीय जनता पार्टी के साथ शामिल हो गए. रातों रात सियासी समीकरण ऐसा बना कि नवंबर की सर्दी में अपने चाचा शरद यादव को झटका देते हुए अजित पवार एक सपना लेकर महाराष्ट्र सरकार में शामिल हो गए.

23 नवंबर 2019 को राज्यपाल भगत सिंह कोश्यारी ने देवेंद्र फडणवीस को सीएम और अजित पवार को डिप्टी सीएम पद की शपथ दिला दी. एनसीपी के 22 विधायकों का समर्थन पत्र राज्यपाल को सौंपा गया था. हालांकि सियासत के महारथी शरद पवार के आगे ये सपना टूट गया.

80 घंटे रहे उपमुख्यमंत्री

अजित पवार 80 घंटे उप मुख्यमंत्री रहे और उसके बाद उनकी घर वापसी हुई. घर (NCP) जाने के बाद उन्होंने कहा कि कोई बगावत नहीं की. इस दौरान उनके चेहरे पर कोई शिकन नज़र नहीं आई.

ऐसे में दोनों राज्यों की राजनीति को एक चश्मे से देखें तो 2 महारथियों के आगे दो सपनों का टूटना नज़र आता है, एक राजस्थान में पायलट का तो दूसरा महाराष्ट्र में अजित पवार का.

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