RSS से होगा राजस्थान का अगला BJP प्रदेश अध्यक्ष, सतीश पूनिया का नाम रेस में सबसे आगे

मदन लाल सैनी का निधन बीते सोमवार को दिल्ली में हुआ जिसके बाद राजस्थान में BJP प्रदेश अध्यक्ष की कुर्सी खाली हो गई है.

जयपुर. मरू प्रदेश में भारतीय जनता पार्टी (BJP) के प्रदेश अध्यक्ष की जिम्मेदारी किसे दी जाए यह फैसला लेना पिछले 20 सालों में भाजपा के लिए आसान नहीं रहा है. इसका ताजा उदारण साल 2018 का है. क्योंकि जिन परिस्थितियों में BJP प्रदेश अध्यक्ष पद पर मदन लाल सैनी को बैठाया गया था अगर उसपर गौर किया जाए तो यह बात तो तय मानी जानी चाहिए कि अब सैनी के निधन के बाद एक बार से राजस्थान में BJP प्रदेश अध्यक्ष पद की कुर्सी को लेकर गुटबाजी देखेने को मिल सकती है. लेकिन सूत्र से जानकारी मिल रही है कि इस बार प्रदेश अध्यक्ष राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) पृष्टभूमि का होना लगभग तय है.

अटकलों का बाजार गर्म

मदन लाल सैनी का निधन बीते सोमवार को दिल्ली में हुआ जिसके बाद से ही BJP कार्यकर्ताओं और संगठन में प्रदेश अध्यक्ष पद के लिए अलग-अलग अनुमान लगाए जा रहे हैं. वहीं हर कोई इस बात की चर्चा कर रहा है BJP का अगला प्रदेश अध्यक्ष कौन बनेगा?

राजस्थान में कई सालों से है BJP में गुटबाजी

BJP में प्रदेश अध्यक्ष पद को लेकर गुटबाजी कोई नई नहीं है. कई सालों से BJP के केन्द्रीय नेतृत्व को राजस्थान में अध्यक्ष बनाने के लिए गुटबाजी का सामना करना पड़ा है. दरअसल BJP राजस्थान में एकछत्र राज करने वाले नेता भैरो सिंह शेखावत को दरकिनार कर जब वसुंधरा राजे को BJP का प्रदेश अध्यक्ष बनाया गया था तब उनका काफी विरोध हुआ था. तब से अब तक यही चल रहा है. ओम माथुर होें या अरूण चतुर्वेदी या फिर गुलाब चंद कटारिया, राजेन्द्र राठौड़ हर बार BJP के प्रदेश अध्यक्ष पद को लेकर यू ही घमासान चलता रहता है.

BJP, RSS से होगा राजस्थान का अगला BJP प्रदेश अध्यक्ष, सतीश पूनिया का नाम रेस में सबसे आगे
आमेर विधायक सतीश पूनिया.

कौन हो सकता है अगला प्रदेश अध्यक्ष

प्रदेश अध्यक्ष पद को लेकर यू तो कई नाम सामने आ रहे है. लेकिन सबसे ज्यादा आमेर विधायक सतीश पूनिया का नाम चर्चा में है. दरअसल सतीश पूनिया आरएसएस पृष्टभूमि के माने जाते है. शुरू से ही आखिल भारतीय विधार्थी परिषद के साथ काम करते आए हैं. राजस्थान प्रदेश संगठन मंत्री चंन्द्रशेखर भी पुनिया के पक्ष में है. जबकि पूर्व मुख्यमंत्री वसुधंरा राजे चाहती हैं कि मदन लाल सैनी के मित्र और राज्यसभा सांसद नारायण पंचारिया को अध्यक्ष बनाया जाए क्योंकि नारायण पंचारिया आरएसएस और वंसुधरा और पार्टी के बीच बराबर का संबंध रखते है, वहीं जयपुर ग्रामीण सांसद और पूर्व केन्द्रीय मंत्री राज्यवर्धन सिंह राठौड़ को इस बार मोदी सरकार की केबिनेट में नहीं शामिल किया गया है. ऐसे में उनके नाम की भी चर्चा जोरों पर है. लेकिन संगठन का एक खेमा उनका जमकर विरोध कर रहा है. वहीं चुरू से विधायक और विधानसभा के उपनेता प्रतिपक्ष राजेन्द्र राठौड़ का नाम भी चर्चा में है. लेकिन राजेन्द्र राठौड़ को आरएसएस पंसद नहीं करती है. हालांकि संगठन के अंदर एक खेम में उनके नाम को लेकर दबाव बनाया जा रहा है, कुछ लोग वंसुधरा राजे को राजमहल प्रकरण में चुनौती देने वाली राजसमंद सांसद दीया कुमार का नाम और अरूण चतुर्वेदी और सांसद सीपी जोशी का नाम भी सामने आ रहा है.

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दरअसल पार्टी के बीच सभी नेता आपस में अभी कयास लगा रहा है. लेकिन एक बात तो साफ- इस बार जो भाजपा का अध्यक्ष बनेगा वो अगले 3 साल यानि कमोबेश चुनाव तक ही राजस्थान में पार्टी का अध्यक्ष रह सकता है और इस बार पार्टी के कार्यकर्ताओं के बीच ये एक चर्चा का विषय है कि जिस खेमे का प्रदेश अध्यक्ष होगा या तो वो या फिर उसी खेमे का राजस्थान में अगला BJP का मुख्यमंत्री उम्मदीवार होगा.

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इसलिए पूर्व मुख्यमंत्री राजे चाहती हैं कि उनके खेमे का या फिर मदन लाल सैनी जैसा कोई अध्यक्ष बने. लेकिन केन्द्र में मोदी और शाह की जोड़ी किसी ऐसे व्यक्ति का नाम भी सामने ला सकती है जिसका नाम कहीं पर भी चर्चा में नहीं हो. क्योंकि हाल ही में कोटा सांसद ओम बिरला को लोकसभा का स्पीकर बनाकर ऐसा कमाल किया गया है.