NLU जोधपुर के छात्र की मौत मामले में दोबारा होगी जांच, राजस्थान पुलिस की क्लोजर रिपोर्ट सुप्रीम कोर्ट में खारिज

राजस्थान के वरिष्ठ वकील मनीष सिंघवी (Manish Singhvi) ने कहा कि पुलिस अदालत के निर्देशानुसार मामले की जांच करेगी. जुलाई में शीर्ष अदालत ने कहा था कि मामले में चल रही जांच दो महीने के भीतर पूरी हो और इसके पहले अंतिम रिपोर्ट दाखिल की जाए.
SC order Further Investigation, NLU जोधपुर के छात्र की मौत मामले में दोबारा होगी जांच, राजस्थान पुलिस की क्लोजर रिपोर्ट सुप्रीम कोर्ट में खारिज

सुप्रीम कोर्ट (SC) ने बुधवार को राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालय (NLU), जोधपुर में अगस्त 2017 में तीसरे वर्ष के छात्र की मौत के मामले में फिर से जांच करने का आदेश दिया. जस्टिस रोहिंटन एफ नरीमन की अध्यक्षता वाली पीठ ने फैसले में कहा कि हम फिर से जांच का आदेश दे रहे हैं. क्लोजर रिपोर्ट को हम खारिज करते हैं. इससे पहले‌ वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से आयोजित सुनवाई के दौरान पीड़ित की मां की ओर से पेश हुए वकील सुनील फर्नांडिस ने राजस्थान पुलिस से मामले को सीबीआई (CBI) में स्थानांतरित करने की मांग की थी. उन्होंने तर्क दिया था कि जांच में कोई प्रगति नहीं हुई है.

राजस्थान के वरिष्ठ वकील मनीष सिंघवी ने कहा कि पुलिस अदालत के निर्देशानुसार मामले की जांच करेगी. जुलाई में शीर्ष अदालत ने कहा था कि मामले में चल रही जांच दो महीने के भीतर पूरी हो और इसके पहले अंतिम रिपोर्ट दाखिल की जाए. याचिकाकर्ता नीतू कुमार नगाइच, 21 वर्षीय पीड़िता विक्रांत नगाइच की मां ने सुप्रीम कोर्ट से संदिग्ध परिस्थितियों में मौत के मामले को सुलझाने के लिए सीबीआई को जांच सौंपने का निर्देश देने की गुजारिश की थी.

 याचिकाकर्ता ने पुलिस पर ढ़ंग से जांच नहीं करने का लगाया आरोप

उन्होंने यह दावा किया था कि जून 2018 में लगभग 10 महीने की देरी के बाद मामले में एक प्राथमिकी दर्ज की गई थी. याचिकाकर्ता ने आरोप लगाया है कि जिस तरह से जांच की गई है, वह एक अपरिहार्य और उचित आशंका की ओर ले जाती है.

दलील में कहा गया है, ”लगभग तीन साल की चूक के बावजूद कोई चार्जशीट दायर नहीं की गई है. जांच एक स्टैंड स्टिल पर है, जिसमें अपराधियों को पकड़ने के लिए कोई प्रयास नहीं किया जा रहा है.” दलील में दावा किया गया कि पुलिस ने जांच में कथित तौर पर चूक की है. इसमें कहा है कि 13 अगस्त 2017 को पीड़ित शाम को अपने दोस्तों के साथ वार्सिटी परिसर से लगभग 300 मीटर दूर एक रेस्तरां में गया, लेकिन वह वापस नहीं लौटा और उसका शव अगली सुबह रेलवे ट्रैक के पास मिला.

पुलिस ने पीड़ित के सोशल मीडिया अकाउंट को नहीं किया चेक

इसमें आरोप लगाया है कि पुलिस ने न तो गूगल या फेसबुक से संपर्क किया है और न ही पीड़ित के मोबाइल फोन डेटा को प्राप्त किया गया. 13 अगस्त 2017 की रात की घटनाओं का पता लगाने के लिए मदद कर सकता है और आगे की जांच का नेतृत्व कर सकता है. दलील में दावा किया गया है कि पुलिस ने कथित घटना की रात पीड़ित की व्हाट्सएप चैट बातचीत की जांच नहीं की.

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