गहलोत सरकार पर संकट: राजस्थान का भविष्य तय कर सकते हैं ये तीन राजनीतिक समीकरण!

पायलट खेमे (Sachin Pilot) ने 30 विधायकों के समर्थन में होने का दावा किया है. वहीं गहलोत सरकार (Gehlot Government) ने जोर देकर कहा है कि सरकार सुरक्षित है. ऐसे में राजस्थान पॉलिटिकल क्राइसिस के बीच विशेषज्ञों को तीन राजनीतिक समीकरण नज़र आते हैं.
Three political scenario for Future Rajasthan Government, गहलोत सरकार पर संकट: राजस्थान का भविष्य तय कर सकते हैं ये तीन राजनीतिक समीकरण!

राजस्थान की कांग्रेस सरकार में रविवार को हुई उथल-पुथल (Rajasthan Political Crisis) के बाद राज्य में नए राजनीतिक समीकरण बनते दिखाई दे रहे हैं. राजनीतिक विशेषज्ञों के मुताबिक अगले कुछ दिनों में गहलोत सरकार का भविष्य निर्धारित हो सकता है. 200 सदस्यों वाले सदन में जहां बहुमत के लिए 101 विधायकों की जरूरत है वहीं मौजूदा गहलोत सरकार के पास 125 विधायकों का समर्थन हासिल है.

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इसमें कांग्रेस के 107 विधायक हैं, भारतीय कम्यूनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) के दो, भारतीय ट्राइवल पार्टी के दो, राष्ट्रीय लोक दल का एक, वहीं 13 निर्दलीय विधायक भी गहलोत सरकार को सपोर्ट कर रहे हैं. अपोजीशन की बात करें तो भारतीय जनता पार्टी के सदन में 72 और राष्ट्रीय लोकतांत्रिक पार्टी के पास 3 सीटें मौजूद हैं.

हिन्दुस्तान टाइम्स की खबर के मुताबिक पायलट खेमे के पास कितनी सदस्य संख्या है ये अभी स्पष्ट नहीं है, हालांकि पायलट खेमे ने 30 विधायकों के समर्थन में होने का दावा किया है. वहीं गहलोत सरकार ने जोर देकर कहा है कि सरकार सुरक्षित है. ऐसे में राजस्थान पॉलिटिकल क्राइसिस के बीच विशेषज्ञों को तीन राजनीतिक समीकरण नज़र आते हैं.

पहला समीकरण कुछ ऐसा हो सकता है

एक ये कि कांग्रेस की टॉप लीडरशिप एक्शन लेते हुए मुख्यमंत्री अशोक गहलोत (Ashok Gehlot) को ये निर्देश दे कि वह उपमुख्यमंत्री के काम में दखल न दें और पायलट को स्वतंत्र रूप से काम करने दें. पायलट कांग्रेस के प्रदेश प्रमुख भी हैं, इस तरह के निर्देश के बाद इस पॉलिटिकल क्राइसिस पर विराम लगा सकता है.

पहले ही वरिष्ठ नेता कपिल सिब्बल कह चुके हैं कि पार्टी इस अस्थिरता का दूर करने की कोशिश कर रही है. वहीं पार्टी पायलट के चार मंत्रालयों में ब्यूरोक्रेट्स की नियुक्ति समेत महत्वपूर्ण पदों पर युवा नेताओं को तरजीह देने के लिए गहलोत को राजी कर सकती है.

कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं से बातचीत में एक बात और स्पष्ट होती है कि गहलोत और पायलट के बीच अनबन की एक वजह प्रदेश अध्यक्ष का पद भी हो सकता है. हिन्दुस्तान टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक पिछले कुछ महीनों में गहलोत के करीबी नेता पायलट को हटाने के लिए जोर दे रहे थे. एक केंद्रीय कांग्रेस नेता ने कहा है कि पायलट संपर्क में थे और केंद्रीय नेतृत्व से बात कर रहे थे. वहीं दूसरे नेता की मानें तो पायलट ने अपने फोन तक उठाना बंद कर दिया था. पार्टी के कुछ नेता इस क्राइसिस पर कहते हैं कि हो सकता है पिछले छह महीने में इस बात के लिए काम किया गया हो, शायद अब बहुत देर हो चुकी है.

दूसरे समीकरण में अल्पमत में आ सकती है गहलोत सरकार

दूसरा राजनीतिक समीकरण ये है कि राजस्थान कांग्रेस (Rajasthan Congress) में पायलट समर्थनकों की संख्या बढ़ सकती है और उनके पार्टी छोड़ने के बाद गहलोत सरकार अल्पमत में आ सकती है. पार्टी छोड़ने के बाद ये नेता भाजपा का दामन थाम सकते हैं.

मध्य प्रदेश (Maddhya Pradesh) में मार्च में यही हुआ और भाजपा ने राज्य में सरकार बना ली. भाजपा सहयोगी दलों और निर्दलीय उम्मीदवारों के साथ सरकार बना सकती है और उसके बाद छह महीने में खाली हुई सीटों पर उपचुनाव करा सकती है.

तीसरा समीकरण बना सकरता है पायलट को मुख्यमंत्री

तीसरा समीकरण जो बन रहा है वो ये है कि कांगेस में बातचीत के बाद अपने समर्थकों संग साथ पायलट पार्टी (Sachin Pilot) छोड़ते हैं तो वो तीसरे मोर्चे का गठन कर सकते हैं. ऐसे में राज्य में पार्टी टूट सकती है. ऐसी स्थिति में अगर गहलोत और उनके समर्थक निर्दलीय और सहयोगियों के साथ मिलकर बहुमत हासिल करने में कामयाब होते हैं, तो सरकार बच सकती है.

ये सरकार कमजोर होगी और इन्हें अपने छोटे सहयोगियों पर निर्भर रहना होगा. ऐसे पायलट भाजपा द्वारा समर्थित सरकार बनाने की कोशिश कर सकते हैं, लेकिन उनके पास जितने विधायकों की संख्या है उससे यह संभावना नहीं है कि भाजपा उन्हें मुख्यमंत्री बनने की छूट देगी.

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