जान हथेली पर रखकर काम करने वाले कोरोना वॉरियर की दिल को छू लेने वाली कहानी

विष्णु ने बताया कि कोरोना (Coronavirus) से मरने वालों को दफनाने के बाद तीन-चार दिनों तक रात को डरावने सपने (Dreams) भी आते रहे. रात में कई बार झटके से नींद खुल जाती थी. मन में यह डर भी लगता है कि कहीं हमें कोरोना न हो जाए.
Funeral of died from Corona, जान हथेली पर रखकर काम करने वाले कोरोना वॉरियर की दिल को छू लेने वाली कहानी

मिलिए असली ​कोरोना वॉरियर से
कोरोना भी जिससे खाता है खौफ!
जिसका कोई नहीं, उसका विष्णु
कब्र में उतरकर खुद डालता है आखिरी मिट्टी

कोरोनावायरस (Coronavirus) का नाम सुनकर कोई भी डर से कांपने लगता है. कोरोना के संक्रमण से मौत के बाद नाते-रिश्तेदार तक दूरी बना लेते हैं. लेकिन जिसका कोई नहीं, उसका विष्णु (भगवान) है. सवाई मानसिंह अस्पातल (Savai Mansingh Hospital) के मुर्दा घर में तैनात सुपरवाइजर विष्णु कोरोना के खिलाफ जंग के असली हीरो हैं, जो अपनी जान हथेली पर रखकर कोरोना संक्रमण से मरने वालों का अंतिम संस्कार करते हैं.

देखिये फिक्र आपकी सोमवार से शुक्रवार टीवी 9 भारतवर्ष पर हर रात 9 बजे

अब तक कर चुके हैं 65 मृतकों का अंतिम संस्कार

कोरोना महामारी का संकट आने से पहले विष्णु ने कभी कब्रिस्तान (Cemetery) का मुंह तक नहीं देखा था, लेकिन विष्णु अब तक कोरोनावायरस से मरने वाले 30 लोगों के शव दफना चुके हैं. विष्णु और उनके साथियों ने अब तक 65 शवों का अंतिम संस्कार किया है. विष्णु और उसके साथियों का काम स्वास्थ्य के लिहाज से भले ही सबसे ज्यादा खतरे वाला है, लेकिन मानवता के लिहाज से इससे बढ़कर और प्रशंसनीय काम कोई नहीं हो सकता. तभी तो हम गर्व से कह रहे हैं कि जिसका कोई नहीं उसका विष्णु है.

विष्णु को जानने के लिये टीवी 9 भारतवर्ष पहुंची ग्राउंड जीरो पर

विष्णु को जानने के लिये टीवी 9 भारतवर्ष (tv9 bharatvarsh) भी ग्राउंड जीरो पर पहुंचा. विष्णु सबसे पहले रोज की तरह सवाई मानसिंह अस्पताल के मुर्दाघर से 8 बजे निकले. हमारी टीम विष्णु के साथ-साथ चल पड़ी. विष्णु अब सबसे पहले जयपुर के आदर्श नगर श्‍मशान घाट पहुंचेे, जहां पर कल उन्‍होंने एक अंतिम संस्कार किया. वहां पर विष्णु ने कल अस्थियां निकालने के लिये चिंता को ठंडा किया. कोरोनावायरस के चलते दो दिन पहले उस व्यक्ति की मौत हुई थी.

इस्लामिक तरीके से सुपुर्द-ए-ख़ाक के लिये खुदवाई क्रब

इसके बाद विष्णु जयपुर के घाट धेट कब्रिस्तान की तरफ चल पड़े, जहां वह कोरोना से मरने वाले के लिये कब्रिस्तान में जगह ढूंढते नजर आये. वहीं, विष्णु से हमारे रिपोर्टर जितेश जेठान्नदानी (Jitesh Jethanandani) ने खास बातचीत की. इस दौरान विष्णु ने बताया कि 13 ऐसे लोगों का अंतिम संस्कार भी किया है, जिनमें कोरोना से मरने वालों के परिवार का कोई सदस्य साथ नहीं था. विष्णु ने बताया कि उन्होंंने कैसे इस्लामिक तरीके से सुपुर्द-ए-ख़ाक के लिये कब्र खुदवाई.

रात को आते थे डरावने सपने

विष्णु ने यह भी बताया कि कोरोना से मरने वालों को दफनाने के बाद तीन-चार दिनों तक रात को डरावने सपने भी आते रहे. रात में कई बार झटके से नींद खुल जाती थी. मन में यह डर भी लगता था कि कहीं हमें ही कोरोना न हो जाए. घर में एक छोटी बच्ची है, यह सोचकर परिवार वालों को डर लगता था. विष्णु ने बताया कि जब वह आखिरी बार बच्चों से मिला तो बच्चे रोने लगे थे. संक्रमण के डर से विष्णु ने दूर से ही उनके साथ मुलाकात की.

परिवार को संक्रमण से बचाने के लिए नहीं जाते घर

विष्णु ने बताया कि यदि मुस्लिम की बॉडी होती है और कोई कलमा पढ़ना चाहता है, तो उसे कलमा पढ़ने का पूरा टाइम देते हैं और फिर उसके बाद दफनाते हैं. अगर बॉडी हिंदू की होती है और उनको भी दूर से अंतिम संस्कार की कोई प्रक्रिया करनी होती है, तो करने देते हैं. विष्णु ने बताया कि उसके घर में एक छ: महीने की बेटी एक तीन साल का बेटा और पत्नी है. उन्हें संक्रमण न हो जाए इसलिए उसने घर जाना छोड़ दिया था. वह जिस दिन शव जलाता है या दफनाता है, उस दिन घर नहीं जाता. उसने बताया कि वह पिछले 3 दिनों से घर नहीं गया.

देखिये परवाह देश की सोमवार से शुक्रवार टीवी 9 भारतवर्ष पर हर रात 10 बजे

Related Posts