ये है वो क्रिकेटर, जो बचपन में पहनता था फ्रॉक और लगाता था बिंदी

नयी दिल्ली रिश्तेदार को लगा कि घर में एक बिटिया भी है. जैसा कि अमूमन होता है, उस रिश्तेदार ने अपनी जेब से कुछ पैसे निकाले और उसे पकड़ा दिए. घरवालों ने तपाक से कहा- अरे ये क्या कर रहे हैं. तोहफा तो आप दे ही चुके हैं. फिर पैसे क्यों दे रहे हैं? चकराए […]

नयी दिल्ली
रिश्तेदार को लगा कि घर में एक बिटिया भी है. जैसा कि अमूमन होता है, उस रिश्तेदार ने अपनी जेब से कुछ पैसे निकाले और उसे पकड़ा दिए. घरवालों ने तपाक से कहा- अरे ये क्या कर रहे हैं. तोहफा तो आप दे ही चुके हैं. फिर पैसे क्यों दे रहे हैं? चकराए रिश्तेदार ने कहा- भाई तोहफा तो उस बच्चे के लिए था, जिसका जन्मदिन मनाया जा रहा था. घर में एक बिटिया भी तो है…! उसे भी तो कुछ मिलना चाहिए और यह सुनकर घर ठहाकों से गूंज उठा.

ठहाके रुकने के बाद उस रिश्तेदार को इस डबल रोल की कहानी बतायी गयी. दरअसल ये डबल रोल निभाने वाला कोई और नहीं बल्कि वो हनीफ मोहम्मद था, जिसका नाम पाकिस्तान को टेस्ट टीम का दर्जा दिलाने वालों में सुनहरे अक्षरों में दर्ज है.

यह बात 1934 की सर्दियों की है. हनीफ अपनी मां की कोख में थे और मां की दिली ख्वाहिश थी कि इस बार एक प्यारी सी बेटी घर आ जाए. क्योंकि घर में लड़के पहले से ही थे. यह वो दौर था जब गर्भवती महिलाओं की देखभाल करने वाली दाइयां अलग अलग आधार पर इस बात की भविष्यवाणियां करती थीं कि कोख में पल रहा लड़का है या लड़की. इसी में से एक की बात हनीफ की मां के दिमाग में घर कर गयी और इंतज़ार करने लगी परी का. साथ ही जुटाने लगी सजाने संवारने को वो सामान, जो उसको किसी परी के माफिक बनाएं.

पर होनी को तो कुछ और ही मंजूर था. 21 दिसंबर 1934 को बेटी की जगह हनीफ पैदा हुए. सुंदर-सुंदर फ्रॉक. चटकीले रंगों के स्वेटर. माथे पर बिंदी और हाथों में चूड़ी. भले ही इनको हनीफ के नाम से घरवाले पुकारते रहे हों पर असल में इनको एक लड़की की तरह पाला गया. इस घर में हनीफ के आने के पहले एक प्यारी सी बिटिया का जन्म हुआ था जो ज्यादा दिनों तक अपनी मां की गोद में नहीं खेल सकी.

हनीफ के बारे में 7 प्वॉइंट्स

  • इनका जन्म गुजरात के जूनागढ़ में 21 दिसम्बर 1934 को हुआ.
  • इन्हें पाकिस्तान में लिटिल मास्टर के नाम से जाना जाता है.
  • 1952 से 1969 के बीच 55 टेस्ट मैच खेले, जिनमें इन्होंने 12 शतक जड़े.
  • हनीफ को वेस्टइंडीज के खिलाफ 1958 में टेस्ट मैच में 337 रन की मैराथन पारी के लिए भी जाना जाता है.
  • 1958-59 में फर्स्‍ट क्‍लास क्रिकेट में 499 का स्‍कोर बनाते हुए डॉन ब्रेडमैन का फर्स्ट क्लास में सबसे लंबी पारी का रिकॉर्ड भी तोड़ा था.
  • 1968 में विसडन क्रिकेटर ऑफ द ईयर घोषित किया गया.
  • 11 अगस्त 2016 में इनकी ब्‍लड कैंसर से मौत हो गयी.