लॉकडाउन से पहले खो-खो सीखने भारत आए थे 16 देश

दक्षिण अफ्रीका, केन्या, कोरिया जैसे लगभग 16 राष्ट्रों का एक प्रतिनिधिमंडल खो खो सीखने भारत आया था. ऐसे में ये खेल अब विदेशों में भी पहुंच रहा है.

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  • Publish Date - 1:43 pm, Sat, 17 October 20

खो खो एक ऐसा खेल है जिसे कई भारतीयों ने अपने बचपन में खेला होगा. यह ’टैग’ का एक पारंपरिक भारतीय खेल है और धीरज, फुर्ती और ताकत के कारण यह एक सर्वकालिक पसंदीदा है. यह खेल अब भारत में युवाओं के बीच लोकप्रियता हासिल कर रहा है और इसके अनुभवी खिलाड़ी सारिका काले को इस साल अर्जुन पुरस्कार से सम्मानित किया गया है. भारतीय खो खो महासंघ के महासचिव महेन्द्र सिंह त्यागी ने शुक्रवार को जानकारी दी कि दक्षिण अफ्रीका और कोरिया सहित सोलह देशों ने खो खो सीखने के लिए लॉकडाउन से पहले भारत का दौरा किया.

त्यागी ने कहा कि दक्षिण अफ्रीका, केन्या, कोरिया जैसे लगभग 16 राष्ट्रों का एक प्रतिनिधिमंडल भारत हमसे खो खो सीखने आया था. वे अपने राष्ट्र में खो खो को बढ़ावा देना चाहते हैं. हमने उन्हें एक कोच प्रदान किया, जिन्होंने उन्हें खेल की तकनीकीताओं के बारे में सिखाया. जब वे अपने-अपने देशों के लिए रवाना हुए, तो उन्होंने हमसे वादा किया कि वे अपने देशों में खो खो को बढ़ावा देंगे और निकट भविष्य में टूर्नामेंट भी आयोजित करेंगे. यहां तक कि कुछ विदेशी देशों के साथ एक टूर्नामेंट आयोजित करने की हमारी योजना थी लेकिन कोविड-19 महामारी के कारण, सब कुछ ठप हो गया!

फेडरशन कर रहा है खिलाड़ियों की मदद

महासंघ सभी खो खो एथलीटों के साथ लगातार संपर्क में है और कोच एथलीटों को कोरोनावायरस के समय में फिट रहने में मदद कर रहे हैं. उन्होंने कहा, किसी भी एथलीट को खेल से जुड़ी किसी भी तरह की मदद की जरूरत होती है. फेडरेशन उनकी मदद करता है. हम चाहते हैं कि हमारे खिलाड़ी महामारी के समय मानसिक और शारीरिक रूप से फिट हों. हम नियमित रूप से उनसे बात करते रहते हैं और यदि कोई हो, तो उनकी समस्याओं को सुनेंगे.

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