अगर सही नियम से होता मैच तो न्यूजीलैंड बनता चैंपियन, वर्ल्ड कप फाइनल में ऐसी गलती अपराध है

इस बेहद रोमांचक और सांस रोकने वाले मुकाबले में न्यूजीलैंड ने पूरी कोशिश की लेकिन जीत उससे दूर ही रही. कीवी टीम दूसरी बार फाइनल में पहुंची थी. 2015 में आस्ट्रेलिया ने उसके विश्व कप विजेता बनने के सपने को तोड़ा था तो आज मेजबान इंग्लैंड ने उसकी मेहनत पर पानी फेर दिया.
ओवरथ्रो, अगर सही नियम से होता मैच तो न्यूजीलैंड बनता चैंपियन, वर्ल्ड कप फाइनल में ऐसी गलती अपराध है

लंदन. इंग्लैंड क्रिकेट टीम का विश्व विजेता बनने का सपना आखिरकार रविवार को क्रिकेट के मक्का कहे जाने वाले लॉडर्स मैदान पर बेहद नाटकीय अंदाज में 44 साल बाद पूरा हो गया. इंग्लैंड ने आईसीसी विश्व कप-2019 के फाइनल में न्यूजीलैंड को सुपर ओवर से मात दे पहली बार विश्व विजेता का तमगा हासिल किया है और इतिहास रचा.  यह मैच हर मायने में ऐतिहासिक रहा. इंग्लैंड को जीतने के लिए न्यूजीलैंड से 242 रनों की चुनौती मिली थी, लेकिन बेन स्टोक्स की नाबाद 84 और जोस बटलर की 59 रनों की पारियों के बाद भी इंग्लैंड 50 ओवरों में 241 रनों पर ऑल आउट हो गई और दोनों टीमों का स्कोर टाई रहा.

मैच सुपर ओवर में गया.यह विश्व कप का पहला फाइनल था जो सुपर ओवर में गया. और यहीं मैच का असल रोमांच और नाटक शुरू हुआ. इंग्लैंड ने सुपर ओवर में 15 रन बनाए और कीवी टीम के सामने 16 रनों का लक्ष्य रखा. सुपर ओवर में न्यूजीलैंड जीतती दिख रही थी. उसे आखिरी गेंद पर दो रन चाहिए थे लेकिन बना एक रन और स्कोर बराबर हो गया. ऐसे में इंग्लैंड को इस मैच में न्यूजीलैंड से ज्यादा बाउंड्रीज लगाने के कारण जीत मिली.

बता दें कि, अगर अंपायर ने सही नियम को लागू किया होता तो ये मैच 50 ओवर की समाप्ति पर टाई होता ही नहीं. मार्टिन गप्टिल के ओवरथ्रो पर जो 6 रन दिए गए थे वह असल में नियम के मुताबिक 5 रन होने चाहिए थे.  बेन स्टोक्स ने

ICC के नियम 19.8 के अनुसार “यदि ओवर थ्रो के बाद गेंद बाउंड्री के पार चली जाती है, तो पेनल्टी के रन के अलावा बल्लेबाजों द्वारा पूरे किए गए रन ही मिलते हैं. यदि बल्लेबाजों ने एक ही रन पूरा किया और दूसरे के लिए दौड़ रहे हैं, तब देखा जाता है कि फील्डर के गेंद थ्रो करने से पहले दोनों बल्लेबाज क्रॉस हुए या नहीं. यदि नहीं, तो एक ही रन टीम को मिलता है. बाकि पेनल्टी के रूप में चौके के रन मिलते हैं.” पूर्व अंपायर साइमन टॉफेल ने भी इसे अंपायरिंग में गलती बताया है.

क्या हुआ था

गुप्टिल ने जिस वक्त थ्रो किया था, उस समय बल्लेबाज बेन स्टोक्स और आदिल रशीद दूसरा रन दौड़ते हुए एक दूसरे को क्रॉस नहीं कर पाए थे. इस परिस्थिति में इंग्लैंड को एक भागा हुआ रन और पेनल्टी के चार रन मिलाकर 5 रन मिलने चाहिए थे. आखिरी ओवर में इंग्लैंड को 15 रन चाहिए थे और आखिरी की 3 गेंदों पर 9 रन की जरुरत थी. इंग्लैंड की जीत लगभग नामुमकिन हो गई थी, लेकिन इस ओवर थ्रो के बाद उसे आखिरी की 2 गेंदों पर 3 रन चाहिए थे. आखिरी दो गेंदों पर 2 रन आए और मैच टाई रहा.

अगर ओवर थ्रो में 5 रन ही मिलते तो न्यूजीलैंड ये मैच जीत जाती. हालांकि, अंपायर कुमार धर्मसेना और मैरिस इरास्मस ने मिलकर गलत निर्णय लिया.

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