कपड़े की दुकान से मैच फिक्सिंग के काले कारोबार तक, पढ़ें सट्टेबाज संजीव चावला की पूरी कहानी

सट्टेबाज संजीव चावला को गुरुवार को लंदन से प्रत्यर्पित कर लिया गया, उस पर साल 2000 की मैच फिक्सिंग के आरोप हैं. उसे भारत लाने में 20 साल का लंबा समय लग गया. मेडिकल जांच के बाद चावला को तिहाड़ जेल भेजा जाएगा.

सट्टेबाज संजीव चावला को गुरुवार को लंदन से प्रत्यर्पित कर लिया गया, उस पर साल 2000 की मैच फिक्सिंग के आरोप हैं. उसे भारत लाने में 20 साल का लंबा समय लग गया. मेडिकल जांच के बाद चावला को तिहाड़ जेल भेजा जाएगा, दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच पूरे केस की जांच में लगी हुई है. संजीव चावला कौन है और कैसे वर्ल्ड फेमस गेम में उसकी एंट्री हुई, आइए जानते हैं.

कपड़े की दुकान से सट्टेबाजी की दुकान तक

तकरीबन 25 साल पहले संजीव चावला दक्षिण पूर्वी दिल्ली की जंगपुरा मार्केट में कपड़े बेचता था. यह उसका खानदानी पेशा था, पिता की भी कपड़ों की दुकान थी. इसी दौरान उसकी मुलाकात कुछ सट्टेबाजों से हुई. उसने देखा कि इस धंधे में बड़ा फायदा है. छोटे लेवल से शुरू करके वह विदेशों तक जाने लगा और बुकीज के साथ बैठने लगा.

क्रिकेटर्स को अपने यहां पार्टियों में बुलाने में उसे बहुत ज्यादा समय नहीं लगा. जांचकर्ताओं का कहना है कि 1998-99 में वह क्रिकेट का गणित बदलने में लगा हुआ था. यहां तक कि 1999 के शारजाह टूर्नामेंट में भी उसका हस्तक्षेप था.

चावला के पिता कपड़ों के छोटे कारोबारी थे और भोगल मार्केट में उनकी दुकान थी. बाद में संजीव और उसके भाई ने वह दुकान ले ली और बिजनेस बढ़ाने का वादा किया. 90 के दशक में उनका परिवार जंगपुरा के घर से नोएडा के तीन मंजिला बंगले में शिफ्ट हो गया.

टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के मुताबिक उस समय एक बड़ी कैसेट कंपनी का मालिक मैच फिक्सिंग गिरोह का सदस्य था और साउथ दिल्ली के फाइव स्टार होटलों में उनकी मीटिंग होती थी. ऐसी ही किसी मीटिंग में संजीव चावला के दोस्त ने उस कैसेट कंपनी के मालिक से मुलाकात कराई थी. कुछ ही मुलाकातों के बाद चावला ने भारत में सट्टेबाजी का काम शुरू कर दिया और जल्दी ही वह देश में सट्टेबाजी का ‘भगवान’ बन गया.

कमाई अकूत संपत्ति

सट्टेबाजी के पैसे से संजीव ने इतना पैसा बनाया कि जल्दी ही ग्रेटर कैलाश इलाके में एक घर खरीद लिया और लंदन में एक बंगला किराए पर ले लिया. उसकी पत्नी ने लंदन के पास कपड़ों का बिजनेस शुरू कर दिया. वह 1996 से 2000 तक लगातार यूके से भारत के बीच उड़ता रहा, फिर मैच फिक्सिंग में नाम आने के बाद भारत ने उसका पासपोर्ट कैंसिल कर दिया.

इस दौरान संजीव चावला ने यूनाइटेड किंगडम के अधिकारियों से वहां रहने की अनुमति हासिल कर ली और 2005 तक उसे यूके की नागरिकता भी मिल गई. चावला ने केनिंगटन और दक्षिण पूर्वी लंदन में महंगी कीमत पर प्रॉपर्टी खरीदी. इसके बाद टेंपल फॉर्चून में 6 बेडरूम वाला एक बड़ा सा घर 10 लाख रुपए के किराए पर लिया और वहां अपनी पत्नी व बच्चों के साथ रहने लगा.

एक साथी और भी था

जांचकर्ताओं का कहना है कि फिक्सिंग के धंधे में उसकी मुलाकात राजेश कालरा से हुई, जिसे दिल्ली पुलिस ने सट्टेबाजी का आरोपी बनाया है. साल 2000 के बाद राजेश कालरा ऐसा गायब हुआ कि फिर उसका नाम 2014 में सामने आया जब साउथ दिल्ली में एक गैंग ने 14 करोड़ रुपए कैश एक कार से लूट लिया. कहा गया कि यह सारा पैसा राजेश कालरा का था. पुलिस ने काफी रकम बरामद कर ली और तब से कालरा आयकर विभाग के रडार पर है.

कालरा ने पुलिस पूछताछ में बताया कि 2000 के बाद हुए इंडिया-साउथ अफ्रीका ओडीआई में सब कुछ उनके प्लान के मुताबिक नहीं गया. इसके बाद दोनों के रास्ते अलग हो गए. कालरा का आरोप है कि चावला लंदन से फिक्सिंग गैंग को कंट्रोल करता है. सीबीआई की आग्रह पर 2001 में चावला के खिलाफ रेड कॉर्नर नोटिस जारी किया गया था, इसके बावजूद लंदन में उसे 2016 में गिरफ्तार किया गया.

हैंसी क्रोनिए से रिश्ता

मैच फिक्सिंग में चावला के साथ दक्षिण अफ्रीका के पूर्व कप्ता हैंसी क्रोनिए का नाम भी आया था. क्रोनिए को चावला ने ऑफर दिया था कि अगर वह मैच हार जाएं तो मालामाल हो जाएंगे. भारतीय दौरे के बाद क्रोनिए को भारी रकम का भुगतान किया गया था. चावला और हैंसी क्रोनिए के खिलाफ दिल्ली पुलिस क्राइम ब्रांच ने 70 पेज की चार्जशीट दायर की थी. बता दें कि हैंसी क्रोनिए की 2002 में प्लेन क्रैश में मौत हो चुकी है.

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