Happy Birthday Miandad…कभी थे इमरान के करीबी फिर क्यों हो गई तनातनी? पढ़िए Interesting किस्सा

जावेद मियांदाद (Javed Miandad) को 1992 में पाकिस्तान की जीत के बाद कप्तानी दी गई थी. उन्होंने अपनी कप्तानी में इंग्लैंड और न्यूजीलैंड की जमीन पर पाकिस्तान को टेस्ट मैचों में जीत भी दिलाई थी.

पूरी दुनिया में दिल से क्रिकेट खेलने वालों की अगर लिस्ट बने तो जावेद मियांदाद (Javed Miandad) उसमें सबसे ऊपर रहेंगे. वो पाकिस्तान (Pakistan) के महान बल्लेबाजों में शुमार रहे हैं. उन्होंने पूरी दुनिया में अपनी बल्लेबाजी का लोहा मनवाया है, लेकिन अपने करियर के आखिरी दिनों में मियांदाद को मुश्किल दिन देखने पड़े थे. उन्हें कप्तानी से हटा दिया गया. उन्हें टीम से बाहर का रास्ता दिखा दिया गया.

मियांदाद का मानना है कि ये सब कुछ इमरान खान (Imran Khan) के इशारे पर हो रहा था. मियांदाद को ऐसा क्यों लगता था और उस रोज क्या हुआ जब पाकिस्तान क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (Pakistan Cricket Board) के सचिव के दफ्तर में जावेद मियांदाद जबरदस्ती घुस गए? उस वक्त सचिव के कमरे में ऐसा क्या चल रहा था, जिससे मियांदाद का गुस्सा सातवें आसमान पर पहुंच गया? आज इस महान खिलाड़ी का 63वां जन्मदिन (Javed Miandad Birthday) है और इस खास मौके पर जानते हैं उनकी जिंदगी से जुड़ी कुछ दिलचस्प बातें.

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इमरान के कारण गंवाई टीम की कप्तानी!

124 टेस्ट मैच में 8832 रन. 233 वनडे में 7381 रन. 23 टेस्ट शतक. 8 वनडे शतक. टेस्ट औसत के रिकॉर्ड में दुनिया में टॉप 30 बल्लेबाजों में नाम शामिल. करीब 21 साल का अंतर्राष्ट्रीय करियर. ये कुछ आंकड़े हैं जो इस बात को साबित करने के लिए काफी हैं कि जावेद मियांदाद पाकिस्तान के महानतम बल्लेबाजों में से एक रहे हैं.

जावेद मियांदाद को 1992 में पाकिस्तान की जीत के बाद कप्तानी दी गई थी. उन्होंने अपनी कप्तानी में इंग्लैंड और न्यूजीलैंड की जमीन पर पाकिस्तान को टेस्ट मैचों में जीत भी दिलाई थी. लेकिन इसके बाद जब पाकिस्तान की टीम घर पहुंची तो मियांदाद को कप्तानी से हटा दिया गया. पाकिस्तान टीम की कप्तानी वसीम अकरम को सौंप दी गई.

मियांदाद से क्यों डरते थे इमरान खान?

जावेद मियांदाद का मानना है कि ऐसा इमरान खान के इशारे पर किया गया था. मियांदाद ने अपनी ऑटोबायोग्राफी में इस बात का जिक्र भी किया है. उनका कहना है कि इमरान खान को इस बात का डर था कि अगर जावेद मियांदाद लंबे समय तक पाकिस्तान के कप्तान रहे तो उनसे ज्यादा कामयाब होंगे. इमरान खान के पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड में सभी टॉप अधिकारियों से अच्छे रिश्ते थे. लिहाजा, इमरान खान ने उसका फायदा उठाया.

मियांदाद ने अपनी ऑटोबायोग्राफी में इस बात का भी जिक्र किया है कि जब 1992 में वो इंग्लैंड के दौरे पर थे तो इमरान खान ने टीम को बांटने की कोशिश की थी. इमरान ने बाकयदा एक पार्टी दी थी, जिसमें टीम के नए खिलाड़ियों को बुलाया गया था. उस पार्टी में जावेद मियांदाद, सलीम मलिक और रमीज राजा को नहीं बुलाया गया था.

इसके अलावा इमरान खान इंग्लिश मीडिया में अपने कॉलम्स से टीम की कमजोरियों को भी खुलकर लिख रहे थे. एक ऐसे ही कॉलम में उन्होंने लिखा था कि पाकिस्तान की टीम के बल्लेबाजों को ‘सीमिंग’ विकेट पर दिक्कत होती है. ये कोई बहुत बड़ा रिवेलेशन नहीं था, लेकिन कुछ दिन पहले तक टीम की कप्तानी कर रहे इमरान खान से इस तरह के व्यवहार की उम्मीद किसी को नहीं थी.

हर वक्त पैसों के बारे में सोचते थे इमरान

मियांदाद ने अपनी किताब में ये भी लिखा है कि दरअसल करियर के आखिरी दौर में इमरान खान ने अपने कैंसर हॉस्पिटल के लिए जिस तरह से पैसे इकट्ठे किए वो साथी खिलाडियों को अच्छा नहीं लगता था. यहां तक कि इमरान खान का नाम ‘मीटर’ रख दिया गया था. वो हर वक्त सिर्फ पैसे के बारे में सोचते रहते थे.

8 साल और सात खिलाड़ी

जावेद मियांदाद ने कप्तानी से हटाए जाने पर पीसीबी के अधिकारियों को खूब खरी खोटी सुनाई थी. दिलचस्प बात ये है कि 1992-92 से लेकर 2000-01 के सीजन यानि करीब 8 साल में पाकिस्तान की कप्तानी को लेकर खूब खींचतान हुई. किसी भी कप्तान को लगातार मौका नहीं मिला. 8 साल में 7 खिलाडियों में कप्तानी का पद बंटा वो भी 14 बार.

मियांदाद के बाद वसीम अकरम, अकरम के बाद सलीम मलिक, सलीम मलिक के बाद रमीज राजा, उसके बाद दोबारा अकरम, फिर सईद अनवर, फिर रमीज राजा, फिर तीसरी बार अकरम… ऐसे ही कप्तानी की जिम्मेदारी बदलती रही. इसी दौरान राशिद लतीफ, आमिर सोहैल, मोइन खान को भी कप्तानी मिली. आखिरकार 2001 में कप्तानी वकार यूनिस को मिली. कप्तानी की ‘म्यूजिकल चेयर’ का असर ये हुआ कि पाकिस्तान की टीम का प्रदर्शन गिरता चला गया.

टीम से बाहर होने के बजाए फिटनेस टेस्ट देने का फैसला

आंकडे बताते हैं कि उस दौरान पाकिस्तान श्रीलंका, दक्षिण अफ्रीका, इंग्लैंड जैसी टीमों के खिलाफ हार का सामना करना पड़ा था. इसके बाद 2003 विश्व कप में भी पाकिस्तान की हालत खराब रही. इसके बाद पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड में इस तरह की हवा बनाई गई कि जावेद मियांदाद फिट नहीं हैं. मियांदाद का कहना है कि उन्होंने मन बना लिया था कि वो टीम से बाहर किए जाने की बजाए फिटनेस टेस्ट देंगे.

आखिरकार, पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड को जावेद मियांदाद के फिटनेस टेस्ट के लिए हामी भरनी पड़ी. पीसीबी ने मियांदाद का फिटनेस टेस्ट लाहौर में रखा. मियांदाद उस वक्त कराची में थे, लेकिन वो कराची से लाहौर गए. मियांदाद तय समय पर पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड के दफ्तर पहुंचे. मियांदाद को वहां का माहौल देखकर बड़ी हैरानी हुई. वहां शांति छाई हुई थी. डॉक्टर्स का पैनल तक नहीं था. कुछ भी ऐसा नहीं था, जिसको देखकर कहा जा सकता हो कि वहां एक अंतर्राष्ट्रीय खिलाड़ी का फिटनेस टेस्ट होना है.

खैर, मियांदाद ने सचिव के ऑफिस में ये संदेश पहुंचवा दिया कि वो स्टेडियम पहुंच गए हैं. मियांदाद को उनके इस संदेश का कोई जवाब नहीं मिला. मियांदाद करीब एक घंटे तक इंतजार करते रहे. मियांदाद जिस कद के खिलाड़ी थे कि उन्हें वहां बैठकर इंतजार करना अच्छा नहीं लग रहा था, लेकिन मियांदाद बोर्ड को कोई मौका नहीं देना चाहते थे.

कुछ देर बाद मियांदाद का सब्र टूट गया. वो सचिव शाहिद रफी के ऑफिस के बाहर पहुंच गए. उन्होंने ऑफिस के बाहर खड़े कर्मचारी से कहा कि वो अंदर जाकर बताएं कि मियांदाद इंतजार कर रहे हैं. कर्मचारी ने अंदर जाकर जब ये बात बताई तो अंदर से आवाज आई कि उन्हें इंतजार करने को बोलो. इतना सुनते ही जावेद मियांदाद को गुस्सा आ गया. उन्होंने कर्मचारी को धक्का दिया और सीधे सचिव के कमरे में घुस गए.

सातवें आसमान पर पहुंचा मियांदाद का गुस्सा

अंदर घुसने के बाद मियांदाद ने जो देखा उसको देखकर उनका गुस्सा सातवें आसमान पर पहुंच गया. सचिव के ऑफिस में बाकयदा पार्टी चल रही थी. मियांदाद ने खुद अपनी किताब में इस वाकये का जिक्र किया है. उन्होंने लिखा है कि ऑफिस के भीतर लोग सिगार-सिगरेट पी रहे थे. उस वक्त वहां कमरे में सेलेक्टर हसीब अहसान और वकार हसन भी मौजूद थे. डॉ. आमिर अजीज भी साथ में थे. कुछ ऐसे लोग भी थे जिन्हें मियांदाद नहीं पहचानते थे.

मियांदाद गुस्से से उबल रहे थे. उन्होंने चिल्ला कर सचिव से पूछा कि ये क्या मजाक है. वो क्रिकेट खेलने के लिए मर नहीं रहे हैं. उन्होंने देश के लिए कितना क्रिकेट खेला है हर कोई जानता है. वो कोई स्कूल के बच्चे नहीं है कि उन्हें बुलाकर इस तरह इंतजार कराया जाए. कमरे में मियांदाद की आवाज के अलावा सन्नाटा पसरा हुआ था. कोई कुछ बोलने की हिम्मत नहीं कर रहा था. मियांदाद का कद वाकई बहुत बड़ा था. बाद में सेलेक्टर्स ने उनसे माफी मांगी और फिटनेस टेस्ट की औपचारिकता पूरी कर दी गई.

मियांदाद को फिट घोषित कर दिया गया और उन्हें टीम के कैंप में भी बुला लिया गया. लेकिन खेल अभी खत्म नहीं हुआ था. कैंप में गेंदबाजों को ये निर्देश दे दिए गए थे कि मियांदाद को लगातार बाउंसर फेंकनी है. मियांदाद बताते हैं कि वसीम अकरम, वकार यूनिस, आकिब जावेद उनसे आंखे नहीं मिला पा रहे थे. जावेद मियांदाद को सेलेक्टर्स की ये चाल समझ आ रही थी. उन्होंने गुस्से में हेलमेट भी उतार दिया और गेंदबाजों से कहा कि वो उनके सर पर निशाना साध कर दिखाएं.

मियांदाद की आंख में आंसू

खैर, इन सारी घटनाओं के बाद उन्हें टेस्ट मैच खेलने का मौका मिला. जिम्बाब्वे की वो सीरीज जावेद मियांदाद की आखिरी टेस्ट सीरीज साबित हुई, क्योंकि इस सीरीज के बाद उन्हें टीम से ‘ड्रॉप’ कर दिया गया. इन सारी बातों से नाराज जावेद मियांदाद ने कराची प्रेस क्लब में कुछ दिनों बाद एक प्रेस कॉन्फ्रेंस बुलाई और अपने संन्यास का ऐलान कर दिया. संन्यास के ऐलान के वक्त मियांदाद की आंख में आंसू थे.

ये खबर जैसे ही लोगों को पता चली पूरे देश में खूब विरोध प्रदर्शन हुए. बाद में राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री बेनजीर भुट्टो तक को इस मामले में दखल देना पड़ा. इसके बाद जावेद मियांदाद की दोबारा टीम में वापसी हुई. हालांकि वो फिर चोट और दूसरी वजहों से कुछ वनडे मैच ही खेल सके.

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