Happy Birth Day Leander Paes: आखिर किस मिट्टी के बने हैं लिएंडर पेस

टेनिस के खेल में लिएंडर पेस की जितनी कामयाबियां हैं, अगर वो क्रिकेट के खेल में होती तो वो भारत के सुपरस्टार होते. उनके पीछे ऑटोग्राफ लेने वालों की कतार लगी होती. हर पांचवें विज्ञापन में लिएंडर पेस ही नजर आ रहे होते. शायद उन्हें भारत रत्न दिए जाने की वकालत भी की जा रही होती.
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समय कोरोना का है. दुनिया थमी हुई है. किसी को नहीं पता कि इस मुसीबत से कब निजात मिलेगी. कोई नहीं जानता कल क्या होगा? हर तरफ अनिश्चितता का माहौल है. ऐसे में आज मैं आपसे एक सवाल पूछना चाहता हूं. जरा सोच कर बताइए आप जब 47 साल के होंगे तो क्या कर रहे होंगे? या ये सवाल थोड़ा अलग तरह से पूछता हूं 47 साल की उम्र में आप नौकरी के अलावा क्या कर रहे होंगे? या जब आप 47 साल के थे तो क्या कर रहे थे?

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अगर साफ-साफ कोई जवाब नहीं सूझ रहा है तो कहानी आगे बढ़ाता हूं. 47 साल का प्रश्न इसलिए पूछा क्योंकि आज लिएंडर पेस 47 साल के हो गए हैं. दिलचस्प बात ये है कि 47 साल की उम्र में भी उनका जोश बरकरार है. उनकी फिटनेस कायम है. वो अगले साल टोक्यो ओलंपिक खेलने की इच्छा रखते हैं. अगर पेस ऐसा करने में कामयाब रहते हैं तो ये एक विश्व रिकॉर्ड होगा. क्योंकि ये पेस के करियर का आठवां ओलंपिक होगा.

1992 में शुरू हुआ था ओलंपिक का सिलसिला

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लिएंडर पेस ने 1992 में बार्सिलोना से ओलंपिक का सफर शुरू किया था. इसके बाद उन्होंने 1996 ओलंपिक में ब्रांज मेडल जीता था. अपने पहले ओलंपिक से लेकर आज तक वो लगातार टेनिस के खेल में भारत की पहचान रहे हैं. उन्होंने गर्व के तमाम लम्हें दिए हैं. उनके खाते में 18 ग्रैंडस्लैम टाइटिल हैं. उनके करियर का बड़ा सच ये है कि पिछले एक दशक से लोगों को लगता है कि ये उनके करियर का आखिरी ओलंपिक्स होगा, लेकिन हर बार चार साल का वक्त बीत जाने के बाद वो उसी तरोताजा अंदाज में तैयार दिखते हैं.

इस बार तो स्थितियां बदली हुई हैं. क्योंकि 2020 टोक्यो ओलंपिक एक साल के लिए टल चुका है. पिछले दिनों लिएंडर पेस ने मैदान को अलविदा कहने का ऐलान किया था. लेकिन अब ओलंपिक के टलने के बाद वो फिर से खुद को तैयार करने में लग गए हैं.

कामयाबियों के साथ साथ चलते रहे विवाद

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लिएंडर पेस के साथ सब कुछ अच्छा होने के बाद भी 2012 में टीम के सेलेक्शन को लेकर बहुत बवाल हुआ था. लंदन ओलंपिक में महेश भूपति और रोहन बोपन्ना ने लिएंडर पेस के साथ खेलने से मना कर दिया था. ये बात हर कोई जानता है कि कभी लिएंडर पेस और महेश भूपति की जोड़ी ‘मेड फॉर ईच अदर यानी “एक दूजे के लिए” लगती थी, लेकिन बाद में इन दोनों खिलाड़ियों के बीच जबरदस्त विवाद हो गया था.

फिर इन दोनों के साथ खेलने, ना खेलने का सिलसिला चलता रहा. खैर, 2012 ओलंपिक्स में सानिया मिर्जा को पेस के साथ मिक्सड डबल्स खेलना पड़ा था. कभी दोस्त रहे लिएंडर पेस और महेश भूपति के बीच की तू-तू, मैं-मैं 2012 में अपने चरम पर पहुंच गई थी. चयनकर्ताओं को इस मामले को सुलझाने के लिए लंदन जाना पड़ा था.

जैसे-जैसे उम्र बढ़ी वैसे वैसे चमका पेस का करियर

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2015 और 2016 में मार्टिना हिंगिस के साथ लिएंडर पेस की जोड़ी मिक्सड डबल्स में कहर बरपा रही थी. 2015 में ऑस्ट्रेलियन ओपन, विबंलडन और यूएस ओपन का मिक्सड डबल्स खिताब उन्होंने जीता था. 2016 में भी मार्टिना हिंगिस के साथ वो फ्रेंच ओपन जीते. टेनिस के खेल में लिएंडर पेस की जितनी कामयाबियां हैं, अगर वो क्रिकेट के खेल में होती तो वो भारत के सुपरस्टार होते. उनके पीछे ऑटोग्राफ लेने वालों की कतार लगी होती. हर पांचवें विज्ञापन में लिएंडर पेस ही नजर आ रहे होते. शायद उन्हें भारत रत्न दिए जाने की वकालत भी की जा रही होती.

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