IND vs PAK: जब छुरी-कांटे लेकर पाकिस्तानी खिलाड़ी पर चढ़ गए थे हरभजन सिंह

भारतीय ऑफ स्पिनर ने 16 साल पहले दक्षिण अफ्रीका के सेंचूरियन में हुए इस किस्से के बारे में हस्ते हुए बताया कि मामला इतना बिगड़ गया था कि वासिम अकरम, राहुल द्रविड़ और जवागल श्रीनाथ जैसे वरिष्ठ खिलाड़ियों को बीच-बचाव के लिए आना पड़ा था.  
हरभजन सिंह, IND vs PAK: जब छुरी-कांटे लेकर पाकिस्तानी खिलाड़ी पर चढ़ गए थे हरभजन सिंह
harbhajan singh

लंदन. भारत और पाकिस्तान के बीच हाई-वोल्टेज मुकाबले के दबाव ने दक्षिण अफ्रीका में 2003 विश्व कप के दौरान हरभजन सिंह और मोहम्मद यूसुफ को अपने हाथों में छुरी-कांटे के साथ भिड़ने को मजबूर कर दिया था.

भारतीय ऑफ स्पिनर ने 16 साल पहले दक्षिण अफ्रीका के सेंचूरियन में हुए इस किस्से के बारे में हस्ते हुए बताया कि मामला इतना बिगड़ गया था कि वासिम अकरम, राहुल द्रविड़ और जवागल श्रीनाथ जैसे वरिष्ठ खिलाड़ियों को बीच-बचाव के लिए आना पड़ा था.

वैसे इस मैच को हमेशा सचिन तेंदुलकर के ऐतिहासिक 98 रन की पारी के लिए याद रखा जाएगा, लेकिन इसके साथ ही हरभजन और मोहम्मद यूसुफ के बीच की तकरार भी एक किस्से के रूप में लम्बे समय तक याद रखी जाएगी.

क्या हुआ था? 

हरभजन ने बताया, “ये एक मजाक के साथ शुरू हुआ था लेकिन बाद में ये गलत दिशा में बढ़ गया. मुझे उस मैच में ड्राप कर दिया गया था और अनिल भाई (कुंबले) को खिलाया गया था, क्योंकि टीम मैनेजमेंट का मानना थाकि उनका रिकॉर्ड पाकिस्तान के खिलाफ अच्छा है. मैं थोड़ा दुखी था और ऐसा होता है जब आपको प्लेयिंग-XI में जगह नहीं मिलती है तो.”

उन्होंने आगे बताया, “लंच के समय कॉमन एरिया में मैं एक टेबल पर बैठा था और यूसुफ व शोएब अख्तर वहीं दूसरी टेबल पर बैठे थे. हम दोनों पंजाबी बोलते हैं और एक दूसरे की खिंचाई कर रहे थे, तभी अचानक उसने निजी टिप्पणी कर दी और फिर मेरे धर्म के बारे में कुछ बोला.”

हरभजन ने हंसते हुए आगे बताया, “मैंने उनको इसका करारा जवाब दिया. इससे पहले कि कोई कुछ जान पाता हम दोनों कांटे लेकर एक दूसरे पर हमला करने के लिए हमारी कुर्सियों से उठ गए.” उस समय ये हादसा बिलकुल भी मजाकिया नहीं था.

“राहुल (द्रविड़) और श्री (जवागल श्रीनाथ) ने मुझे रोका जबकि वसीम भाई और सईद भाई यूसुफ को ले गए. दोनों टीमों के सीनियर चिढ़े हुए थे और हमें बताया कि हमारा व्यवहार सही नहीं है. इसको बीते अब 16 साल हो गए हैं. अब जब मैं यूसुफ से मिलता हम दोनों उस किस्से को याद करके हंसते हैं.”

देश के सबसे बेहतरीन स्पिनरों में से एक हैं हरभजन ने आगे कहा कि 2011 विश्व कप सेमीफाइनल के दौरान काफी दबाव था. उन्होंने निर्णायक सफलताओं के साथ मोहाली में एक बड़ी भूमिका निभाई थी.

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