दुश्मन पर वार, यारों का यार और जिम्मेदारियों से प्यार करने वाले क्रिकेटर का नाम है ‘हरभजन सिंह’

ये सच है कि हरभजन सिंह (Harbhajan Singh) भारतीय क्रिकेट के कई बड़े विवादों से जुड़े रहे, लेकिन उससे भी बड़ा सच ये है कि हरभजन सिंह भारत की तमाम ऐतिहासिक जीत के नायक भी रहे. भारत के इस महान खिलाड़ी का आज जन्मदिन है और उनके जन्मदिन पर पढ़े उनके द्वारा बताए गए मजेदार किस्से.
Harbhajan singh Birthday special, दुश्मन पर वार, यारों का यार और जिम्मेदारियों से प्यार करने वाले क्रिकेटर का नाम है ‘हरभजन सिंह’

साल 2010 के एशिया कप (Asia Cup 2010) की बात है. श्रीलंका में भारत और पाकिस्तान का मुकाबला था. एक फंसे हुए मैच में हरभजन सिंह (Harbhajan Singh) ने छक्का मारकर भारतीय टीम को जीत दिलायी थी. इससे पहले उनकी शोएब अख़्तर (Shoaib Akhtar) से तनातनी भी हुई थी. इस मैच के बाद प्रेस कॉन्फ्रेंस में कप्तान महेंद्र सिंह धोनी (MS Dhoni) से मैंने सवाल किया था कि क्या हरभजन सिंह आपकी टीम के सुपरमैन हैं? धोनी ने हंसते हुए कहा- बिलकुल. अगले दिन अख़बारों में यही सुर्ख़ियां थीं.

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तमाम ऐतिहासिक जीत के नायक रहे हरभजन

ये सच है कि हरभजन सिंह भारतीय क्रिकेट के कई बड़े विवादों से जुड़े रहे, लेकिन उससे भी बड़ा सच ये है कि हरभजन सिंह भारत की तमाम ऐतिहासिक जीत के नायक भी रहे. वो चाहे ऑस्ट्रेलिया के ख़िलाफ़ कोलकाता टेस्ट में मिली एतिहासिक जीत हो, 2007 टी-20 विश्व कप की जीत हो या पर 2011 विश्व कप की. हरभजन सिंह का पसीना इन सभी मैचों में बहा है. मैंने मैदान के भीतर-बाहर भज्जी से कई बार बातचीत की है.

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भज्जी के बताए कुछ क़िस्से यादों में हमेशा ताजा रहते हैं, जैसे टीम में उनके सेलेक्शन का क़िस्सा – भज्जी बताते हैं-

“1998 में जनवरी का महीना था. हम लोग दक्षिण अफ्रीका में अंडर 19 विश्व कप खेल रहे थे. वीरेंद्र सहवाग, मोहम्मद कैफ, रितेंदर सोढ़ी हम सब अंडर-19 टीम में थे. वहां से लौटने के बाद मैंने रणजी ट्रॉफी के कुछ मैच खेले. उस सीजन में मैंने 20 के आस पास विकेट ली थीं. उसी समय ऑस्ट्रेलिया की टीम भारत के दौरे पर थी. मुझे साइड गेम में बोर्ड प्रेसिडेंट-11 के लिए टीम में जगह मिली. उस मैच में मुझे ज्यादा कामयाबी नहीं मिली. लिहाजा, ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ टेस्ट मैच के लिए मुझे नहीं चुना गया. पिता जी का सपना और दोस्तों से किया गया वायदा पूरा करने की राह अभी कठिन थी.”

टीम में सेलेक्ट होने पर नहीं हुआ भरोसा

“ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ भारतीय टीम ने पहले दोनों टेस्ट मैच जीत लिए, इसलिए टीम में किसी बदलाव की उम्मीद भी नहीं थी. ये वो दौर था जब भारतीय टीम की कमान मोहम्मद अजहरूद्दीन के हाथ में थी. सीरीज का तीसरा टेस्ट मैच बैंगलोर में खेला जाना था. मैं घर पर ही था जब अचानक हरविंदर सिंह का फोन आया. हरविंदर सिंह भी पंजाब के लिए क्रिकेट खेला करते थे और ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ सीरीज के लिए ही भारतीय टीम में उनका सेलेक्शन हुआ था. मैंने फोन उठाया तो उन्होंने बताया कि ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ तीसरे टेस्ट मैच के लिए मुझे टीम में चुन लिया गया है. मुझे भरोसा ही नहीं हुआ. फिर टीवी से पता चला कि मुझे वाकई भारतीय टीम के लिए चुन लिया गया है”.

जब रोल मॉडल्स के साथ रूम-ड्रेसिंग रूम शेयर करने पर घबराए भज्जी

सचिन, सौरव, द्रविड़ जैसे खिलाड़ियों के साथ ड्रेसिंग रूम शेयर करने को लेकर भज्जी बताते हैं – “मैं बैंगलोर पहुंच गया था. उस ड्रेसिंग रूम का हिस्सा बन गया जिसमें सचिन तेंडुलकर, सिद्धू, अजहरूद्दीन, सौरव गांगुली और कुंबले जैसे दिग्गज खिलाड़ी थे. पहली बार उन खिलाड़ियों के साथ उठना-बैठना था, जो मेरे रोल मॉडल की तरह थे. और तो और पहली बार फाइव स्टार होटल में रूकना था. मैं बहुत घबराया हुआ था. जब मैं होटल पहुंचा तो मेरे कमरे में कोई नहीं था. मैंने थोड़ी राहत की सांस ली. कुछ देर बाद पता चला कि नवजोत सिंह सिद्धू मेरे रूम पार्टनर हैं. उन दिनों हर कमरे में दो-दो खिलाड़ी रूका करते थे.”

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“शेरी पाजी स्टार थे. लेकिन उन्होंने भी मुझे ‘कंफर्टेबल’ होने का पूरा मौका दिया. फिर भी सच ये है कि अंदर से मैं घबराया हुआ ही था. सिद्धू पाजी जब उठते थे, मैं उठ जाता था. जब वो सोते थे, मैं भी सो जाता था. नींद भले ही ना आ रही हो. जब वो कहते थे चल खाना खा लेते हैं, मैं चुपचाप खाना खा लेता था. उसके बाद वो यादगार लम्हा आया जब मैंने पहली बार भारतीय टीम के साथ नेट्स में प्रैक्टिस की. तीसरे टेस्ट के लिए मैं प्लेइंग 11 में आ गया. मेरे पिता का सपना और दोस्तों से किया गया वायदा पूरा हो चुका था. लेकिन उस टेस्ट मैच में हम हार गए.”

जब छूटा पिता का साथ

भज्जी की दुखती रग रही उनके पिता का साथ छूटना, भज्जी बहुत भावुक होकर बताते थे- “साल 2000 में अचानक मेरे पिता जी चल बसे. ऐसा लगा जैसे मेरी जिंदगी खत्म हो गई. सबकुछ ठहर गया. कुछ पता ही नहीं था कि अब आगे क्या होगा. सौ सवाल सामने थे. कभी अपनी मां के बारे में सोचता था, कभी बहनों के बारे में. ऐसा लगा जैसे सबकुछ खत्म हो गया. हम सबकी दुनिया ही उजड़ गई. मैंने भारतीय टीम के लिए खेलने का पिता जी का सपना तो पूरा कर दिया लेकिन उनके रहते रहते परिवार को पटरी पर लाने का काम नहीं कर पाया. पिता जी का साया जब उठा तब तक उन्होंने तीन बहनों की शादी कर दी थी. दो बहनों की शादी होनी अभी बाकी थी.”

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क्रिकेट छोड़ने का बना लिया था मन

“मैं पिता जी से ‘इमोशलनी’ बहुत जुड़ा हुआ था. उनके जाने के बाद मेरे ऊपर पूरे परिवार की जिम्मेदारी थी. रुपये-पैसे की परेशानियां तो खैर थी हीं, भावनात्मक तौर पर उनके जाने से मैं टूट गया था. एक रोज तो ये भी लगा कि मुझे क्रिकेट खेलना ही छोड़ देना चाहिए. ऐसा लगा जैसे भगवान ने खुशियां देकर फिर छीन ली हों. पिता जी के जाने के बाद मुश्किल भरा एक दूसरा दौर शुरू हो चुका था. मैंने लगभग मन बना लिया था कि क्रिकेट खेलना छोड़ दूंगा. परेशानी ये थी कि मुझे क्रिकेट खेलने के अलावा और कुछ आता नहीं था.”

“मेरे सामने एक ही रास्ता बचा था कि मैं अपने दोस्तों कि तरह अमेरिका या कनाडा जाकर कुछ कामधाम करूं और घरवालों को वहां से कमाकर कुछ पैसे भेज सकूं. जिससे वो जिंदगी जी सकें. मेरे लिए मेरा परिवार ही मेरी प्राथमिकता था. मैं क्रिकेट की वजह से अपनी जिम्मेदारियों को छोड़ना नहीं चाहता था. लेकिन इस मुश्किल दौर में ऊपर वाले ने बहुत साथ दिया. ऐसा लगा जैसे कोई साथ खड़े होकर मेरी मदद कर रहा हो. मुझे रास्ता दिखा रहा हो.”

भज्जी ने बातचीत में दादा को हमेशा बहुत ऊंचे दर्जे पर रखा. अपने करियर के शुरूआती दिनों को याद करके वो कहते हैं – “2001 में भारतीय टीम में मेरी वापसी हुई. उसके बाद मेरा दोबारा जन्म हुआ. उस सीरीज ने अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में मुझे अलग ही पहचान दिलाई. जिसका श्रेय सौरव गांगुली को भी जाता है, जिन्होंने टीम में मेरे सेलेक्शन की जमकर वकालत की थी.”

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भारत के टेस्ट क्रिकेट के इतिहास में पहली हैट्रिक

“ऑस्ट्रेलिया की टीम का उस वक्त अलग ही रुतबा था. स्टीव वॉ की कप्तानी में ऑस्ट्रेलिया की टीम लगातार 15 टेस्ट मैच जीत चुकी थी. भारत में सीरीज जीत के सपने के इरादे से कंगारू मैदान में उतरते थे. उस सीरीज में ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ हम पहला टेस्ट मैच हार गए थे. उस मैच में मैंने 4 विकेट ली थीं. लेकिन हमारी बल्लेबाजी बिल्कुल नहीं चली थी. अब भी मेरे करियर का असली करिश्मा होना बाकी था. अगला टेस्ट मैच कलकत्ता (कोलकाता) में था. ऑस्ट्रेलिया ने टॉस जीता और पहले बल्लेबाजी का फैसला किया.”

“टॉप ऑर्डर की मजबूत बल्लेबाजी की बदौलत ऑस्ट्रेलिया की टीम अच्छे खासे स्कोर की तरफ बढ़ रही थी. करिश्मा होना अभी बाकी था, मैंने पहले रिकी पॉन्टिंग को एलबीडब्लयू किया, फिर अगली गेंद पर एडम गिलक्रिस्ट को एलबीडब्लयू किया और उसके बाद की गेंद पर शेन वॉर्न को सदागोपन रमेश के हाथों कैच कराया. ये मेरी हैट्रिक थी. भारत के टेस्ट क्रिकेट के इतिहास में पहली हैट्रिक वो भी ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ. मैं खुशी से जूझ उठा, मुझे लगा कि सब ऊपर वाले का आशीर्वाद है.”

कोलकाता टेस्ट की ऐतिहासिक जीत

कोलकाता टेस्ट की ऐतिहासिक जीत का क़िस्सा तो भज्जी को रटा हुआ है. वो कहते हैं – “ड्रेसिंग रूम में हमने तय किया कि अपनी तरफ से हर कोई मैच बचाने के लिए जान लगाएगा. हम ऑस्ट्रेलिया से करीब ढाई सौ रन पीछे थे. फॉलोऑन के बाद जब हम लोग दोबारा बल्लेबाजी करने के लिए उतरे तो थोड़ा बेहतर खेल दिखाया. असली इतिहास रचा लक्ष्मण भाई और द्रविड़ ने. हम लोग बस आंखे फाड़े उनकी बल्लेबाजी देख रहे थे. हमारा स्कोर दो सौ, तीन सौ, चार सौ और करते-करते 600 के पार पहुंच गया. लक्ष्मण और द्रविड़ की बल्लेबाजी के लिए कुछ भी कहना कम होगा.”

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“हमने ऑस्ट्रेलिया को 384 रनों का लक्ष्य दिया. टेस्ट मैच में अब हमारी पकड़ मजबूत थी. अब मैच बचाना नहीं मैच जीतना था. हम गेंदबाजी करने उतरे तो मैंने अपने पिता जी को याद किया और एक छोर संभाल लिया. मुश्किल हालात के बाद भी ऑस्ट्रेलिया ने शुरुआत अच्छी की थी. लेकिन आखिरकार मेरी एक गेंद को खेलने में माइकल स्लैटर गलती कर गए और दादा को कैच दे बैठे. इसके बाद तो मैंने कंगारुओं को संभलने का मौका ही नहीं दिया. जस्टिन लैंगर मेरे अगले शिकार थे. क्रीज की दूसरी तरफ से मेरा साथ दिया सचिन तेंडुलकर ने, उन्होंने भी ऑस्ट्रेलियाई बल्लेबाजों को खूब परेशान किया.”

तोड़ा ऑस्ट्रेलिया का सपना

“दरअसल, उस सीरीज से पहले अनिल भाई को चोट लग गई थी और वो टीम का हिस्सा नहीं थे. आखिरकार एक के बाद एक ऑस्ट्रेलियाई बल्लेबाजों को पवेलियन का रास्ता दिखाते गए और हमने ऐतिहासिक टेस्ट मैच जीता. ऑस्ट्रेलिया की पूरी टीम दूसरी पारी में 212 रन पर सिमट गई. मेरे खाते में 6 विकेट आए और सचिन पाजी ने 3 विकेट लिए. इस एक टेस्ट मैच ने अंतर्राष्ट्रीय क्रिकेट में भारतीय टीम की साख को बदल दिया. हमारी टीम के खिलाड़ियों का नजरिया ही बदल गया. इस जीत के बाद ही लक्ष्मण भाई, राहुल भाई और मुझे अलग-अलग नाम दिए गए. हमने ऑस्ट्रेलिया को हराया था वो भी फॉलोऑन से वापस आने के बाद.”

“आज करीब 14-15 साल बाद भी अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में कोई भी टीम विरोधी टीम को फॉलोऑन देने के पहले सोचती है, क्योंकि उसके दिमाग में हमारी वो एतिहासिक जीत अब भी ताजा रहती है. इसके बाद सीरीज का आखिरी टेस्ट मैच चेन्नई में था. मैंने आखिरी मैच में 15 विकेट लिए. हमने कंगारुओं को 2 विकेट से हराया. 3 टेस्ट मैचों की सीरीज में मैंने 32 विकेट लिए थे. मुझे मैन ऑफ द मैच और मैन ऑफ द सीरीज का अवॉर्ड मिला. हमने ऑस्ट्रेलिया के भारत में सीरीज जीतने के सपने को तोड़ दिया. हमारी टीम को अलग पहचान मिली. मेरा करियर एक अलग ही मुकाम पर पहुंच गया”.

जन्मदिन की बहुत बहुत शुभकामनाएं मेरे चैंपियन क्रिकेटर. आपके सुनाए ये तमाम क़िस्से चेहरे पर मुस्कान ला देते हैं.

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