21 दिन के लॉकडाउन के बाद हॉकी, एथलेटिक्स और वेटलिफ्टिंग के कैंप भी हुए बंद

कोरोनावायरस के कहर के चलत सबकुछ ठप्प पड़ चुका है. ओलंपिक के भी टाले जाने की खबर आ चुकी है. ऐसे समय में प्राथमिकता हर किसी की जान है.

कुछ रोज पहले टीवी9 भारतवर्ष ने आपको बताया था कि बेंगलुरू में भारतीय पुरुष और महिला टीम का हॉकी कैंप जारी था. ऐसे वक्त में जब विषम परिस्थितियों में ही बाहर निकलने की सलाह दी गई थी और जब खेल के तमाम इवेंट्स स्थगित या रद्द हो रहे थे तब भी पुरूषों और महिलाओं की टीम बेंगलुरू में पसीना बहा रही थी.

ऐसा भी कहा जा रहा था कि चूंकि अब कोरोना की वजह से खिलाड़ी अपने घर नहीं जा सकते हैं तो खाली बैठने से अच्छा है कि अभ्यास किया जाए. हालांकि इस अभ्यास में भी पूरी सतर्कता बरती जा रही थी. किसी भी बाहरी व्यक्ति को कैंप में आने की इजाजत नहीं थी. सपोर्ट स्टाफ और खिलाड़ियों की सेहत पर पूरा ध्यान रखा जा रहा था.

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कुछ ऐसे ही हालात पटियाला में स्पोर्ट्स अथॉरिटी ऑफ इंडिया के सेंटर में भी थे, लेकिन मंगलवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 21 दिन के लॉकडाउन के ऐलान के बाद ये सारी गतिविधियां भी बंद हो गई हैं. टीवी9 भारतवर्ष ने अपनी पिछली रिपोर्ट में भी इस बात का फैसला पाठकों पर छोड़ा था कि मुश्किल वक्त में चल रहे इस कैंप को खिलाड़ियों की हिम्मत कहें या फिर मजबूरी? खैर, आपको बताते हैं कि ये फैसला क्यों लेना पड़ा.

ओलंपिक खेलों के टाले जाने की खबर आ चुकी है

सच्चाई ये है कि लाख सतर्कता के बाद भी कोरोना से बचने का इकलौता तरीका है सोशल डिस्टेंशिंग. हॉकी, एथलेटिक्स और वेटलिफ्टिंग के खिलाड़ियों के लिए भी यही बचाव का तरीका है. ज्यादातर खिलाड़ी इसलिए भी पसीना बहा रहे थे क्योंकि इसी साल जुलाई में टोक्यो ओलंपिक का आयोजन होना था. जो एथलीट टोक्यो ओलंपिक के लिए क्वालीफाई कर चुके हैं उनकी आंखों में ओलंपिक मेडल का सपना पल रहा था.

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यही वजह है कि खिलाड़ी जोखिम के बाद भी मैदान में डटे हुए थे. लेकिन इस पूरी मेहनत पर तब पानी फिर गया जब टोक्यो ओलंपिक के टाले जाने की खबर आई. इंटरनेशनल ओलंपिक कमेटी के वरिष्ठ सदस्य डिक पाउंड ने पहले ही कह दिया था कि अब 2021 तक ओलंपिक को टालने के अलावा कोई चारा नहीं बचा है. इससे पहले जापान के प्रधानमंत्री ने भी ओलंपिक टाले जाने के संकेत दे दिए थे. ये फैसला कनाडा और तमाम दूसरे देशों के टोक्यो में अपने एथलीटों को न भेजने के फैसले के बाद करना पड़ा.

लॉकडाउन के बाद खिलाड़ियों को दी गई हिदायतें

लॉकडाउन से पहले महिला हॉकी टीम ने भी जनता कर्फ्यू के दिन सेवा में जुटे लोगों का आभार व्यक्त करने के लिए वीडियो डाला था. इसके बाद महिला टीम की खिलाड़ियों का ही सोशल डिस्टेंसिंग का एक दिलचस्प वीडियो भी आया था. लेकिन अब खिलाड़ियों को दोबारा बेहद सतर्क रहने को कहा गया है. खिलाड़ियों को कहा गया है कि वो दिन भर अपने कमरे में ही रहें और सिर्फ खाना खाने के लिए बाहर आएं. कैंप में जिम आने से खिलाड़ियों को रोक दिया गया है.

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जाहिर है अब खिलाड़ियों को एक दूसरे से मिलने की इजाजत भी नहीं है. कोरोना इस समय जिस कदर वैश्विक महामारी बनकर आया है उसने सबकुछ ठप्प कर दिया है. ओलंपिक खेलों का टलना कई खिलाड़ियों के सपने टूटने जैसा है. क्योंकि एक साल बाद ओलंपिक हुआ तो भी खिलाड़ियों के प्रदर्शन का स्तर बदल चुका होगा. बावजूद इसके फिलहाल प्राथमिकता हर किसी की जान है. प्रधानमंत्री मोदी तक कह चुके हैं कि जान है तो जहान है.

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