21वीं सदी में श्रवण कुमार की नहीं ज्योति की कहानी सुनेगी नई पीढ़ी

आज ज्योति की कहानी पूरे विश्व में सुनाई दे रही है. जिस हिम्मत और साहस के साथ उन्होंने अपने पिता को गुरुग्राम से दरभंगा पहुंचाया ये वाकई किसी मिसाल से कम नहीं है. सरकार भी अब ज्योति को उनका हुनर दिखाने का मौका देने जा रही है.

Jyoti the Shravan Kumar of 21st century, 21वीं सदी में श्रवण कुमार की नहीं ज्योति की कहानी सुनेगी नई पीढ़ी

कोरोनावायरस महामारी ने पूरे विश्व को अपने जद में ले लिया है. भारत में भी इसका प्रकोप बढ़ रहा है. भारत में 24 मार्च से लॉकडाउन जारी है. इस बीच लाखों मजदूर अपने घर से दूर दूसरे राज्यों में फंसे हुए थे. जिन्होंने बाद में पैदल ही मीलों का सफर तय करना शुरू किया. कोई पैदल जा रहा था, कोई अपने बच्चों को गोद में लिए चल रहा था, लेकिन एक 15 साल की लड़की अपने पिता को साइकिल पर बिठाकर हरियाणा के गुरुग्राम से निकली और पहुंच गई 1200 किलोमीटर का सफर तय कर बिहार के दरभंगा यानी अपने घर.

देखिये फिक्र आपकी सोमवार से शुक्रवार टीवी 9 भारतवर्ष पर हर रात 9 बजे

आज के दौर में जहां माता-पिता को बच्चे बोझ समझने लगे हैं. वहीं ज्योति को श्रवण बेटी की उपाधि दी जा रही है. ज्योति की चर्चा आज सिर्फ भारत में ही नहीं विदेशों में भी हो रही है. इसके बाद अब सरकार ज्योति के कौशल को परखने जा रही है. इससे ज्योति आने वाले वक्त में एक खिलाड़ी के रूप में अपनी नई पहचान बना सके.

सरकार देगी ज्याति को अपना हुनर दिखाने का मौका

ज्योति की कहानी जिसके भी कानों में जा रही है वो प्रेरित हो रहा है. आम से लेकर खास हर कोई हैरान है कि कैसे एक 15 साल की मासूम बेटी गुरुग्राम से बिहार के दरभंगा अपने पिता को साइकल पर बिठाकर ले गई. उसने कैसे 1200 किलोमीटर तक अपने पिता को बिठाकर साइकिल खींची. लेकिन सच्चाई यही है. इसके बाद अब सरकार ने ज्योति के भविष्य को संवारने की पहल की है.

केंद्रीय कानून मंत्री रविशंकर प्रसाद ने कहा कि बिहार की एक लड़की के साहस के बारे में जाना. जिसने गुरुग्राम से दरभंगा तक अपने पिता के साथ 1000 से ज्यादा किलोमीटर तक साइकल चलाई. उनकी प्रतिभा निखारने के लिए किरण रिजिजू से बात की है. साथ ही खेल मंत्री से ज्योति को प्रशिक्षण दिलाने में मदद करने का अनुरोध भी किया. उन्होंने ये भी कहा कि खेल मंत्री ने बिहार की इस साहसी लड़की को प्रशिक्षण और छात्रवृत्ति के माध्यम से पूर्ण समर्थन देने का अनुरोध किया है. यदि वो इच्छुक हैं तो उन्हें एक साइक्लिस्ट के रूप में विकसित किया जा सकता है.

इसके बाद केंद्रीय खेल मंत्री किरण रिजिजू ने भी जवाब देते हुए ट्वीट किया. उन्होंने लिखा कि मैं आपको आश्वस्त करता हूं कि ज्योति कुमारी के ट्रायल के बाद SAI अधिकारियों और साइक्लिंग फेडरेशन को मुझे रिपोर्ट करने के लिए कहा गया है. अगर संभव हुआ, तो उन्हें दिल्ली में IGI स्टेडियम परिसर में राष्ट्रीय साइक्लिंग अकैडमी में प्रशिक्षु के रूप में चुना जाएगा.

हालांकि इससे पहले ही भारतीय साइकिलिंग फेडरेशन ऑफ इंडिया ने ज्योति को ट्रायल का मौका देने की बात कही थी. CFI के निदेशक वीएन सिंह ने कहा था कि महासंघ उसे ट्रायल का मौका देगा. अगर ज्योति CFI के मानकों पर थोड़ी भी खरी उतरती है तो उन्हें विशेष ट्रेनिंग और कोचिंग मुहैया कराई जाएगी.

ज्योति की मुरीद हुई इवांका ट्रंप

ज्योति कुमारी जहां आज हर भारतीय की प्रेरणा बन चुकी हैं. वहीं अमेरिकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप की बेटी इवांका ट्रंप भी ज्योति की सराहना करती हुई नजर आईं थीं. इवांका ट्रंप ने ट्वीट करते हुए लिखा कि 15 साल की ज्योति कुमारी, अपने घायल पिता को 7 दिनों में 1200 किलोमीटर की दूरी तय कर अपनी साइकिल पर बैठाकर अपने गांव ले गई. धीरज और प्रेम के इस खूबसूरत कारनामे ने भारतीय लोगों और साइकिल फेडरेशन का भी ध्यान अपनी तरफ खींच लिया है.

आज ज्योति की कहानी पूरे विश्व में सुनाई दे रही है. जिस हिम्मत और साहस के साथ उन्होंने अपने पिता को गुरुग्राम से दरभंगा पहुंचाया ये वाकई किसी मिसाल से कम नहीं है. सरकार भी अब ज्योति को उनका हुनर दिखाने का मौका देने जा रही है.

Related Posts