IND vs BNG : ईडन गार्डन के डे-नाइट टेस्ट में पिंक गेंद करेगी कमाल, मेरठ में हुई है तैयार

तीन साल तक रिसर्च करने के बाद यह गेंद तैयार की गई, क्योंकि 90 दिनों तक इस गेंद को चलाने की चुनौती रहती है.
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भारत और बांग्लादेश की क्रिकेट टीम शुक्रवार को अपना पहला डे-नाइट टेस्ट मैच कोलकाता के ईडन गार्डन्स स्टेडियम में खेलेंगी. ये डे-नाइट टेस्ट फॉर्मेट नया है और इसे इंटरनेशन क्रिकेट में इसलिए लाया गया है ताकि खेल के लंबे फॉर्मेट की गिरती हुई साख को दोबारा स्थापित किया जा सके और दर्शकों को मैदान की ओर खींचा जा सके.

आमतौर पर दिन में खेले जाने वाले मैंच में लाल गेंद का इस्तेमाल किया जाता है, लेकिन डे-नाइट टेस्ट फॉर्मेट में गुलाबी गेंद का इस्तेमाल होता है. भारत और बांग्लादेश की टीम शुक्रवार को जिस गुलाबी गेंद से खेलेंगी, उस गेंद को खासतौर पर मेरठ में तैयार किया गया है.

मेरठ की संसपैरेल्स ग्रीनलैंड्स (एसजी) कंपनी ने इस गुलाबी गेंद को खास ऑर्डर पर तैयार किया है. मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, एसजी कंपनी से भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (बीसीसीआई) ने ईडन गार्डन में होने वाले डे-नाइट टेस्ट मैच के लिए स्पेशली गुलाबी गेंद की मांग की थी.

इस गुलाबी गेंद को बनाने में 6 से 8 दिन लगते हैं. वहीं जो गेंद टेस्ट मैच के लिए तैयार की गई है, उसका परीक्षण किया जा चुका है. तीन साल तक रिसर्च करने के बाद यह गेंद तैयार की गई, क्योंकि 90 दिनों तक इस गेंद को चलाने की चुनौती रहती है.

रिपोर्ट के मुताबिक, गुलाबी गेंद बाकी गेंदों से महंगी है. इस एक गेंद पर छह हजार रुपए से ज्यादा का खर्चा हुआ है.

लाल की जगह गुलाबी गेंद क्यों?

टेस्ट मैच में खिलाड़ी सफेद रंग के कपड़ों में होते हैं, इसलिए लाल गेंद का इस्तेमाल किया जाता है. हालांकि डे-नाइट टेस्ट मैच के दौरान खिलाड़ियों को लाल गेंद से खेलने में दिक्कत का सामना करना पड़ता है, जिसके कारण गुलाबी गेंद का इस्तेमाल किया जा रहा है.

एसजी के मार्केटिंग डायरेक्टर पारस आनंद ने कहा, “लाल गेंद और गुलाबी गेंद में एक बड़ा अंतर यह होता है कि गुलाबी गेंद में रंग की एक अतिरिक्त लेयर होती है. लाल गेंद में आप डाय करते हैं और रंग मिल जाता है, लेकिन गुलाबी गेंद में एक प्रक्रिया होती है, जिसमें आप लेयर बाय लेयर इसे बनाते हैं. इन दोनों गेंदों में एक बड़ा अंतर है और इसी के कारण गुलाबी गेंद में शुरुआत में ज्यादा चमक होती है जो 5-10 ओवर ज्यादा गेंद पर रहती है और इसी कारण यह थोड़ा ज्यादा स्विंग करेगी.”

टेस्ट में रिवर्स स्विंग बड़ा रोल निभाती है. तेज गेंदबाज रिवर्स स्विंग के दम पर विकेट निकालते हैं, लेकिन रिवर्स स्विंग कराने के लिए गेंद को बनाना पड़ता है. गेंद को बनाने का मतलब है कि उसकी एक सतह को भारी करना है.

उन्होंने कहा, “रिवर्स स्विंग के लिए काफी चीजें भी मायने रखती हैं सिर्फ गेंद ही नहीं. मैदान, पिच काफी चीजें हैं जो रिवर्स स्विंग पर असर डालती हैं.”

 

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